Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُبَرِّئُ: मैं पवित्र या निर्दोष नहीं ठहराती।
- أَمَّارَةٌ بِالسُّوءِ: बुराई का बहुत अधिक आदेश देने वाली।
- إِلَّا مَا رَحِمَ رَبِّي: परन्तु वह (नफ्स) जिस पर मेरा रब दया करे।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अज़ीज़ (मिस्र के शासक) की पत्नी अपनी सच्चाई और ईमानदारी का इज़हार करते हुए कहती है कि मैं अपने नफ्स (अपनी आत्मा) को पवित्र या निर्दोष नहीं ठहराती। मैं यह दावा नहीं करती कि मैं बुराई से पूरी तरह मुक्त हूँ। उसने यह बात उस समय कही जब यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की पवित्रता स्पष्ट हो चुकी थी और उसका अपना कुकर्म भी खुल चुका था। वह स्वीकार करती है कि मानव स्वभाव (नफ्स) स्वाभाविक रूप से बुराई की ओर झुकाव रखता है और उसे बुराई का आदेश देता है, क्योंकि वह अपनी इच्छाओं और लालसाओं को पूरा करना चाहता है। यह उसकी फितरत (प्राकृतिक प्रवृत्ति) है—जब तक कि अल्लाह किसी पर अपनी विशेष दया और कृपा न करे, उसे बुराई से बचाए और उसके नफ्स को काबू में रखने की तौफ़ीक़ दे। फिर वह कहती है कि मेरा रब बहुत क्षमाशील और अत्यंत दयावान है—वह अपने बंदों के पापों को क्षमा करता है जब वे तौबा करते हैं, और उन पर दया करता है।
फ़ायदे (लाभ और सबक):
- नफ्स की हकीकत: यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान का नफ्स स्वभावतः बुराई की तरफ झुकाव रखता है। इसलिए हमें अपने नफ्स पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उससे सावधान रहना चाहिए और उसे काबू में रखने की कोशिश करनी चाहिए।
- अपनी कमज़ोरी का इक़रार: इंसान को चाहिए कि वह अपनी कमज़ोरियों और गलतियों को स्वीकार करे, न कि अपनी पाकीज़गी का दावा करे। यह विनम्रता और अल्लाह के सामने झुकने की निशानी है।
- अल्लाह की रहमत पर भरोसा: अल्लाह की दया और क्षमा असीम है। जब इंसान अपनी कमज़ोरी महसूस करता है और अल्लाह से मदद माँगता है, तो अल्लाह उसकी मदद करता है और उसे बुराई से बचाता है।
- तौबा का दरवाज़ा: यह आयत हमें बताती है कि चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाहगार क्यों न हो, अल्लाह की क्षमा का दरवाज़ा हमेशा खुला है। वह तौबा करने वालों को माफ कर देता है और उन पर रहम करता है।
- अपने आप को बुरा न समझना: इसका मतलब यह नहीं कि इंसान निराश हो जाए, बल्कि उसे अपनी कमज़ोरी पहचानकर अल्लाह से मदद माँगनी चाहिए और उसकी रहमत पर भरोसा रखना चाहिए।
📜 आयत 51-55 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 53
सूरा यूसुफ आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (यूं तो) मै भी अपने नफ्स को गुनाहो से…सूरा आयत 53/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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