हूद · 80/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
قَالَ لَوْ أَنَّ لِي بِكُمْ قُوَّةً أَوْ آوِي إِلَىٰ رُكْنٍ شَدِيدٍ ۝٨٠
Qaala law anna lee bikum quwwatan aw aaweee ilaa ruknin shadeed
📖 हिंदी अर्थ
लूत ने कहा काश मुझमें तुम्हारे मुक़ाबले की कूवत होती या मै किसी मज़बूत क़िले मे पनाह ले सकता

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قُوَّةً (क़ुव्वतन): शक्ति, सामर्थ्य, सहायक और समर्थक।
  • آوِي (आवी): शरण लेना, पनाह लेना, किसी की ओर झुकना।
  • رُكْنٍ شَدِيدٍ (रुक्निन शदीद): मज़बूत सहारा, शक्तिशाली क़बीला या ऐसा गोत्र जो सुरक्षा प्रदान कर सके।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उनकी नसीहत को ठुकरा दिया और अपने घिनौने काम (बदकारी) पर अड़ी रही, तो आपने उनसे कहा: "काश! मेरे पास तुम्हारे मुक़ाबले की ताक़त होती, या मेरे पास कोई मज़बूत सहारा होता — जैसे कोई शक्तिशाली क़बीला या रिश्तेदार जो मेरी मदद करता — तो मैं तुम्हें इस बुराई से रोकता और अपने मेहमानों को तुम्हारे हाथों से बचाता।"

यह कथन हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की मजबूरी और दुख को दर्शाता है। वे चाहते थे कि उनके पास कोई सांसारिक शक्ति या क़बीलाई पृष्ठभूमि होती तो वे इस बुराई को रोक पाते। लेकिन वे अकेले थे और उनकी क़ौम ने उनकी बात नहीं मानी। यहाँ से यह स्पष्ट होता है कि नबी भी इंसान होते हैं और सामान्य मानवीय कमज़ोरियों से गुज़रते हैं, लेकिन वे हमेशा अल्लाह की इच्छा के आगे सिर झुकाते हैं।

फ़ायदे (सबक):

  1. बुराई के ख़िलाफ़ उठना: यह आयत सिखाती है कि बुराई और अश्लीलता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना हर हाल में ज़रूरी है, चाहे इंसान अकेला ही क्यों न हो। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अकेले होते हुए भी अपनी क़ौम को रोकने की पूरी कोशिश की।
  2. ताक़त का सही इस्तेमाल: अगर अल्लाह किसी को ताक़त, धन या सामाजिक हैसियत देता है, तो उसे नेकी के कामों में और बुराई रोकने में इस्तेमाल करना चाहिए। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की तमन्ना थी कि उनके पास ताक़त होती तो वे इस बुराई को रोकते।
  3. अल्लाह पर भरोसा: जब इंसान के पास कोई सहारा नहीं होता, तो उसे अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की यह बात उनकी बेबसी को दर्शाती है, लेकिन उन्होंने अल्लाह से ही मदद की उम्मीद रखी, और अल्लाह ने अपने फ़रिश्तों को भेजकर उन्हें बचा लिया।
  4. मेहमानों की इज़्ज़त: इस आयत से मेहमानों की इज़्ज़त और उनकी हिफ़ाज़त की अहमियत भी सीख मिलती है। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपने मेहमानों (फ़रिश्तों) को बचाने के लिए अपनी पूरी कोशिश की।
  5. समाज की ज़िम्मेदारी: यह आयत बताती है कि समाज में बुराई को रोकने के लिए सिर्फ़ अकेले इंसान की नहीं, बल्कि पूरे समाज की ज़िम्मेदारी है। अगर क़बीले, रिश्तेदार और समाज मिलकर नेकी का साथ दें, तो बुराई को रोका जा सकता है।


📜 आयत 78-82 — सूरा हूद

78وَجَاءَهُ قَوْمُهُ يُهْرَعُونَ إِلَيْهِ وَمِن قَبْلُ كَانُوا يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ ۚ قَالَ يَا قَوْمِ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي هُنَّ أَطْهَرُ لَكُمْ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ فِي ضَيْفِي ۖ أَلَيْسَ مِنكُمْ رَجُلٌ رَّشِيدٌ
और उनकी क़ौम (लड़को की आवाज़ सुनकर बुरे इरादे से) उनके पास दौड़ती हुई आई और ये लोग उसके क़ब्ल भी बुरे काम किया करते थे लूत ने (जब उनको) आते देखा तो कहा ऐ मेरी क़ौम ये मारी क़ौम की बेटियाँ (मौजूद हैं) उनसे निकाह कर लो ये तुम्हारीे वास्ते जायज़ और ज्यादा साफ सुथरी हैं तो खुदा से डरो और मुझे मेरे मेहमान के बारे में रुसवा न करो क्या तुम में से कोई भी समझदार आदमी नहीं है
79قَالُوا لَقَدْ عَلِمْتَ مَا لَنَا فِي بَنَاتِكَ مِنْ حَقٍّ وَإِنَّكَ لَتَعْلَمُ مَا نُرِيدُ
उन (कम्बख्तो) न जवाब दिया तुम को खूब मालूम है कि तुम्हारी क़ौम की लड़कियों की हमें कुछ हाजत (जरूरत) नही है और जो बात हम चाहते है वह तो तुम ख़ूब जानते हो
80قَالَ لَوْ أَنَّ لِي بِكُمْ قُوَّةً أَوْ آوِي إِلَىٰ رُكْنٍ شَدِيدٍ
लूत ने कहा काश मुझमें तुम्हारे मुक़ाबले की कूवत होती या मै किसी मज़बूत क़िले मे पनाह ले सकता
81قَالُوا يَا لُوطُ إِنَّا رُسُلُ رَبِّكَ لَن يَصِلُوا إِلَيْكَ ۖ فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِّنَ اللَّيْلِ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌ إِلَّا امْرَأَتَكَ ۖ إِنَّهُ مُصِيبُهَا مَا أَصَابَهُمْ ۚ إِنَّ مَوْعِدَهُمُ الصُّبْحُ ۚ أَلَيْسَ الصُّبْحُ بِقَرِيبٍ
वह फरिश्ते बोले ऐ लूत हम तुम्हारे परवरदिगार के भेजे हुए (फरिश्ते हैं तुम घबराओ नहीं) ये लोग तुम तक हरगिज़ (नहीं पहुँच सकते तो तुम कुछ रात रहे अपने लड़कों बालों समैत निकल भागो और तुममें से कोई इधर मुड़ कर भी न देखे मगर तुम्हारी बीबी कि उस पर भी यक़ीनन वह अज़ाब नाज़िल होने वाला है जो उन लोगों पर नाज़िल होगा और उन (के अज़ाब का) वायदा बस सुबह है क्या सुबह क़रीब नहीं
82فَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا جَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهَا حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ مَّنضُودٍ
फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने (बस्ती की ज़मीन के तबके) उलट कर उसके ऊपर के हिस्से को नीचे का बना दिया और उस पर हमने खरन्जेदार पत्थर ताबड़ तोड़ बरसाए
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
80आयत

अनुवाद — हूद 80

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Thursday, October 1, 2026

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