हूद · 78/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَجَاءَهُ قَوْمُهُ يُهْرَعُونَ إِلَيْهِ وَمِن قَبْلُ كَانُوا يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ ۚ قَالَ يَا قَوْمِ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي هُنَّ أَطْهَرُ لَكُمْ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ فِي ضَيْفِي ۖ أَلَيْسَ مِنكُمْ رَجُلٌ رَّشِيدٌ ۝٧٨
Wa jaaa`ahoo qawmuhoo yuhra`oona ilaihi wa min qablu kaanoo ya`maloonas saiyiaat; qaala yaa qawmi haaa`ulaaa`i banaatee hunna atharu lakum fattaqul laaha wa laa tukhzooni fee daifee alaisa minkum rajulur rasheed
📖 हिंदी अर्थ
और उनकी क़ौम (लड़को की आवाज़ सुनकर बुरे इरादे से) उनके पास दौड़ती हुई आई और ये लोग उसके क़ब्ल भी बुरे काम किया करते थे लूत ने (जब उनको) आते देखा तो कहा ऐ मेरी क़ौम ये मारी क़ौम की बेटियाँ (मौजूद हैं) उनसे निकाह कर लो ये तुम्हारीे वास्ते जायज़ और ज्यादा साफ सुथरी हैं तो खुदा से डरो और मुझे मेरे मेहमान के बारे में रुसवा न करो क्या तुम में से कोई भी समझदार आदमी नहीं है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُهْرَعُونَ: दौड़ते हुए, जल्दी-जल्दी आना।
  • السَّيِّئَاتِ: बुरे कर्म, यहाँ अर्थ है समलैंगिक कर्म (पुरुषों का पुरुषों से संबंध)।
  • أَطْهَرُ: अधिक पवित्र, अधिक शुद्ध।
  • لَا تُخْزُونِ: मुझे अपमानित न करो, मुझे लज्जित न करो।
  • ضَيْفِي: मेरे अतिथि (मेहमान)।
  • رَشِيدٌ: समझदार, बुद्धिमान, सही मार्ग पर चलने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब लूत (अलैहिस्सलाम) के पास फ़रिश्ते मेहमान बनकर आए, तो उनकी क़ौम के लोग यह जानकर कि उनके पास सुंदर युवक हैं, दौड़ते-दौड़ते उनके घर की ओर आए। उनका उद्देश्य उन मेहमानों के साथ बुरा कर्म करना था। यह उनकी पुरानी आदत थी, वे पहले से ही यह घिनौना काम करते आ रहे थे—वे औरतों को छोड़कर मर्दों से अपनी इच्छा पूरी करते थे।

जब लूत (अलैहिस्सलाम) ने उनकी बुरी नीयत देखी, तो उन्होंने अपनी क़ौम को समझाते हुए कहा: "मेरी क़ौम के लोगो! ये मेरी बेटियाँ हैं (यानी मेरी क़ौम की औरतें), इनसे निकाह कर लो, यह तुम्हारे लिए उस घिनौने काम से कहीं अधिक पवित्र और उचित है।" उन्होंने अपने मेहमानों की हिफ़ाज़त के लिए यह बात कही, क्योंकि नबी अपनी उम्मत के लिए पिता की मानिंद होता है, इसलिए उन्होंने अपनी क़ौम की औरतों को अपनी बेटियाँ कहा।

फिर उन्होंने उन्हें डराया: "अल्लाह से डरो, उसकी नाफ़रमानी से बचो, और मुझे मेरे मेहमानों के मामले में अपमानित मत करो। क्या तुममें कोई एक भी समझदार आदमी नहीं है जो इस बुरे काम से रोके और तुम्हें सही रास्ता दिखाए?"


