अन-नहल · 9/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَعَلَى اللَّهِ قَصْدُ السَّبِيلِ وَمِنْهَا جَائِرٌ ۚ وَلَوْ شَاءَ لَهَدَاكُمْ أَجْمَعِينَ ۝٩
Wa `alal laahi qasdus sabeeli wa minhaa jaaa`ir; wa law shaaa`a lahadaakum ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
(उसके अलावा) और चीज़े भी पैदा करेगा जिनको तुम नहीं जानते हो और (ख़ुश्क व तर में) सीधी राह (की हिदायत तो ख़ुदा ही के ज़िम्मे हैं और बाज़ रस्ते टेढे हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَصْدُ السَّبِيلِ: सीधा और सही मार्ग, जो मंज़िल तक पहुँचाए।
  • جَائِرٌ: टेढ़ा, भटका हुआ, सत्य से हटा हुआ मार्ग।
  • لَهَدَاكُمْ: वह तुम्हें मार्गदर्शन देता, हिदायत देता।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला का अपने बंदों पर यह अहसान और उसकी शान के लाज़िम है कि वह सीधा और सही रास्ता बयान करे, जो उसकी रज़ा और जन्नत तक पहुँचाता है — और वह इस्लाम का रास्ता है। यह रास्ता साफ़ और सीधा है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं। इसके अलावा और भी रास्ते हैं, जो सत्य से भटके हुए हैं, जैसे शिर्क, कुफ्र और बिदअत के रास्ते — ये सब जाइर (टेढ़े) हैं, यानी अल्लाह की मंज़िल तक नहीं पहुँचाते। ये रास्ते शैतान के हैं, जो इंसान को गुमराह करते हैं।

अल्लाह ने यह भी बताया कि उसने इंसान को अक्ल और इख्तियार (स्वतंत्र इच्छा) दी है, और रसूल भेजकर सही रास्ता दिखा दिया है। अब यह इंसान पर है कि वह सीधे रास्ते पर चले या टेढ़े रास्ते को अपनाए। अगर अल्लाह चाहता, तो वह सबको जबरन हिदायत दे सकता था और कोई गुमराह न होता, लेकिन उसकी हिकमत (बुद्धि) ने यही माँगा कि इंसान को आज़माइश के लिए इख्तियार दिया जाए, ताकि उसकी परीक्षा हो — कौन सच्चे दिल से हिदायत क़बूल करता है और कौन उसे ठुकराता है। यह अल्लाह की रहमत और अदल (न्याय) का तकाज़ा है।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह ने अपनी रहमत से इंसान को बेहतरीन नेमत दी है — सीधे रास्ते का बयान, ताकि कोई बहाना न बना सके कि हमें रास्ता नहीं मालूम था।
  2. इस्लाम ही वह सच्चा और सीधा रास्ता है, जो इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। इसके अलावा हर रास्ता टेढ़ा और नुक़सानदेह है।
  3. अल्लाह ने इंसान को इख्तियार दिया है, इसलिए हमें अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए और अपनी मर्ज़ी से सही रास्ता चुनना चाहिए।
  4. यह आयत हमें अल्लाह का शुक्रगुज़ार बनाती है कि उसने हमें इस्लाम जैसी नेमत दी, और हमें चाहिए कि इस नेमत की क़द्र करें और उस पर साबित-क़दम रहें।
  5. अल्लाह की हिकमत पर भरोसा रखें — वह जो चाहता है, करता है, और उसका हर फ़ैसला हिकमत और भलाई पर आधारित है।


📜 आयत 7-11 — सूरा अन-नहल

7وَتَحْمِلُ أَثْقَالَكُمْ إِلَىٰ بَلَدٍ لَّمْ تَكُونُوا بَالِغِيهِ إِلَّا بِشِقِّ الْأَنفُسِ ۚ إِنَّ رَبَّكُمْ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ
तो उनकी वजह से तुम्हारी रौनक़ भी है और जिन शहरों तक बग़ैर बड़ी जान ज़ोख़म में डाले बगैर के पहुँच न सकते थे वहाँ तक ये चौपाए भी तुम्हारे बोझे भी उठा लिए फिरते हैं इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा शफीक़ मेहरबान है
8وَالْخَيْلَ وَالْبِغَالَ وَالْحَمِيرَ لِتَرْكَبُوهَا وَزِينَةً ۚ وَيَخْلُقُ مَا لَا تَعْلَمُونَ
और (उसी ने) घोड़ों ख़च्चरों और गधों को (पैदा किया) ताकि तुम उन पर सवार हो और (इसमें) ज़ीनत (भी) है
9وَعَلَى اللَّهِ قَصْدُ السَّبِيلِ وَمِنْهَا جَائِرٌ ۚ وَلَوْ شَاءَ لَهَدَاكُمْ أَجْمَعِينَ
(उसके अलावा) और चीज़े भी पैदा करेगा जिनको तुम नहीं जानते हो और (ख़ुश्क व तर में) सीधी राह (की हिदायत तो ख़ुदा ही के ज़िम्मे हैं और बाज़ रस्ते टेढे हैं
10هُوَ الَّذِي أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً ۖ لَّكُم مِّنْهُ شَرَابٌ وَمِنْهُ شَجَرٌ فِيهِ تُسِيمُونَ
और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको मज़िले मक़सूद तक पहुँचा देता वह वही (ख़ुदा) है जिसने आसमान से पानी बरसाया जिसमें से तुम सब पीते हो और इससे दरख्त शादाब होते हैं
11يُنبِتُ لَكُم بِهِ الزَّرْعَ وَالزَّيْتُونَ وَالنَّخِيلَ وَالْأَعْنَابَ وَمِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
जिनमें तुम (अपने मवेशियों को) चराते हो इसी पानी से तुम्हारे वास्ते खेती और जैतून और खुरमें और अंगूर उगाता है और हर तरह के फल (पैदा करता है) इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालो के वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
अन-नहलकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — अन-नहल 9

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Tuesday, September 29, 2026

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