Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَتِيمًا: वह बच्चा जिसका पिता मर चुका हो।
- ذَا مَقْرَبَةٍ: रिश्तेदारी वाला, जो आपसे क़राबत (रिश्ते) का हो।
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला उस कठिन दिन में भोजन खिलाने का ज़िक्र कर रहे हैं, जब भूख और अभाव का दौर हो। उस हालत में किसी ऐसे यतीम (अनाथ) को खाना खिलाना जो आपका रिश्तेदार भी हो, बहुत बड़ी नेकी है। इसमें दो अज़ीम सवाब जुड़ जाते हैं — एक तो यतीम की कफ़ालत (देखभाल) का, और दूसरा सिला-रहमी (रिश्तेदारी के हक़ अदा करने) का। यानी जो बच्चा अपने पिता की मौत के बाद किसी का सहारा नहीं रखता, और वह भी आपके अपने ख़ानदान या रिश्तेदारी में से हो, उसकी मदद करना अल्लाह के यहाँ बेहद पसंदीदा अमल है। यह वह मुक़ाम है जहाँ इंसान अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च करके उसकी मुहब्बत का सबूत देता है। याद रखिए, अल्लाह तआला उस बंदे से बेहद प्यार करता है जो अपने रिश्तेदारों के यतीमों की परवरिश करता है, उन्हें अपने बच्चों की तरह प्यार देता है और उनकी ज़रूरतों का ख़याल रखता है। यही वह रास्ता है जो इंसान को जन्नत की तरफ ले जाता है और उसे अल्लाह की रहमत का हक़दार बनाता है।
📜 आयत 13-17 — सूरा अल-बलद
अनुवाद — अल-बलद 15
सूरा अल-बलद आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मोहताज कोसूरा आयत 15/20 — सूरा अल-बलद البلد (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बलद सुनें, सूरा अल-बलद अनुवाद, सूरा अल-बलद mp3, सूरा अल-बलद pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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