हूद · 20/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
أُولَٰئِكَ لَمْ يَكُونُوا مُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَمَا كَانَ لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِنْ أَوْلِيَاءَ ۘ يُضَاعَفُ لَهُمُ الْعَذَابُ ۚ مَا كَانُوا يَسْتَطِيعُونَ السَّمْعَ وَمَا كَانُوا يُبْصِرُونَ ۝٢٠
Ulaaa`ika lam yakoonoo mu`jizeena fil ardi wa maa kaana lahum min doonil laahi min awliyaaa`; yudaa`afu lahumul `azaab; maa kaanoo yastatee`oonas sam`a wa maa kaanoo yubsiroon
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग रुए ज़मीन में न ख़ुदा को हरा सकते है और न ख़ुदा के सिवा उनका कोई सरपरस्त होगा उनका अज़ाब दूना कर दिया जाएगा ये लोग (हसद के मारे) न तो (हक़ बात) सुन सकते थे न देख सकते थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُعْجِزِينَ: अल्लाह को विवश करने वाले, अर्थात उसकी पकड़ से बच निकलने वाले।
  • أَوْلِيَاء: सहायक, मददगार, संरक्षक।
  • يُضَاعَفُ: दोगुना किया जाएगा, बढ़ा-चढ़ाकर दिया जाएगा।
  • يَسْتَطِيعُونَ السَّمْعَ: सुनने की शक्ति रखते थे (सत्य को स्वीकार करने के लिए)।
  • يُبْصِرُونَ: देखते थे (अल्लाह की निशानियों को समझने के लिए)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये वे काफ़िर और झूठे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह पर झूठ बाँधा और उसके रास्ते से रोका। ये लोग धरती में अल्लाह को विवश करने वाले नहीं थे, अर्थात वे उसकी पकड़ से भागकर कहीं नहीं जा सकते। यदि अल्लाह उन्हें पकड़ना चाहे तो कोई उन्हें बचा नहीं सकता। उनके लिए अल्लाह के सिवा कोई सहायक, मददगार या संरक्षक नहीं है जो उन्हें अल्लाह की यातना से बचा सके। अल्लाह ने उन्हें क़यामत के दिन तक मोहलत दी है, और उस दिन उनका अज़ाब दोगुना किया जाएगा, क्योंकि उन्होंने स्वयं गुमराही अपनाई और दूसरों को भी गुमराह किया। उनका अज़ाब इसलिए भी बढ़ाया जाएगा क्योंकि वे दुनिया में सत्य की आवाज़ सुनने की क्षमता नहीं रखते थे — वे क़ुरआन और हिदायत को स्वीकार करने के लिए सुनते ही नहीं थे, और न ही वे अल्लाह की निशानियों को देखकर उनसे सीखते थे। उनका कान और आँखें सत्य के प्रति बंद थीं, क्योंकि उन्होंने अपने कुफ्र और अहंकार में अंधाधुंध व्यवहार किया। वे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखते थे, लेकिन उन्हें पहचानते नहीं थे; वे आयतें सुनते थे, लेकिन उनसे लाभ नहीं उठाते थे। यह उनकी अपनी हठधर्मिता और सत्य से विमुखता का परिणाम था।


फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ से बचना असंभव है। इंसान चाहे कितनी भी ताकतवर या चालाक क्यों न हो, वह अल्लाह की यातना से भाग नहीं सकता। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह के आगे विनम्र और आज्ञाकारी रहना चाहिए।
  2. अल्लाह के सिवा किसी और से मदद माँगना और उस पर भरोसा करना बेकार है। सच्चा सहारा और संरक्षण केवल अल्लाह ही दे सकता है। इसलिए हमें अपने सभी मामलों में अल्लाह पर ही भरोसा करना चाहिए।
  3. जो लोग दूसरों को सत्य के रास्ते से रोकते हैं और गुमराही फैलाते हैं, उनका अज़ाब दोगुना होगा। यह हमें सिखाता है कि हमें न केवल स्वयं सत्य पर चलना चाहिए, बल्कि दूसरों को भी सत्य की ओर बुलाना चाहिए, और किसी को भी गुमराह करने से बचना चाहिए।
  4. सत्य को सुनने और देखने का सही अर्थ यह है कि हम उससे लाभ उठाएँ और उस पर अमल करें। केवल कानों से सुनना या आँखों से देखना काफी नहीं है, बल्कि दिल से स्वीकार करना और उस पर चलना आवश्यक है। यह आयत हमें सच्चे दिल से क़ुरआन और अल्लाह की निशानियों पर विचार करने की प्रेरणा देती है।
  5. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की यातना में देरी उसकी मोहलत है, न कि उसकी उपेक्षा। इसलिए हमें अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों से सावधान रहना चाहिए और उसकी ओर जल्दी लौटना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 18-22 — हूद

18وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۚ أُولَٰئِكَ يُعْرَضُونَ عَلَىٰ رَبِّهِمْ وَيَقُولُ الْأَشْهَادُ هَٰؤُلَاءِ الَّذِينَ كَذَبُوا عَلَىٰ رَبِّهِمْ ۚ أَلَا لَعْنَةُ اللَّهِ عَلَى الظَّالِمِينَ
और ये जो शख़्श ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बॉधे उससे ज्यादा ज़ालिम कौन होगा ऐसे लोग अपने परवरदिगार के हुज़ूर में पेश किए जाएंगें और गवाह इज़हार करेगें कि यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार पर झूट (बोहतान) बाँधा था सुन रखो कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की फिटकार है
19الَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ
जो ख़ुदा के रास्ते से लोगों को रोकते हैं और उसमें कज़ी (टेढ़ा पन) निकालना चाहते हैं और यही लोग आख़िरत के भी मुन्किर है
20أُولَٰئِكَ لَمْ يَكُونُوا مُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَمَا كَانَ لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِنْ أَوْلِيَاءَ ۘ يُضَاعَفُ لَهُمُ الْعَذَابُ ۚ مَا كَانُوا يَسْتَطِيعُونَ السَّمْعَ وَمَا كَانُوا يُبْصِرُونَ
ये लोग रुए ज़मीन में न ख़ुदा को हरा सकते है और न ख़ुदा के सिवा उनका कोई सरपरस्त होगा उनका अज़ाब दूना कर दिया जाएगा ये लोग (हसद के मारे) न तो (हक़ बात) सुन सकते थे न देख सकते थे
21أُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
ये वह लोग हैं जिन्होंने कुछ अपना ही घाटा किया और जो इफ्तेरा परदाज़ियाँ (झूठी बातें) ये लोग करते थे (क़यामत में सब) उन्हें छोड़ के चल होगी
22لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْأَخْسَرُونَ
इसमें शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में बड़े घाटा उठाने वाले होगें
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Tuesday, August 18, 2026

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