अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَمْ يَقُولُونَ: क्या ये लोग कहते हैं
- افْتَرَاهُ: उसने (नूह ने) इसे गढ़ लिया / झूठ रच लिया
- إِجْرَامِي: मेरा गुनाह / मेरा अपराध
- بَرِيءٌ: मुक्त / बेज़ार
- تُجْرِمُونَ: तुम अपराध करते हो (कुफ्र और झुठलाने का)
तफसीर (व्याख्या):
इन मुशरिकों का हाल यह है कि जब हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया और सच्चे दीन की दावत दी, तो वे उन पर इल्ज़ाम लगाने लगे कि ये शख्स अपनी तरफ से यह बातें गढ़ रहा है। अल्लाह तआला ने अपने नबी को हिदायत दी कि इनसे कहो: "अगर मैंने सचमुच यह बात अल्लाह पर गढ़ी होती, तो इसका गुनाह सिर्फ मुझ पर होता और मैं ही इसकी सज़ा पाता। लेकिन अगर मैं सच्चा हूँ और यह पैग़ाम अल्लाह की तरफ से है, तो फिर तुम्हारा कुफ्र, तुम्हारा झुठलाना और तुम्हारे अपराध तुम्हारे ही ज़िम्मे हैं। मेरा इनसे कोई ताल्लुक़ नहीं, मैं तुम्हारे इन अपराधों से बिल्कुल बरी हूँ।"
यानी नबी की ज़िम्मेदारी सिर्फ पैग़ाम पहुँचाना है। अगर लोग उसे न मानें, तो उसका वबाल उन्हीं पर है। नबी पर इल्ज़ाम लगाना और उसकी दावत को झूठ कहना, यह खुद उन लोगों का जुर्म है, जिसकी सज़ा वे अल्लाह के सामने पाएँगे।
फ़ायदे (सबक):
- सच्चाई का साहस: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, चाहे लोग कितने ही इल्ज़ाम लगाएँ। नबी ने बिना किसी डर के साफ जवाब दिया कि अगर मैं झूठा हूँ तो मेरा गुनाह मुझ पर, और अगर सच्चा हूँ तो तुम्हारा जुर्म तुम पर।
- ज़िम्मेदारी का बंटवारा: हर इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार है। नबी या दाई (दीन की तरफ बुलाने वाला) सिर्फ पैग़ाम पहुँचाता है; हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। इसलिए किसी को दूसरे के गुनाह का बोझ नहीं उठाना पड़ता।
- बरी होने का एलान: जो इंसान सच्चाई पर हो, उसे चाहिए कि वह बातिल (झूठ) से अपनी बराअत (मुक्ति) का एलान करे। यह उसकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत और स्पष्टता है।
- इल्ज़ाम का सामना: जब सच्चे लोगों पर झूठे इल्ज़ाम लगाए जाते हैं, तो उन्हें घबराना नहीं चाहिए। अल्लाह अपने नबियों और सच्चे बंदों की हिफाज़त करता है और उनकी सच्चाई को ज़ाहिर करता है।
- अल्लाह पर भरोसा: नबी ने अपना पूरा भरोसा अल्लाह पर रखा और जवाब अल्लाह की तरफ से दिया। यह हमारे लिए सबक है कि मुश्किल वक्त में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसी से मदद माँगें।
📜 आयत 33-37 — हूद
अनुवाद — हूद 35
सूरा हूद आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या (कुफ्फ़ारे मक्का भी) कहते हैं कि क़ुरान…सूरा आयत 35/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








