हूद · 77/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَلَمَّا جَاءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِيءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالَ هَٰذَا يَوْمٌ عَصِيبٌ ۝٧٧
Wa lammaa jaaa`at Rusulunaa Lootan seee`a bihim wa daaqa bihim zar`anw wa qaala haazaa yawmun `aseeb
📖 हिंदी अर्थ
जो किसी तरह टल नहीं सकता और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते (लड़को की सूरत में) लूत के पास आए तो उनके ख्याल से रजीदा हुए और उनके आने से तंग दिल हो गए और कहने लगे कि ये (आज का दिन) सख्त मुसीबत का दिन है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سِيءَ بِهِمْ: उनके आने से वे दुखी हुए, उन्हें बुरा लगा।
  • وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا: उनके कारण उनका दिल तंग हो गया, वे बहुत चिंतित और परेशान हो गए।
  • يَوْمٌ عَصِيبٌ: बहुत कठिन और सख्त दिन।

तफसीर (व्याख्या):

जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते (जो सुंदर युवकों की शक्ल में थे) हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) के पास पहुँचे, तो उनका आना देखकर वे बहुत दुखी हुए और उनका दिल तंग हो गया। उन्हें यह नहीं मालूम था कि ये अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते हैं, बल्कि वे उन्हें साधारण मेहमान समझ रहे थे। उन्हें अपनी क़ौम का डर था, क्योंकि उनकी क़ौम बुराई में लिप्त थी और मेहमानों के साथ बुरा व्यवहार करती थी। उन्होंने सोचा कि अगर इन सुंदर युवकों को मेरी क़ौम ने देख लिया, तो वे इन्हें नुक़सान पहुँचाएँगे और मैं इनकी रक्षा नहीं कर पाऊँगा। इसी चिंता और भय के कारण उन्होंने कहा: "यह बड़ा कठिन दिन है।" उनका यह कहना इसलिए था कि उन्हें यक़ीन था कि उनकी क़ौम उन पर हावी हो जाएगी और वे अपने मेहमानों की रक्षा नहीं कर पाएँगे।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से हमें पता चलता है कि मेहमानों की इज़्ज़त और उनकी हिफ़ाज़त करना अल्लाह के नबियों की सुन्नत है। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपने मेहमानों की रक्षा के लिए इतनी चिंता की कि उनका दिल तंग हो गया।
  2. एक अच्छे इंसान को चाहिए कि वह बुराई और फ़ाहिशा (अश्लीलता) से नफ़रत करे और उसके फैलने से डरे। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) को अपनी क़ौम की बुराई से इतनी घृणा थी कि वे उसके बारे में सोचकर ही परेशान हो जाते थे।
  3. मुसीबत और कठिनाई के समय अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने जब यह कठिन दिन देखा, तो उन्होंने अल्लाह की मदद की उम्मीद नहीं छोड़ी, और अल्लाह ने उन्हें उस मुसीबत से निकाला।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि एक इंसान को अपने समाज में फैली बुराइयों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उन्हें रोकने की कोशिश करनी चाहिए, भले ही उसे कितनी ही परेशानी क्यों न उठानी पड़े।


📜 आयत 75-79 — हूद

75إِنَّ إِبْرَاهِيمَ لَحَلِيمٌ أَوَّاهٌ مُّنِيبٌ
बेशक इबराहीम बुर्दबार नरम दिल (हर बात में ख़ुदा की तरफ) रुजू (ध्यान) करने वाले थे
76يَا إِبْرَاهِيمُ أَعْرِضْ عَنْ هَٰذَا ۖ إِنَّهُ قَدْ جَاءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَإِنَّهُمْ آتِيهِمْ عَذَابٌ غَيْرُ مَرْدُودٍ
(हमने कहा) ऐ इबराहीम इस बात में हट मत करो (इस बार में) जो हुक्म तुम्हारे परवरदिगार का था वह क़तअन आ चुका और इसमें शक़ नहीं कि उन पर ऐसा अज़ाब आने वाले वाला है
77وَلَمَّا جَاءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِيءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالَ هَٰذَا يَوْمٌ عَصِيبٌ
जो किसी तरह टल नहीं सकता और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते (लड़को की सूरत में) लूत के पास आए तो उनके ख्याल से रजीदा हुए और उनके आने से तंग दिल हो गए और कहने लगे कि ये (आज का दिन) सख्त मुसीबत का दिन है
78وَجَاءَهُ قَوْمُهُ يُهْرَعُونَ إِلَيْهِ وَمِن قَبْلُ كَانُوا يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ ۚ قَالَ يَا قَوْمِ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي هُنَّ أَطْهَرُ لَكُمْ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ فِي ضَيْفِي ۖ أَلَيْسَ مِنكُمْ رَجُلٌ رَّشِيدٌ
और उनकी क़ौम (लड़को की आवाज़ सुनकर बुरे इरादे से) उनके पास दौड़ती हुई आई और ये लोग उसके क़ब्ल भी बुरे काम किया करते थे लूत ने (जब उनको) आते देखा तो कहा ऐ मेरी क़ौम ये मारी क़ौम की बेटियाँ (मौजूद हैं) उनसे निकाह कर लो ये तुम्हारीे वास्ते जायज़ और ज्यादा साफ सुथरी हैं तो खुदा से डरो और मुझे मेरे मेहमान के बारे में रुसवा न करो क्या तुम में से कोई भी समझदार आदमी नहीं है
79قَالُوا لَقَدْ عَلِمْتَ مَا لَنَا فِي بَنَاتِكَ مِنْ حَقٍّ وَإِنَّكَ لَتَعْلَمُ مَا نُرِيدُ
उन (कम्बख्तो) न जवाब दिया तुम को खूब मालूम है कि तुम्हारी क़ौम की लड़कियों की हमें कुछ हाजत (जरूरत) नही है और जो बात हम चाहते है वह तो तुम ख़ूब जानते हो
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सूरा आयत 77/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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