अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَحَلِيمٌ (ला-हलीमुन): अत्यंत सहनशील, धैर्यवान, जल्दबाज़ी न करने वाला।
- أَوَّاهٌ (अव्वाहुन): बहुत अधिक आहें भरने वाला, अत्यधिक गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करने वाला, अपने पापों पर पछतावा करने वाला।
- مُنِيبٌ (मुनीबुन): अल्लाह की ओर रुजू करने वाला, उसकी ओर लौटने वाला, तौबा करने वाला।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के तीन खूबसूरत गुणों का वर्णन करती है, जो उन्हें दूसरों से अलग करते हैं और उन्हें अल्लाह के बेहद करीबी बंदों में शुमार करते हैं।
पहला गुण है "हलीम" यानी अत्यंत सहनशील और धैर्यवान होना। वे कभी जल्दबाज़ी नहीं करते थे, न ही किसी पर तुरंत सज़ा या बुराई का बदला चाहते थे। उनका स्वभाव नरम और क्षमाशील था, यहाँ तक कि जब उनकी क़ौम ने उन्हें आग में डाला, तब भी उन्होंने उनके लिए बुरी दुआ नहीं माँगी, बल्कि उनकी हिदायत की दुआ की।
दूसरा गुण है "अव्वाह" यानी बहुत अधिक आहें भरने वाला और गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करने वाला। वे अपने रब के सामने इस कदर झुकते और रोते थे कि उनकी आहें और दुआएँ लगातार जारी रहती थीं। वे अपनी कमज़ोरी और अल्लाह की ज़रूरत को महसूस करते हुए हर हाल में उसी से माँगते थे। यह गुण उनके दिल की नरमी और अल्लाह के प्रति गहरे प्रेम को दर्शाता है।
तीसरा गुण है "मुनीब" यानी हर मामले में अल्लाह की ओर लौटने वाला। वे कभी अपनी तरफ़ से कोई फ़ैसला नहीं करते थे, बल्कि हर छोटे-बड़े काम में अल्लाह की मर्ज़ी को सामने रखते थे। अगर कोई कमी या ग़लती हो जाती, तो तुरंत तौबा करके अल्लाह की ओर पलट जाते थे। यही वजह है कि अल्लाह ने उन्हें "ख़लीलुल्लाह" (अल्लाह का दोस्त) का दर्जा दिया।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- सहनशीलता और धैर्य इंसान को बड़ा बनाता है। जो लोग जल्दबाज़ी और ग़ुस्से से बचते हैं, अल्लाह उन्हें इज़्ज़त देता है और उनके दिलों में दूसरों के लिए मुहब्बत पैदा करता है।
- दुआ और गिड़गिड़ाकर माँगना अल्लाह के करीब होने का सबसे बड़ा ज़रिया है। जब इंसान अपनी बेबसी का एहसास करके अल्लाह के सामने रोता है, तो अल्लाह उसकी दुआ को बहुत पसंद करता है और उसे कभी निराश नहीं करता।
- हर मामले में अल्लाह की ओर लौटना और उसी पर भरोसा करना ही सच्ची ईमान की निशानी है। जो इंसान अपनी ग़लतियों पर तौबा करता है और अल्लाह से जुड़ा रहता है, उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है और उसे सुकून मिलता है।
- ये तीनों गुण — सहनशीलता, प्रार्थना और अल्लाह की ओर पलटना — हर मुसलमान के लिए आदर्श हैं। इन्हें अपनाकर हम अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकते हैं और अल्लाह की मुहब्बत और रहमत के हक़दार बन सकते हैं।
📜 आयत 73-77 — हूद
अनुवाद — हूद 75
सूरा हूद आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक इबराहीम बुर्दबार नरम दिल (हर बात में ख़ुदा की…सूरा आयत 75/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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