और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको मज़िले मक़सूद तक पहुँचा देता वह वही (ख़ुदा) है जिसने आसमान से पानी बरसाया जिसमें से तुम सब पीते हो और इससे दरख्त शादाब होते हैं
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وہی تو ہے جس نے آسمان سے پانی برسایا جسے تم پیتے ہو اور اس سے درخت بھی (شاداب ہوتے ہیں) جن میں تم اپنے چارپایوں کو چراتے ہو
أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً: आकाश से वर्षा का जल उतारा।
شَرَابٌ: पीने का जल।
شَجَرٌ: वृक्ष, पेड़-पौधे।
فِيهِ تُسِيمُونَ: उस (वनस्पति) में तुम अपने जानवरों को चराते हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही वह (सर्वशक्तिमान) है जिसने आकाश से तुम्हारे लिए वर्षा का जल उतारा। उसी जल से तुम्हारे लिए पीने का पानी होता है, और उसी जल के कारण पेड़-पौधे उगते हैं, जिनमें तुम अपने जानवरों (ऊँट, बकरी, गाय आदि) को चराते हो। यह जल अल्लाह की ओर से एक महान दया और अनुग्रह है, जो पीने के काम आता है और जिससे धरती हरी-भरी होकर तुम्हारे चरने वाले जानवरों के लिए चारा पैदा करती है। यह सब अल्लाह की कुदरत और उसकी रहमत का नमूना है।
फ़ायदे (उपदेश):
यह आयत हमें अल्लाह की असीम दया और उसकी नेमतों पर विचार करने की शिक्षा देती है। जल ही वह मूल स्रोत है जिससे जीवन, खेती और चारागाह सब कुछ चलता है।
यह हमें अल्लाह का शुक्र अदा करने की तरफ़ प्रेरित करती है, क्योंकि उसने बिना किसी कीमत के हमें पीने का शुद्ध जल और चरने के लिए हरियाली प्रदान की।
यह आयत हमें यह सिखाती है कि जिस प्रकार अल्लाह ने बारिश के जल से मृत भूमि को जीवित किया, उसी प्रकार वह क़यामत के दिन मृत लोगों को जीवित करेगा। यह ईमान और आख़िरत की याद दिलाती है।
यह हमें प्रकृति की ओर ध्यान देने और उसमें अल्लाह की निशानियों को पहचानने की दावत देती है, ताकि हम उसकी महानता और एकता को समझें और उसकी इबादत में लगें।
और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको मज़िले मक़सूद तक पहुँचा देता वह वही (ख़ुदा) है जिसने आसमान से पानी बरसाया जिसमें से तुम सब पीते हो और इससे दरख्त शादाब होते हैं
और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको मज़िले मक़सूद तक पहुँचा देता वह वही (ख़ुदा) है जिसने आसमान से पानी बरसाया जिसमें से तुम सब पीते हो और इससे दरख्त शादाब होते हैं
जिनमें तुम (अपने मवेशियों को) चराते हो इसी पानी से तुम्हारे वास्ते खेती और जैतून और खुरमें और अंगूर उगाता है और हर तरह के फल (पैदा करता है) इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालो के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
उसी ने तुम्हारे वास्ते रात को और दिन को और सूरज और चाँद को तुम्हारा ताबेए बना दिया है और सितारे भी उसी के हुक्म से (तुम्हारे) फरमाबरदार हैं कुछ शक़ ही नहीं कि (इसमें) समझदार लोगों के वास्ते यक़ीनन (कुदरत खुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।