(ये वाक़िया चौबदार ने यूसुफ से बयान किया (यूसुफ ने कहा) ये क़िस्से मैने इसलिए छेड़ा) ताकि तुम्हारे बादशाह को मालूम हो जाए कि मैने अज़ीज़ की ग़ैबत में उसकी (अमानत में ख़यानत नहीं की) और ख़ुदा ख़यानत करने वालों की मक्कारी हरगिज़ चलने नहीं देता
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(یوسف نے کہا کہ میں نے) یہ بات اس لیے (پوچھی ہے) کہ عزیز کو یقین ہوجائے کہ میں نے اس کی پیٹھ پیچھے اس کی (امانت میں خیانت نہیں کی) اور خدا خیانت کرنے والوں کے مکروں کو روبراہ نہیں کرتا
(ये वाक़िया चौबदार ने यूसुफ से बयान किया (यूसुफ ने कहा) ये क़िस्से मैने इसलिए छेड़ा) ताकि तुम्हारे बादशाह को मालूम हो जाए कि मैने अज़ीज़ की ग़ैबत में उसकी (अमानत में ख़यानत नहीं की) और ख़ुदा ख़यानत करने वालों की मक्कारी हरगिज़ चलने नहीं देता
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
ذَٰلِكَ (यह): यह कथन, यह बात।
لِيَعْلَمَ (ताकि वह जान ले): ताकि मालूम हो जाए।
لَمْ أَخُنْهُ (मैंने उसके साथ ख़ियानत नहीं की): मैंने उसके प्रति विश्वासघात नहीं किया।
بِالْغَيْبِ (उसकी अनुपस्थिति में): उसके पीछे, उसकी ग़ैर-मौजूदगी में।
كَيْدَ الْخَائِنِينَ (ख़ियानत करने वालों की चाल): धोखा देने वालों की साज़िश।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह वह कथन है जो मिस्र के अज़ीज़ (शासक) की पत्नी ने उस समय कहा जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की बेगुनाही साबित हो गई और सच्चाई सामने आ गई। उसने कहा: "यह सब कुछ जो मैंने अभी कहा और सच्चाई का इक़रार किया, इसका मक़सद यह है कि मेरे पति को यह पता चल जाए कि मैंने उसकी अनुपस्थिति में उसके साथ ख़ियानत नहीं की, और न ही मैंने उस पर कोई झूठा इल्ज़ाम लगाया। मैंने यूसुफ़ पर आरोप लगाया था, लेकिन सच्चाई यह है कि मैंने ही उसे बहकाना चाहा था, और वह बिल्कुल सच्चा और पाकदामन है।"
वह यह भी बताना चाहती थी कि जब उसने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की पाकदामनी और सच्चाई देखी, तो उसे यक़ीन हो गया कि अल्लाह तआला ख़ियानत करने वालों की चाल को कामयाब नहीं करता। अल्लाह उन्हें उनके मकर और धोखे में कामयाबी नहीं देता, बल्कि उनकी साज़िशों को नाकाम कर देता है और सच्चाई को ज़ाहिर कर देता है। यह उसका इक़रार था कि यूसुफ़ बेगुनाह है और उसकी सफ़ाई का रास्ता अल्लाह ने खुद दिखाया।
फ़ायदे (सबक़):
सच्चाई और ईमानदारी हमेशा ऊपर रहती है, चाहे कितनी भी बड़ी साज़िशें क्यों न बनाई जाएँ। अल्लाह सच्चे लोगों की मदद करता है और उनकी बेगुनाही ज़ाहिर करता है।
ख़ियानत और धोखे का अंजाम बुरा होता है। अल्लाह ख़ियानत करने वालों को कभी कामयाबी नहीं देता, भले ही वे कितनी ही चतुराई से अपनी चाल चलें।
इंसान को चाहिए कि ग़लती हो जाने पर सच्चाई का इक़रार करे और अपनी ग़लती से तौबा करे। यह बहादुरी की निशानी है, जैसा कि अज़ीज़ की पत्नी ने सच्चाई का इक़रार किया।
पाकदामनी और परहेज़गारी की बरकत से अल्लाह इंसान की इज़्ज़त बढ़ाता है और उसे बड़े-बड़े फ़ित्नों से महफ़ूज़ रखता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की पाकदामनी ही उनकी नजात का ज़रिया बनी।
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि वही हर मुश्किल से निकलने का रास्ता बनाता है और सच्चाई को बुलंद करता है।
(ये ताबीर सुनते ही) बादशाह ने हुक्म दिया कि यूसुफ को मेरे हुज़ूर में तो ले आओ फिर जब (शाही) चौबदार (ये हुक्म लेकर) यूसुफ के पास आया तो युसूफ ने कहा कि तुम अपनी सरकार के पास पलट जाओ और उनसे पूछो कि (आप को) कुछ उन औरतों का हाल भी मालूम है जिन्होने (मुझे देख कर) अपने अपने हाथ काट डाले थे कि या मैं उनका तालिब था
या वह (मेरी) इसमें तो शक़ ही नहीं कि मेरा परवरदिगार ही उनके मक्र से खूब वाक़िफ है चुनान्चे बादशाह ने (उन औरतों को तलब किया) और पूछा कि जिस वक्त तुम लोगों ने यूसुफ से अपना मतलब हासिल करने की खुद उन से तमन्ना की थी तो हमें क्या मामला पेश आया था वह सब की सब अर्ज क़रने लगी हाशा अल्लाह हमने यूसुफ में तो किसी तरह की बुराई नहीं देखी (तब) अज़ीज़ मिस्र की बीबी (ज़ुलेख़ा) बोल उठी अब तू ठीक ठीक हाल सब पर ज़ाहिर हो ही गया (असल बात ये है कि) मैने खुद उससे अपना मतलब हासिल करने की तमन्ना की थी और बेशक वह यक़ीनन सच्चा है
(ये वाक़िया चौबदार ने यूसुफ से बयान किया (यूसुफ ने कहा) ये क़िस्से मैने इसलिए छेड़ा) ताकि तुम्हारे बादशाह को मालूम हो जाए कि मैने अज़ीज़ की ग़ैबत में उसकी (अमानत में ख़यानत नहीं की) और ख़ुदा ख़यानत करने वालों की मक्कारी हरगिज़ चलने नहीं देता
और (यूं तो) मै भी अपने नफ्स को गुनाहो से बे लौस नहीं कहता हूँ क्योंकि (मैं भी बशर हूँ और नफ्स बराबर बुराई की तरफ उभारता ही है मगर जिस पर मेरा परवरदिगार रहम फरमाए (और गुनाह से बचाए)
इसमें शक़ नहीं कि मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है और बादशाह ने हुक्म दिया कि यूसुफ को मेरे पास ले आओ तो मैं उनको अपने ज़ाती काम के लिए ख़ास कर लूंगा फिर उसने यूसुफ से बातें की तो यूसुफ की आला क़ाबलियत साबित हुई (और) उसने हुक्म दिया कि तुम आज (से) हमारे सरकार में यक़ीन बावक़ार (और) मुअतबर हो
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