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. मेहमान की इज़्ज़त करना इस्लाम की महान शिक्षा है। लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपने मेहमानों की हिफ़ाज़त के लिए अपनी पूरी क़ौम का सामना किया, यहाँ तक कि अपनी बेटियों की पेशकश कर दी। यह हमें सिखाता है कि मेहमान की इज़्ज़त और हिफ़ाज़त हर मुसलमान का फ़र्ज़ है।
  2. बुराई का विरोध करना हर नेक इंसान का फ़र्ज़ है कि वह समाज में फैलती बुराइयों के खिलाफ आवाज़ उठाए, चाहे उसे अकेले ही क्यों न हो। लूत (अलैहिस्सलाम) ने अकेले ही पूरी क़ौम के सामने सच बोला।
  3. अल्लाह का डर इंसान को हमेशा अल्लाह से डरना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए। अल्लाह का डर ही इंसान को गुनाहों से रोकता है।
  4. समझदारी की तलाश लूत (अलैहिस्सलाम) ने क़ौम से कहा कि क्या तुममें कोई समझदार नहीं है? यह बताता है कि समाज में अक्लमंद और नेक लोगों की मौजूदगी बुराई को रोकने में बहुत अहम भूमिका निभाती है।
  5. इस्लाम पाकीज़गी और पवित्रता का धर्म है—यह हर उस काम से रोकता है जो फ़ितरत (प्राकृतिक स्वभाव) के खिलाफ हो। अल्लाह ने इंसान की पैदाइश में नर और मादा का रिश्ता रखा है, और इसी में इंसान की भलाई है।
🎧 सुनें

📜 आयत 76-80 — हूद

76يَا إِبْرَاهِيمُ أَعْرِضْ عَنْ هَٰذَا ۖ إِنَّهُ قَدْ جَاءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَإِنَّهُمْ آتِيهِمْ عَذَابٌ غَيْرُ مَرْدُودٍ
(हमने कहा) ऐ इबराहीम इस बात में हट मत करो (इस बार में) जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार का था वह क़तअन आ चुका और इसमें शक़ नहीं कि उन पर ऐसा अज़ाब आने वाले वाला है
77وَلَمَّا جَاءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِيءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالَ هَٰذَا يَوْمٌ عَصِيبٌ
जो किसी तरह टल नहीं सकता और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते (लड़को की सूरत में) लूत के पास आए तो उनके ख्याल से रजीदा हुए और उनके आने से तंग दिल हो गए और कहने लगे कि ये (आज का दिन) सख्त मुसीबत का दिन है
78وَجَاءَهُ قَوْمُهُ يُهْرَعُونَ إِلَيْهِ وَمِن قَبْلُ كَانُوا يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ ۚ قَالَ يَا قَوْمِ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي هُنَّ أَطْهَرُ لَكُمْ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ فِي ضَيْفِي ۖ أَلَيْسَ مِنكُمْ رَجُلٌ رَّشِيدٌ
और उनकी क़ौम (लड़को की आवाज़ सुनकर बुरे इरादे से) उनके पास दौड़ती हुई आई और ये लोग उसके क़ब्ल भी बुरे काम किया करते थे लूत ने (जब उनको) आते देखा तो कहा ऐ मेरी क़ौम ये मारी क़ौम की बेटियाँ (मौजूद हैं) उनसे निकाह कर लो ये तुम्हारीे वास्ते जायज़ और ज्यादा साफ सुथरी हैं तो खुदा से डरो और मुझे मेरे मेहमान के बारे में रुसवा न करो क्या तुम में से कोई भी समझदार आदमी नहीं है
79قَالُوا لَقَدْ عَلِمْتَ مَا لَنَا فِي بَنَاتِكَ مِنْ حَقٍّ وَإِنَّكَ لَتَعْلَمُ مَا نُرِيدُ
उन (कम्बख्तो) न जवाब दिया तुम को खूब मालूम है कि तुम्हारी क़ौम की लड़कियों की हमें कुछ हाजत (जरूरत) नही है और जो बात हम चाहते है वह तो तुम ख़ूब जानते हो
80قَالَ لَوْ أَنَّ لِي بِكُمْ قُوَّةً أَوْ آوِي إِلَىٰ رُكْنٍ شَدِيدٍ
लूत ने कहा काश मुझमें तुम्हारे मुक़ाबले की कूवत होती या मै किसी मज़बूत क़िले मे पनाह ले सकता
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
78आयत

अनुवाद — हूद 78

सूरा हूद आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनकी क़ौम (लड़को की आवाज़ सुनकर बुरे इरादे से)…

सूरा आयत 78/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए