अल-बलद · 6/20
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बलद
يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًا لُّبَدًا ۝٦
Yaqoolu ahlaktu maalal lubadaa
📖 हिंदी अर्थ
वह कहता है कि मैने अलग़ारों माल उड़ा दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَقُولُ (यक़ूलु): वह कहता है
  • أَهْلَكْتُ (अहलकतु): मैंने खर्च कर दिया / नष्ट कर दिया
  • مَالًا (मालन): धन
  • لُبَدًا (लुबदन): बहुत अधिक, ढेर सारा, जो जमा होकर परत-दर-परत चढ़ा हुआ हो

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत उस घमंडी और अभिमानी इंसान का चित्रण करती है जो अपने धन और ताकत पर इतराता है। वह शेखी बघारते हुए कहता है: "मैंने बहुत सारा धन खर्च कर दिया!" — यानी वह अपने इस कथन से दूसरों को प्रभावित करना चाहता है और अपनी बड़ाई करना चाहता है कि देखो, मैंने कितना विशाल धन नष्ट कर दिया या खर्च कर दिया। वह इस धन को इस्लाम और रसूलुल्लाह ﷺ के विरोध में खर्च करता है, ताकि सत्य को दबा सके और अपनी शान-ओ-शौकत का प्रदर्शन कर सके।

यह "لُبَدًا" (लुबदन) शब्द बताता है कि वह धन इतना अधिक था कि एक-दूसरे के ऊपर जमा होकर ढेर बन गया था — फिर भी उसने उसे दुश्मनी और अहंकार के रास्ते में लुटा दिया। लेकिन अफसोस! यह इंसान भूल गया कि यह सब कुछ अल्लाह की नज़र में है। अल्लाह तआला उसके हर छोटे-बड़े काम को देख रहा है, और उसका हर दाना-दाना, हर कौड़ी-कौड़ी उसके हिसाब में दर्ज हो रही है।

क्या उसे यह ख्याल नहीं आया कि जिस अल्लाह ने उसे यह धन दिया है, वही उससे इसके खर्च का हिसाब भी लेगा? क्या उसने यह समझा कि वह इस दुनिया में जो चाहे करे और उसे कोई पकड़ने वाला नहीं? नहीं! बिल्कुल नहीं। अल्लाह तआला उसके सामने है, उसकी निगाहों के सामने है, और वह उसके इस घमंड और अहंकार को देख रहा है।

यह आयत हमें सिखाती है कि धन अल्लाह की देन है और उसका सही उपयोग अल्लाह की राह में, भलाई के कामों में और ज़रूरतमंदों की मदद में करना चाहिए। जो व्यक्ति धन को अहंकार, दुश्मनी और फिजूलखर्ची में लुटाता है, वह वास्तव में अपना ही नुकसान करता है। उसे याद रखना चाहिए कि अल्लाह की नज़र उस पर है और उसे हर चीज़ का हिसाब देना होगा।

इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने धन और संसाधनों का उपयोग अल्लाह की राह में करना चाहिए — गरीबों की मदद, अनाथों की सहायता, और इस्लाम की सेवा में। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाएगा। धन की शेखी और घमंड नाश करने वाला है, जबकि अल्लाह की राह में खर्च करना ही असली कामयाबी का ज़रिया है।



📜 आयत 4-8 — सूरा अल-बलद

4لَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ فِي كَبَدٍ
हमने इन्सान को मशक्क़त में (रहने वाला) पैदा किया है
5أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌ
क्या वह ये समझता है कि उस पर कोई काबू न पा सकेगा
6يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًا لُّبَدًا
वह कहता है कि मैने अलग़ारों माल उड़ा दिया
7أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُ أَحَدٌ
क्या वह ये ख्याल रखता है कि उसको किसी ने देखा ही नहीं
8أَلَمْ نَجْعَل لَّهُ عَيْنَيْنِ
क्या हमने उसे दोनों ऑंखें और ज़बान
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अनुवाद — अल-बलद 6

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Thursday, October 1, 2026

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