Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُهْرَعُونَ: दौड़ते हुए, जल्दी-जल्दी आना।
- السَّيِّئَاتِ: बुरे कर्म, यहाँ अर्थ है समलैंगिक कर्म (पुरुषों का पुरुषों से संबंध)।
- أَطْهَرُ: अधिक पवित्र, अधिक शुद्ध।
- لَا تُخْزُونِ: मुझे अपमानित न करो, मुझे लज्जित न करो।
- ضَيْفِي: मेरे अतिथि (मेहमान)।
- رَشِيدٌ: समझदार, बुद्धिमान, सही मार्ग पर चलने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब लूत (अलैहिस्सलाम) के पास फ़रिश्ते मेहमान बनकर आए, तो उनकी क़ौम के लोग यह जानकर कि उनके पास सुंदर युवक हैं, दौड़ते-दौड़ते उनके घर की ओर आए। उनका उद्देश्य उन मेहमानों के साथ बुरा कर्म करना था। यह उनकी पुरानी आदत थी, वे पहले से ही यह घिनौना काम करते आ रहे थे—वे औरतों को छोड़कर मर्दों से अपनी इच्छा पूरी करते थे।
जब लूत (अलैहिस्सलाम) ने उनकी बुरी नीयत देखी, तो उन्होंने अपनी क़ौम को समझाते हुए कहा: "मेरी क़ौम के लोगो! ये मेरी बेटियाँ हैं (यानी मेरी क़ौम की औरतें), इनसे निकाह कर लो, यह तुम्हारे लिए उस घिनौने काम से कहीं अधिक पवित्र और उचित है।" उन्होंने अपने मेहमानों की हिफ़ाज़त के लिए यह बात कही, क्योंकि नबी अपनी उम्मत के लिए पिता की मानिंद होता है, इसलिए उन्होंने अपनी क़ौम की औरतों को अपनी बेटियाँ कहा।
फिर उन्होंने उन्हें डराया: "अल्लाह से डरो, उसकी नाफ़रमानी से बचो, और मुझे मेरे मेहमानों के मामले में अपमानित मत करो। क्या तुममें कोई एक भी समझदार आदमी नहीं है जो इस बुरे काम से रोके और तुम्हें सही रास्ता दिखाए?"
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- मेहमान की इज़्ज़त करना इस्लाम की महान शिक्षा है। लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपने मेहमानों की हिफ़ाज़त के लिए अपनी पूरी क़ौम का सामना किया, यहाँ तक कि अपनी बेटियों की पेशकश कर दी। यह हमें सिखाता है कि मेहमान की इज़्ज़त और हिफ़ाज़त हर मुसलमान का फ़र्ज़ है।
- बुराई का विरोध करना हर नेक इंसान का फ़र्ज़ है कि वह समाज में फैलती बुराइयों के खिलाफ आवाज़ उठाए, चाहे उसे अकेले ही क्यों न हो। लूत (अलैहिस्सलाम) ने अकेले ही पूरी क़ौम के सामने सच बोला।
- अल्लाह का डर इंसान को हमेशा अल्लाह से डरना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए। अल्लाह का डर ही इंसान को गुनाहों से रोकता है।
- समझदारी की तलाश लूत (अलैहिस्सलाम) ने क़ौम से कहा कि क्या तुममें कोई समझदार नहीं है? यह बताता है कि समाज में अक्लमंद और नेक लोगों की मौजूदगी बुराई को रोकने में बहुत अहम भूमिका निभाती है।
- इस्लाम पाकीज़गी और पवित्रता का धर्म है—यह हर उस काम से रोकता है जो फ़ितरत (प्राकृतिक स्वभाव) के खिलाफ हो। अल्लाह ने इंसान की पैदाइश में नर और मादा का रिश्ता रखा है, और इसी में इंसान की भलाई है।
📜 आयत 76-80 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 78
सूरा हूद आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनकी क़ौम (लड़को की आवाज़ सुनकर बुरे इरादे से)…सूरा आयत 78/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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