यूसुफ · 13/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
قَالَ إِنِّي لَيَحْزُنُنِي أَن تَذْهَبُوا بِهِ وَأَخَافُ أَن يَأْكُلَهُ الذِّئْبُ وَأَنتُمْ عَنْهُ غَافِلُونَ ۝١٣
Qaala innee la yahzununeee an tazhaboo bihee wa akhaafu anyyaakulahuz zi`bu wa antum `anhu ghaafiloon
📖 हिंदी अर्थ
और हम लोग तो उसके निगेहबान हैं ही याक़ूब ने कहा तुम्हारा उसको ले जाना मुझे सख्त सदमा पहुँचाना है और मै तो इससे डरता हूँ कि तुम सब के सब उससे बेख़बर हो जाओ और (मुबादा) उसे भेड़िया फाड़ खाए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَيَحْزُنُنِي: मुझे दुखी करेगा, मेरे दिल को पीड़ा पहुँचाएगा।
  • تَذْهَبُوا بِهِ: उसे (यूसुफ को) अपने साथ ले जाओ।
  • الذِّئْبُ: भेड़िया (भेड़िये का इकाई रूप)।
  • غَافِلُونَ: बेखबर, लापरवाह, ध्यान न देने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब यूसुफ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने अपने पिता याकूब (अलैहिस्सलाम) से अनुरोध किया कि वे यूसुफ को अपने साथ चरागाह (मैदान) में ले जाना चाहते हैं, तो याकूब ने उन्हें उत्तर दिया: "मुझे इस बात से बहुत दुख और गम होगा कि तुम उसे अपने साथ ले जाओ, क्योंकि मैं उसके बिछड़ने का दर्द सहन नहीं कर सकता। और मुझे यह भी डर है कि जब तुम लोग अपने कामों में व्यस्त हो जाओगे और उससे बेखबर हो जाओगे, तो कहीं कोई भेड़िया उसे खा न जाए।" यह डर याकूब (अलैहिस्सलाम) के दिल में यूसुफ के प्रति अत्यधिक प्रेम और उसकी सुरक्षा की चिंता से पैदा हुआ था। वे जानते थे कि यूसुफ अभी छोटा और कमज़ोर है, और भाइयों का ध्यान उससे हटते ही उसे खतरा हो सकता है। यह उनके पैतृक प्रेम और दूरदर्शिता का प्रमाण है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. संतान के प्रति प्रेम और चिंता: यह आयत माता-पिता के अपने बच्चों के प्रति स्वाभाविक प्रेम और उनकी सुरक्षा की गहरी चिंता को दर्शाती है। यह एक सराहनीय गुण है जो इस्लाम में माता-पिता को सिखाया गया है।
  2. सावधानी और दूरदर्शिता: याकूब (अलैहिस्सलाम) ने संभावित खतरे को पहले ही भांप लिया था। यह हमें सिखाता है कि इंसान को अपने मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए और संभावित नुकसान से बचने के उपाय करने चाहिए।
  3. परिवार में विश्वास और सलाह: याकूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बड़े बेटों को अपनी चिंता और डर स्पष्ट रूप से बताया, जो परिवार के सदस्यों के बीच खुले संवाद और आपसी सलाह की महत्ता को दर्शाता है।
  4. अल्लाह पर भरोसा: इस कठिन परिस्थिति में भी याकूब (अलैहिस्सलाम) का अल्लाह पर भरोसा कायम रहा, और उन्होंने अपनी चिंता के बावजूद अल्लाह की इच्छा के आगे समर्पण किया। यह हमें सिखाता है कि मुसीबतों में भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।


📜 आयत 11-15 — सूरा यूसुफ

11قَالُوا يَا أَبَانَا مَا لَكَ لَا تَأْمَنَّا عَلَىٰ يُوسُفَ وَإِنَّا لَهُ لَنَاصِحُونَ
सब ने (याक़ूब से) कहा अब्बा जान आख़िर उसकी क्या वजह है कि आप यूसुफ के बारे में हमारा ऐतबार नहीं करते
12أَرْسِلْهُ مَعَنَا غَدًا يَرْتَعْ وَيَلْعَبْ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ
हालॉकि हम लोग तो उसके ख़ैर ख्वाह (भला चाहने वाले) हैं आप उसको कुल हमारे साथ भेज दीजिए कि ज़रा (जंगल) से फल वगैरह् खाए और खेले कूदे
13قَالَ إِنِّي لَيَحْزُنُنِي أَن تَذْهَبُوا بِهِ وَأَخَافُ أَن يَأْكُلَهُ الذِّئْبُ وَأَنتُمْ عَنْهُ غَافِلُونَ
और हम लोग तो उसके निगेहबान हैं ही याक़ूब ने कहा तुम्हारा उसको ले जाना मुझे सख्त सदमा पहुँचाना है और मै तो इससे डरता हूँ कि तुम सब के सब उससे बेख़बर हो जाओ और (मुबादा) उसे भेड़िया फाड़ खाए
14قَالُوا لَئِنْ أَكَلَهُ الذِّئْبُ وَنَحْنُ عُصْبَةٌ إِنَّا إِذًا لَّخَاسِرُونَ
वह लोग कहने लगे जब हमारी बड़ी जमाअत है (इस पर भी) अगर उसको भेड़िया खा जाए तो हम लोग यक़ीनन बड़े घाटा उठाने वाले (निकलते) ठहरेगें
15فَلَمَّا ذَهَبُوا بِهِ وَأَجْمَعُوا أَن يَجْعَلُوهُ فِي غَيَابَتِ الْجُبِّ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَيْهِ لَتُنَبِّئَنَّهُم بِأَمْرِهِمْ هَٰذَا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
ग़रज़ यूसुफ को जब ये लोग ले गए और इस पर इत्तेफ़ाक़ कर लिया कि उसको अन्धे कुएँ में डाल दें और (आख़िर ये लोग गुज़रे तो) हमने युसुफ़ के पास 'वही' भेजी कि तुम घबराओ नहीं हम अनक़रीब तुम्हें मरतबे (उँचे मकाम) पर पहुँचाएगे (तब तुम) उनके उस फेल (बद) से तम्बीह (आग़ाह) करोगे
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — यूसुफ 13

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Friday, October 2, 2026

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