Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الأَعْمَى: अंधा, जो देख न सके।
- الأَصَم: बहरा, जो सुन न सके।
- البَصِير: देखने वाला, आँखों वाला।
- السَّمِيع: सुनने वाला, कानों वाला।
- يَسْتَوِيَان: दोनों बराबर हों।
- تَذَكَّرُونَ: तुम सीख लो, शिक्षा ग्रहण करो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में काफ़िरों और मोमिनों के दो गिरोहों की मिसाल बयान की है, ताकि इंसान आसानी से समझ सके कि हक़ और बातिल के दरमियान कितना बड़ा फ़र्क़ है।
काफ़िरों की हालत अंधे और बहरे इंसान जैसी है। जिस तरह अंधा इंसान अपनी आँखों से कुछ नहीं देख पाता, ठीक उसी तरह काफ़िर दिल की आँखों से हक़ को नहीं देख पाता। वह अल्लाह की निशानियों, उसकी क़ुदरत और उसके दीन की रौशनी से महरूम है। और जिस तरह बहरा इंसान किसी की आवाज़ नहीं सुन सकता, उसी तरह काफ़िर हक़ की आवाज़, नबियों की दावत और क़ुरआन की तालीमात को कान लगाकर नहीं सुनता, या सुनता भी है तो उस पर अमल नहीं करता। उसके कान हक़ सुनने के लिए बहरे हैं, और उसकी आँखें हक़ देखने के लिए अंधी हैं।
इसके मुक़ाबले में मोमिनों की हालत देखने वाले और सुनने वाले इंसान जैसी है। मोमिन की आँखें खुली होती हैं, वह अल्लाह की निशानियों में ग़ौर करता है, हक़ को पहचानता है और उस पर चलता है। उसके कान भी खुले होते हैं, वह अल्लाह का कलाम, नबी की सुन्नत और नेक नसीहतों को ग़ौर से सुनता है और उस पर अमल करता है। वह दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई हासिल करता है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या ये दोनों गिरोह कभी बराबर हो सकते हैं? अंधा और बहरा, देखने और सुनने वाले के बराबर कैसे हो सकता है? हरगिज़ नहीं! इन दोनों में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है। एक रौशनी में चलता है, दूसरा अंधेरे में भटकता है। एक को सीधा रास्ता मिला, दूसरा गुमराही में पड़ा है।
अल्लाह तआला इसी बात पर ग़ौर करने के लिए कहता है: "क्या तुम सीख नहीं लेते?" यानी ऐ इंसानो! ज़रा अपनी अक़्ल से काम लो, इन दोनों गिरोहों की मिसाल पर ग़ौर करो। अगर तुम समझदार हो तो देख लो कि अंधे और बहरे की राह कहाँ और देखने-सुनने वाले की राह कहाँ? तुम ख़ुद अपनी भलाई के लिए वह रास्ता चुनो जो रौशनी और हिदायत वाला हो, ताकि दुनिया में इत्मिनान और आख़िरत में कामयाबी हासिल कर सको।
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की नेअमत कितनी बड़ी है। ईमान वाला इंसान दुनिया में सबसे ज़्यादा खुशहाल और आख़िरत में सबसे ज़्यादा कामयाब है। अल्लाह तआला हम सबको हक़ देखने और सुनने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 22-26 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 24
सूरा हूद आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (काफिर, मुसलमान) दोनों फरीक़ की मसल अन्धे और बहरे और…सूरा आयत 24/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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