Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مِسْكِينًا (मिस्कीन): अत्यंत गरीब, जिसके पास जीवन की बुनियादी ज़रूरतें भी मौजूद न हों।
- ذَا مَتْرَبَةٍ (ज़ा मतरबा): वह व्यक्ति जो भूख और गरीबी के कारण ज़मीन (मिट्टी) पर चिपक गया हो, यानी इतना निर्धन कि उसके पास कुछ भी न हो और वह मिट्टी पर ही पड़ा रहे।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला उन लोगों को संबोधित कर रहे हैं जो "अक़बा" (दुर्गम घाटी) को पार करना चाहते हैं, यानी जो कठिनाइयों के बावजूद अच्छे कर्म करके जन्नत की ओर बढ़ना चाहते हैं। अल्लाह बताते हैं कि इस घाटी को पार करने का एक सबसे बड़ा रास्ता है—भूखे को खाना खिलाना। पिछली आयतों में नातेदार अनाथ (यतीम) का ज़िक्र आया, और अब इस आयत में अल्लाह फ़रमाते हैं कि या फिर उस मिस्कीन को खाना खिलाओ जो ज़मीन पर चिपका हुआ है—यानी वह इतना गरीब है कि उसके पास न घर है, न कपड़ा, न खाना, और वह मिट्टी पर ही पड़ा रहता है।
यहाँ अल्लाह ने "ذَا مَتْرَبَةٍ" कहकर उस गरीबी की अत्यंत दयनीय स्थिति को बयान किया है जहाँ इंसान की ज़रूरतें सबसे बुनियादी स्तर पर पहुँच जाती हैं। ऐसे लोगों की मदद करना सिर्फ एक सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा का ज़रिया है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ इबादत का नाम नहीं, बल्कि इंसानियत की सेवा का भी नाम है। जब हम किसी भूखे को खाना खिलाते हैं, किसी निर्धन की मदद करते हैं, तो हम सिर्फ उसका पेट नहीं भरते, बल्कि अल्लाह की रहमत को अपनी तरफ खींचते हैं। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "जो कोई किसी मुसलमान की दुनियावी मुश्किल दूर करेगा, अल्लाह उसकी आख़िरत की मुश्किल दूर करेगा।"
याद रखिए, जब आप किसी मिस्कीन की मदद करते हैं, तो आप अल्लाह की नज़र में बहुत ऊँचा दर्जा पाते हैं। यह आयत हमें बताती है कि हमारे आसपास ऐसे लोग हो सकते हैं जिन्हें हमारी मदद की सख्त ज़रूरत है—चाहे वह पड़ोस का कोई गरीब हो, या सड़क पर पड़ा कोई बेसहारा। आइए, हम इस आयत पर अमल करें और अपने रब की रज़ा के लिए भूखों को खाना खिलाएँ, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह हमें इस तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 14-18 — सूरा अल-बलद
अनुवाद — अल-बलद 16
सूरा अल-बलद आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : खाना खिलानासूरा आयत 16/20 — सूरा अल-बलद البلد (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बलद सुनें, सूरा अल-बलद अनुवाद, सूरा अल-बलद mp3, सूरा अल-बलद pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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