हूद · 74/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
فَلَمَّا ذَهَبَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ الرَّوْعُ وَجَاءَتْهُ الْبُشْرَىٰ يُجَادِلُنَا فِي قَوْمِ لُوطٍ ۝٧٤
Falammaa zahaba an Ibraaheemar raw`u wa jaaa`at hul bushraaa yujaadilunaa fee qawmi Loot
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब इबराहीम (के दिल) से ख़ौफ जाता रहा और उनके पास (औलाद की) खुशख़बरी भी आ चुकी तो हम से क़ौमे लूत के बारे में झगड़ने लगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الرَّوْعُ: भय, डर।
  • الْبُشْرَى: शुभ सूचना, खुशखबरी।
  • يُجَادِلُنَا: हमसे वाद-विवाद करना, हमारे फैसले पर चर्चा करना (यहाँ अर्थ है: हमारे दूतों से बहस करना)।

तफसीर:

जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का वह भय दूर हो गया जो उन्हें अपने मेहमानों के भोजन न करने के कारण हुआ था, और उन्हें यह पता चल गया कि ये मेहमान अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते हैं, और उन्हें यह शुभ सूचना दी गई कि उनके यहाँ इसहाक (अलैहिस्सलाम) पैदा होंगे और उनके बाद याक़ूब (अलैहिस्सलाम) होंगे, तो उन्होंने अपनी इस खुशी के बावजूद अल्लाह के फ़रिश्तों से हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के बारे में बहस करना शुरू कर दिया। उनका यह ज़िद्दो-जहद इसलिए था कि शायद अल्लाह उस क़ौम पर आने वाली यातना को टाल दे, या कम से कम हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके परिवार को उस यातना से बचा लिया जाए। यह बहस उन्होंने अल्लाह के फ़ैसले पर आपत्ति के तौर पर नहीं की, बल्कि यह उनकी दयालुता, रहमदिली और अपने भतीजे हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) के प्रति प्रेम के कारण थी। फ़रिश्तों ने उन्हें आश्वस्त किया कि अल्लाह का फ़ैसला पहले ही तय हो चुका है, और हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके परिवार को बचा लिया जाएगा, सिवाय उनकी पत्नी के जो यातना में रह जाएगी।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह के नबी भी अपनी रहमत और दयालुता के कारण गुनाहगारों के लिए शफ़ाअत और दुआ करते हैं, यह हमारे लिए सीख है कि हमें भी दूसरों के लिए रहम और भलाई की दुआ करनी चाहिए।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह का फ़ैसला आ जाए, तो उस पर राज़ी रहना चाहिए, क्योंकि अल्लाह का फ़ैसला हमेशा हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित होता है।
  3. नबियों की शान यह है कि वे अल्लाह की इबादत के साथ-साथ अपनी उम्मत के लिए नर्मी और शफ़क़त रखते हैं, और हमें भी अपने समाज के लिए इसी तरह की भलाई की भावना रखनी चाहिए।
  4. यह आयत हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के मर्तबे को दर्शाती है कि वे अल्लाह के ख़लील (दोस्त) हैं, और उनकी बहस भी अल्लाह की रज़ा के अनुसार ही थी।


📜 आयत 72-76 — सूरा हूद

72قَالَتْ يَا وَيْلَتَىٰ أَأَلِدُ وَأَنَا عَجُوزٌ وَهَٰذَا بَعْلِي شَيْخًا ۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيْءٌ عَجِيبٌ
वह कहने लगी ऐ है क्या अब मै बच्चा जनने बैठॅूगी मैं तो बुढ़िया हूँ और ये मेरे मियॉ भी बूढे है ये तो एक बड़ी ताज्जुब खेज़ बात है
73قَالُوا أَتَعْجَبِينَ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ ۖ رَحْمَتُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الْبَيْتِ ۚ إِنَّهُ حَمِيدٌ مَّجِيدٌ
वह फरिश्ते बोले (हाए) तुम ख़ुदा की कुदरत से ताज्जुब करती हो ऐ अहले बैत (नबूवत) तुम पर ख़ुदा की रहमत और उसकी बरकते (नाज़िल हो) इसमें शक़ नहीं कि वह क़ाबिल हम्द (वासना) बुज़ुर्ग हैं
74فَلَمَّا ذَهَبَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ الرَّوْعُ وَجَاءَتْهُ الْبُشْرَىٰ يُجَادِلُنَا فِي قَوْمِ لُوطٍ
फिर जब इबराहीम (के दिल) से ख़ौफ जाता रहा और उनके पास (औलाद की) खुशख़बरी भी आ चुकी तो हम से क़ौमे लूत के बारे में झगड़ने लगे
75إِنَّ إِبْرَاهِيمَ لَحَلِيمٌ أَوَّاهٌ مُّنِيبٌ
बेशक इबराहीम बुर्दबार नरम दिल (हर बात में ख़ुदा की तरफ) रुजू (ध्यान) करने वाले थे
76يَا إِبْرَاهِيمُ أَعْرِضْ عَنْ هَٰذَا ۖ إِنَّهُ قَدْ جَاءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَإِنَّهُمْ آتِيهِمْ عَذَابٌ غَيْرُ مَرْدُودٍ
(हमने कहा) ऐ इबराहीम इस बात में हट मत करो (इस बार में) जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार का था वह क़तअन आ चुका और इसमें शक़ नहीं कि उन पर ऐसा अज़ाब आने वाले वाला है
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
74आयत

अनुवाद — हूद 74

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Friday, October 2, 2026

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