Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَسْتَخْلِصْهُ: उसे अपने लिए विशेष/ख़ालिस कर लूँ, अपने निकट का बना लूँ।
- مَكِينٌ: महान पद वाला, प्रतिष्ठित, जिसे पूरा अधिकार प्राप्त हो।
- أَمِينٌ: विश्वसनीय, अमानतदार, जिस पर हर चीज़ का भरोसा किया जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब राजा (मिस्र का शासक) को यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की बेगुनाही का पूरा यक़ीन हो गया और उसने उनकी विद्वता, बुद्धिमत्ता और ईमानदारी को देखा, तो उसने अपने दरबारियों से कहा: "यूसुफ़ को मेरे पास लाओ, मैं उसे अपने लिए विशेष बना लूँगा और उसे अपने निकट का साथी बनाऊँगा।" जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) राजा के पास आए और उन्होंने आमने-सामने बातचीत की, तो राजा उनके ज्ञान, समझदारी, अच्छे आचरण और अमानतदारी से और अधिक प्रभावित हुआ। उसने उनसे कहा: "आज से तुम हमारे यहाँ महान पद वाले हो, पूरी तरह से प्रतिष्ठित हो, और हर मामले में विश्वसनीय हो।" यह यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की पवित्रता और सच्चाई का प्रमाण था कि जिसने उन्हें जेल में डाला था, वही राजा अब उन्हें सम्मानित कर रहा था और उन्हें अपने राज्य का अमानतदार बना रहा था।
फ़ायदे (सबक):
- सच्चाई और पवित्रता की जीत होती है, चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएँ। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने जेल में रहकर भी अपना धैर्य और ईमान नहीं खोया, और अल्लाह ने उन्हें ऊँचा पद दिया।
- अमानतदारी और ईमानदारी इंसान को दूसरों की नज़रों में महान बनाती है। राजा ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को इसलिए सम्मानित किया क्योंकि उन्होंने अपनी अमानतदारी साबित की।
- यह घटना हमें सिखाती है कि मुसीबतों में धैर्य और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह जब चाहता है, इंसान की तक़दीर बदल देता है और उसे ज़िल्लत से इज़्ज़त की ओर ले जाता है।
- एक अच्छा इंसान अपने ज्ञान और अच्छे आचरण से दुश्मनों को भी दोस्त बना लेता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने अपने ज्ञान और नेकी से राजा का दिल जीत लिया।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि इस्लाम में ज्ञान और अमानतदारी को बहुत ऊँचा दर्जा दिया गया है। जो इंसान इन गुणों से सुसज्जित होता है, वह समाज में सम्मान पाता है।
📜 आयत 52-56 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 54
सूरा यूसुफ आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें शक़ नहीं कि मेरा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान…सूरा आयत 54/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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