अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذُرِّيَّةٌ (ज़ुर्रिय्यत): संतान, युवा वर्ग, नई पीढ़ी।
- مَلَئِهِمْ (मलइहिम): उनके (फ़िरऔन के) सरदार, कुलीन और प्रमुख लोग।
- يَفْتِنَهُمْ (यफ़्तिनहुम): उन्हें सज़ा देना, उन्हें धर्म से फेरने के लिए अत्याचार करना, उन्हें परीक्षा में डालना।
- لَعَالٍ (ल'आलिन): बहुत ऊँचा, अत्यंत घमंडी, ज़बरदस्त और दबंग।
- الْمُسْرِفِينَ (अल-मुसरिफ़ीन): हद से बढ़ने वाले, अत्याचारी, कुफ़्र और फ़साद में चरम सीमा तक पहुँचने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सामने अल्लाह के स्पष्ट चमत्कार और प्रमाण पेश किए, तो उनके सामने वाले अधिकांश लोगों ने उन्हें झुठलाया और ईमान लाने से इनकार कर दिया। उनकी दावत पर केवल उन्हीं की क़ौम (बनी इसराईल) के कुछ युवा लोगों ने ईमान क़ुबूल किया। यह संख्या बहुत कम थी और ये लोग भी पूरी तरह खुले दिल से नहीं, बल्कि फ़िरऔन और उसके सरदारों के डर की वजह से छिपकर ईमान लाए थे। उन्हें यह डर था कि कहीं फ़िरऔन और उसके बड़े लोग उन्हें सज़ा न दें, उन पर अत्याचार न करें और उन्हें उनके दीन से न फेर दें।
यहाँ "ذُرِّيَّةٌ" (संतान/युवा) से मुराद बनी इसराईल के वे नौजवान हैं जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर ईमान लाए। उनके बुज़ुर्ग और बड़े लोग, जो फ़िरऔन के दबाव और उसकी सत्ता से प्रभावित थे, वे ईमान नहीं लाए। फिर अल्लाह तआला ने फ़िरऔन की हालत बयान की कि वह धरती में बहुत बड़ा ज़ालिम, सरकश और घमंडी था। उसने अपनी सत्ता और ताक़त के घमंड में अपनी हद से बढ़कर कुफ़्र, ज़ुल्म और बनी इसराईल पर अत्याचार की सारी हदें पार कर दी थीं। वह इतना आगे बढ़ गया था कि उसने अपने आपको रब (पालनहार) होने का दावा कर दिया था।
फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):
- कठिन परिस्थितियों में भी सच्चाई का साथ देना: हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के साथ कम संख्या में भी जो लोग ईमान लाए, वे इस बात का सबूत हैं कि सच्चाई का साथ देने के लिए भीड़ की ज़रूरत नहीं होती। अल्लाह की मदद सच्चे और मुट्ठी भर लोगों के साथ भी होती है।
- ज़ुल्म और सरकशी का अंजाम: फ़िरऔन की सरकशी, घमंड और हद से बढ़ना इस बात की निशानी है कि जो लोग अल्लाह के आगे झुकते नहीं और अपनी ताक़त पर इतराते हैं, वे अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकते। उनका अंजाम हमेशा बुरा होता है।
- ईमान की परीक्षा: ईमान लाने का मतलब सिर्फ़ ज़ुबान से कहना नहीं, बल्कि उस रास्ते पर चलने की मुसीबतें सहना भी है। बनी इसराईल के नौजवानों ने डर के बावजूद ईमान क़ुबूल किया, यह हमें सिखाता है कि हक़ (सच्चाई) के लिए क़ुर्बानी देने का हौसला रखना चाहिए।
- अल्लाह पर भरोसा: जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसे दुश्मनों के डर से निकालकर अपनी पनाह में ले लेता है। फ़िरऔन जैसे ज़ालिम की ताक़त अल्लाह के मुक़ाबले में कुछ भी नहीं।
📜 आयत 81-85 — यूनुस
अनुवाद — यूनुस 83
सूरा यूनुस आयत 83 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अलग़रज़ मूसा पर उनकी क़ौम की नस्ल के चन्द आदमियों…सूरा आयत 83/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 81–85. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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