हूद · 104/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
وَمَا نُؤَخِّرُهُ إِلَّا لِأَجَلٍ مَّعْدُودٍ ۝١٠٤
Wa maa nu`akhkhiruhooo illaa li ajalim ma`dood
📖 हिंदी अर्थ
और हम बस एक मुअय्युन मुद्दत तक इसमें देर कर रहे है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نُؤَخِّرُهُ: हम उसे टालते हैं (अर्थात उस दिन को पीछे धकेलते हैं)।
  • لِأَجَلٍ مَّعْدُودٍ: एक निर्धारित और गिनी हुई अवधि तक (जो अल्लाह के ज्ञान में निश्चित है)।

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला क़यामत के दिन के आने के समय के बारे में बता रहे हैं। यह दिन जिसका वादा किया गया है, उसे अल्लाह ने केवल एक निश्चित और गिनी हुई अवधि तक के लिए टाला है। यह अवधि अल्लाह के ज्ञान में पूरी तरह निर्धारित है — न उसमें कोई कमी हो सकती है और न अधिकता। जब यह अवधि पूरी हो जाएगी, तो वह दिन अवश्य आएगा, न पहले और न बाद में। यह टालना अल्लाह की हिक्मत (बुद्धिमत्ता) और उसके इल्म (ज्ञान) के अनुसार है, न कि कोई संदेह या आकस्मिकता। अल्लाह ने इस दिन को इसलिए मुअय्यन किया है ताकि लोगों को मौका मिले, वे तौबा करें, अच्छे कर्म करें और अपने जीवन को सुधारें। यह अवधि अल्लाह के निकट एक निश्चित समय है, जिसे कोई नहीं जानता सिवाय उसके, और जब वह समय आएगा, तो सभी प्राणियों को हिसाब के लिए खड़ा किया जाएगा।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि क़यामत का आना निश्चित है, और उसका समय अल्लाह के ज्ञान में मुक़र्रर है। इसलिए हमें इस दिन के लिए तैयारी करनी चाहिए और अपने आप को अच्छे कर्मों से सजाना चाहिए।
  2. अल्लाह का टालना उसकी रहमत और हिक्मत का प्रमाण है — वह हमें मौका देता है कि हम अपनी ग़लतियों को सुधारें और उसकी ओर लौटें। यह हमारे लिए एक बड़ा अवसर है, जिसे हमें गंवाना नहीं चाहिए।
  3. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह का हर काम एक निश्चित योजना और हिक्मत के अनुसार होता है। हमें उसके फ़ैसलों पर भरोसा करना चाहिए और उसकी तदबीर (योजना) पर संतुष्ट रहना चाहिए।
  4. इससे मुसलमान को यह पता चलता है कि दुनिया की ज़िंदगी अस्थायी है और असली जीवन आख़िरत का है। इसलिए हमें दुनिया के मोह में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि उस दिन की तैयारी में लगे रहना चाहिए जब हर व्यक्ति को उसके कर्मों का बदला मिलेगा।


📜 आयत 102-106 — सूरा हूद

102وَكَذَٰلِكَ أَخْذُ رَبِّكَ إِذَا أَخَذَ الْقُرَىٰ وَهِيَ ظَالِمَةٌ ۚ إِنَّ أَخْذَهُ أَلِيمٌ شَدِيدٌ
और (ऐ रसूल) बस्तियों के लोगों की सरकशी से जब तुम्हारा परवरदिगार अज़ाब में पकड़ता है तो उसकी पकड़ ऐसी ही होती है बेशक पकड़ तो दर्दनाक (और सख्त) होती है
103إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّمَنْ خَافَ عَذَابَ الْآخِرَةِ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّجْمُوعٌ لَّهُ النَّاسُ وَذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّشْهُودٌ
इसमें तो शक़ नहीं कि उस शख़्श के वास्ते जो अज़ाब आख़िरत से डरता है (हमारी कुदरत की) एक निशानी है ये वह रोज़ होगा कि सारे (जहाँन) के लोग जमा किए जाएंगें और यही वह दिन होगा कि (हमारी बारगाह में) सब हाज़िर किए जाएंगें
104وَمَا نُؤَخِّرُهُ إِلَّا لِأَجَلٍ مَّعْدُودٍ
और हम बस एक मुअय्युन मुद्दत तक इसमें देर कर रहे है
105يَوْمَ يَأْتِ لَا تَكَلَّمُ نَفْسٌ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ فَمِنْهُمْ شَقِيٌّ وَسَعِيدٌ
जिस दिन वह आ पहुँचेगा तो बग़ैर हुक्मे ख़ुदा कोई शख़्श बात भी तो नहीं कर सकेगा फिर कुछ लोग उनमे से बदबख्त होगें और कुछ लोग नेक बख्त
106فَأَمَّا الَّذِينَ شَقُوا فَفِي النَّارِ لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌ وَشَهِيقٌ
तो जो लोग बदबख्त है वह दोज़ख़ में होगें और उसी में उनकी हाए वाए और चीख़ पुकार होगी
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
104आयत

अनुवाद — हूद 104

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Saturday, October 3, 2026

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