अल-बलद · 14/20
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बलद
أَوْ إِطْعَامٌ فِي يَوْمٍ ذِي مَسْغَبَةٍ ۝١٤
Aw it`aamun fee yawmin zee masghabah
📖 हिंदी अर्थ
या भूख के दिन रिश्तेदार यतीम या ख़ाकसार

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَسْغَبَةٍ (मस्ग़बा): अत्यधिक भूख और अकाल का दिन, जब भोजन की भारी कमी हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उस कठिन रास्ते (अक़बा) को पार करने का एक और तरीक़ा बयान कर रहे हैं, और वह है भूख और अकाल के दिनों में लोगों को खाना खिलाना। यह कोई साधारण दान नहीं, बल्कि उस वक़्त का इत'आम (खाना खिलाना) है जब हालात बेहद सख्त हों, भूख आम हो, और खाना मयस्सर न हो। ऐसे हालात में किसी भूखे को खाना खिलाना सिर्फ एक नेकी नहीं, बल्कि जान बचाने के बराबर है।

इस इत'आम की विशेषता यह है कि यह यतीम (अनाथ) को खिलाया जाए जो रिश्तेदार भी हो — इसमें दो नेकियाँ जमा हो जाती हैं: एक सदक़ा (दान) का सवाब, और दूसरी सिला-रहमी (रिश्तेदारी का हक़ अदा करने) का अज्र। या फिर ऐसे मिस्कीन (गरीब) को खिलाया जाए जो बिल्कुल मुहताज हो, जिसके पास कुछ भी न हो और जो खुद अपनी ज़रूरत पूरी करने पर क़ादिर न हो।

यह आयत हमें सिखाती है कि असली नेकी सिर्फ़ इबादत में नहीं, बल्कि अल्लाह की मख़लूक़ की ख़िदमत में भी है। जब हालात सख्त हों, तब देना सबसे ज़्यादा पसंदीदा है — क्योंकि उस वक़्त इंसान अपनी ज़रूरत के बावजूद दूसरों को तरजीह देता है। यही सच्ची ईमानदारी और क़ुरबानी का जज़्बा है।

अल्लाह तआला हमें तौफ़ीक़ दे कि हम अपने पड़ोसी, रिश्तेदार और ज़रूरतमंदों का ख़्याल रखें, ख़ासकर मुश्किल वक़्तों में — क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है। आमीन।



📜 आयत 12-16 — सूरा अल-बलद

12وَمَا أَدْرَاكَ مَا الْعَقَبَةُ
और तुमको क्या मालूम कि घाटी क्या है
13فَكُّ رَقَبَةٍ
किसी (की) गर्दन का (गुलामी या कर्ज से) छुड़ाना
14أَوْ إِطْعَامٌ فِي يَوْمٍ ذِي مَسْغَبَةٍ
या भूख के दिन रिश्तेदार यतीम या ख़ाकसार
15يَتِيمًا ذَا مَقْرَبَةٍ
मोहताज को
16أَوْ مِسْكِينًا ذَا مَتْرَبَةٍ
खाना खिलाना
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अनुवाद — अल-बलद 14

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Friday, October 2, 2026

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