हूद · 34/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَلَا يَنفَعُكُمْ نُصْحِي إِنْ أَرَدتُّ أَنْ أَنصَحَ لَكُمْ إِن كَانَ اللَّهُ يُرِيدُ أَن يُغْوِيَكُمْ ۚ هُوَ رَبُّكُمْ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ ۝٣٤
Wa laa yanfa`ukum nusheee in arattu an ansaha lakum in kaanal laahu yureedu ai yughwi yakum; Huwa Rabbukum wa ilaihi turja`oon
📖 हिंदी अर्थ
अगर ख़ुदा को तुम्हारा बहकाना मंज़ूर है तो मेरी ख़ैर ख्वाही कुछ भी तुम्हारे काम नहीं आ सकती वही तुम्हारा परवरदिगार है और उसी की तरफ तुम को लौट जाना है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُصْحِي (मेरी नसीहत): मेरी सलाह, मेरा ख़ैरख़्वाहाना परामर्श और भलाई की तरफ़ बुलाना।
  • يُغْوِيَكُمْ (तुम्हें गुमराह करे): तुम्हें पथभ्रष्ट करे, हिदायत से महरूम कर दे, या तुम्हें सज़ा देकर हलाक कर दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: मेरी नसीहत और मेरा यह प्रयास कि मैं तुम्हें ईमान की राह दिखाऊँ, तुम्हें कोई लाभ नहीं पहुँचा सकता, अगर अल्लाह तआला ने तुम्हारे हठ और अवज्ञा के कारण तुम्हें गुमराही में छोड़ने और तुम्हें हिदायत से महरूम करने का फ़ैसला कर लिया है। यानी जब अल्लाह की मर्ज़ी किसी क़ौम की गुमराही पर टिक जाती है, तो कोई नसीहत करने वाला उन्हें फ़ायदा नहीं पहुँचा सकता। अल्लाह ही तुम्हारा रब और मालिक है, उसी के हाथ में तुम्हारा भला और बुरा है, वही हिदायत देता है और वही गुमराह करता है। और अंत में तुम सबको उसी की तरफ़ लौटना है — क़यामत के दिन तुम सब उसके सामने हाज़िर होंगे और वह तुम्हारे आमाल का हिसाब लेगा। यह बात दरअसल एक तरफ़ नूह (अलैहिस्सलाम) की ओर से अपनी क़ौम के प्रति बेबसी का इज़हार है, तो दूसरी तरफ़ उनके लिए एक सख़्त चेतावनी और धमकी भी है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. नसीहत और दावत का असर अल्लाह की मर्ज़ी पर मुनहसिर है — इंसान सिर्फ़ ज़रिया है, हिदायत देने वाला अकेला अल्लाह है। इसलिए दावत देने वाले को मायूस नहीं होना चाहिए और न ही नतीजे पर नाज़ करना चाहिए।
  2. अल्लाह का रब होना यानी उसका पूरा अख़्तियार होना — वही हिदायत देता है, वही गुमराह करता है, और उसी की तरफ़ सबकी वापसी है। यह ईमान की बुनियाद है कि इंसान अपने रब के सामने झुके और उसी की रज़ा का तालिब रहे।
  3. आख़िरत का यक़ीन इंसान को अमल की तरफ़ राग़िब करता है — जब हमें मालूम है कि हमें अल्लाह की तरफ़ लौटना है और हर अमल का हिसाब होना है, तो हमें अपनी ज़िंदगी को उसी के हुक्म के मुताबिक़ ढालना चाहिए।
  4. नूह (अलैहिस्सलाम) की यह बात हमें सिखाती है कि हक़ बोलने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए, चाहे सुनने वाले कितने ही ज़िद्दी क्यों न हों — दावत का काम अल्लाह के हुक्म की तामील है, और उसका अज्र अल्लाह के पास महफ़ूज़ है।
🎧 सुनें

📜 आयत 32-36 — हूद

32قَالُوا يَا نُوحُ قَدْ جَادَلْتَنَا فَأَكْثَرْتَ جِدَالَنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
वह लोग कहने लगे ऐ नूह तुम हम से यक़ीनन झगड़े और बहुत झगड़े फिर तुम सच्चे हो तो जिस (अज़ाब) की तुम हमें धमकी देते थे हम पर ला चुको
33قَالَ إِنَّمَا يَأْتِيكُم بِهِ اللَّهُ إِن شَاءَ وَمَا أَنتُم بِمُعْجِزِينَ
नूह ने कहा अगर चाहेगा तो बस ख़ुदा ही तुम पर अज़ाब लाएगा और तुम लोग किसी तरह उसे हरा नहीं सकते और अगर मै चाहूँ तो तुम्हारी (कितनी ही) ख़ैर ख्वाही (भलाई) करुँ
34وَلَا يَنفَعُكُمْ نُصْحِي إِنْ أَرَدتُّ أَنْ أَنصَحَ لَكُمْ إِن كَانَ اللَّهُ يُرِيدُ أَن يُغْوِيَكُمْ ۚ هُوَ رَبُّكُمْ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
अगर ख़ुदा को तुम्हारा बहकाना मंज़ूर है तो मेरी ख़ैर ख्वाही कुछ भी तुम्हारे काम नहीं आ सकती वही तुम्हारा परवरदिगार है और उसी की तरफ तुम को लौट जाना है
35أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ إِنِ افْتَرَيْتُهُ فَعَلَيَّ إِجْرَامِي وَأَنَا بَرِيءٌ مِّمَّا تُجْرِمُونَ
(ऐ रसूल) क्या (कुफ्फ़ारे मक्का भी) कहते हैं कि क़ुरान को उस (तुम) ने गढ़ लिया है तुम कह दो कि अगर मैने उसको गढ़ा है तो मेरे गुनाह का वबाल मुझ पर होगा और तुम लोग जो (गुनाह करके) मुजरिम होते हो उससे मै बरीउल ज़िम्मा (अलग) हूँ
36وَأُوحِيَ إِلَىٰ نُوحٍ أَنَّهُ لَن يُؤْمِنَ مِن قَوْمِكَ إِلَّا مَن قَدْ آمَنَ فَلَا تَبْتَئِسْ بِمَا كَانُوا يَفْعَلُونَ
और नूह के पास ये 'वही' भेज दी गई कि जो ईमान ला चुका उनके सिवा अब कोई शख़्श तुम्हारी क़ौम से हरगिज़ ईमान न लाएगा तो तुम ख्वाहमा ख्वाह उनकी कारस्तानियों का (कुछ) ग़म न खाओ
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अनुवाद — हूद 34

सूरा हूद आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर ख़ुदा को तुम्हारा बहकाना मंज़ूर है तो मेरी ख़ैर…

सूरा आयत 34/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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