अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عُصْبَةٌ (उस्बतुन): मज़बूत और संगठित समूह, जो किसी की रक्षा करने की क्षमता रखता हो।
- لَخَاسِرُونَ (ल-ख़ासिरून): घाटे में रहने वाले, नुक़सान उठाने वाले, बेकार और नाकारा लोग।
आयत की व्याख्या:
जब हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों से कहा कि मुझे डर है कि कहीं यूसुफ़ को भेड़िया न खा जाए, और तुम लोग उससे बेख़बर न हो जाओ, तो उन्होंने जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा: "अगर भेड़िया उसे खा जाए जबकि हम एक मज़बूत और ताकतवर समूह हैं, तो हम सचमुच बड़े घाटे में रहेंगे और हमारी कोई हैसियत नहीं।" उनका इशारा इस ओर था कि हम इतने सारे लोग हैं, इतने ताकतवर हैं कि अगर हमारी मौजूदगी में भेड़िया उसे खा जाए, तो हमारी कोई अहमियत नहीं, हम निहायत कमज़ोर और नाकारा हैं। उन्होंने यह बात अपने पिता को आश्वस्त करने के लिए कही, ताकि वह उन्हें यूसुफ़ को साथ ले जाने की इजाज़त दे दें। लेकिन उनकी यह बात उनके दिल में छिपे बुरे इरादे को छिपाने का एक हथियार थी, क्योंकि असल में वे यूसुफ़ को नुक़सान पहुँचाने की योजना बना चुके थे। उन्होंने अपनी बात को इस तरह पेश किया जैसे वे यूसुफ़ की हिफ़ाज़त के लिए बहुत चिंतित हैं, जबकि उनका इरादा उसे कुएँ में डालने का था।
आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ और फ़ायदे:
- इंसान को चाहिए कि वह अपनी बातों में सच्चाई और ईमानदारी अपनाए। यूसुफ़ के भाइयों ने अपने पिता को धोखा देने के लिए मीठी-मीठी बातें कीं, जो कि बिल्कुल ग़लत था। इससे हमें सबक मिलता है कि झूठ और धोखा कभी भी अच्छे अंजाम तक नहीं पहुँचाता।
- इंसान को अपनी ताकत और हैसियत पर घमंड नहीं करना चाहिए। भाइयों ने अपनी ताकत का दावा किया, लेकिन अल्लाह की योजना के आगे उनकी सारी ताकत बेकार साबित हुई। यह सिखाता है कि असली ताकत अल्लाह के हाथ में है।
- माता-पिता की चिंता और उनकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए। हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) का डर सही निकला, इसलिए बच्चों को चाहिए कि वे अपने माता-पिता के अनुभव और उनकी सलाह को कभी हल्के में न लें।
- यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने कामों में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि इंसान की योजनाएँ चाहे कितनी भी मज़बूत हों, अल्लाह की मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं हो सकता। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की कहानी का यह हिस्सा हमें यही सबक देता है कि अल्लाह की तदबीर सबसे बेहतर होती है।
📜 आयत 12-16 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 14
सूरा यूसुफ आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहने लगे जब हमारी बड़ी जमाअत है (इस…सूरा आयत 14/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








