अन-नहल · 108/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَسَمْعِهِمْ وَأَبْصَارِهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ ۝١٠٨
Ulaaa`ikal lazeena taba`al laahu `alaa quloobihim wa sam`ihim wa absaarihim wa ulaaa`ika humul ghaafiloon
📖 हिंदी अर्थ
ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर और उनके कानों पर और उनकी ऑंखों पर खुदा ने अलामात मुक़र्रर कर दी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • طَبَعَ: मुहर लगा दी, बंद कर दिया।
  • الْغَافِلُونَ: बेखबर, जो सत्य से ग़ाफ़िल (अनजान) हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये वे लोग हैं जिन्होंने ईमान लाने के बाद कुफ़्र (अविश्वास) को अपनाया और दुनिया को आख़िरत पर तरजीह दी। अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी, यानी उनके दिल इस क़दर बंद कर दिए गए कि उनमें हिदायत की रोशनी दाख़िल नहीं हो सकती। उनके कानों को इस तरह बहरा कर दिया गया कि वे अल्लाह की आयतों को सुनकर भी उन पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं करते, और उनकी आँखें अंधी कर दी गईं कि वे अल्लाह की क़ुदरत और एकता पर दलील देने वाले निशानियों को देखकर भी उनसे सबक़ नहीं लेते। यानी उनके दिल, कान और आँखें — तीनों ही हक़ (सत्य) को समझने और क़बूल करने से महरूम कर दी गईं, क्योंकि उन्होंने ख़ुद हक़ को ठुकराया और गुमराही पर अड़े रहे। यही लोग असल में ग़ाफ़िल (बेखबर) हैं — वे उस अज़ाब से बेख़बर हैं जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार किया है, और उन कारणों से भी अनजान हैं जो उन्हें सुख और दुख की ओर ले जाते हैं। वे अपने अंजाम और अपने रब की मरज़ी से पूरी तरह ग़ाफ़िल हैं।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की तरफ़ से दिल पर मुहर लगना कोई ज़ुल्म नहीं, बल्कि इंसान के अपने कर्मों का नतीजा है। जब इंसान हक़ को जानबूझकर ठुकराता है और गुनाह पर अड़ा रहता है, तो अल्लाह उसे उसकी हालत पर छोड़ देता है।
  2. इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि हिदायत अल्लाह के हाथ में है, इसलिए हमें हमेशा उससे हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए और अपने दिल को साफ़ रखने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि उस पर मुहर न लगे।
  3. यह आयत हमें आगाह करती है कि जो लोग अल्लाह की आयतों से ग़ाफ़िल रहते हैं, वे असल नुक़सान में हैं — चाहे दुनिया में उन्हें कितनी भी खुशहाली क्यों न हो। इसलिए हमें क़ुरआन और अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते रहना चाहिए।
  4. यहाँ से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह का डर और उसकी इबादत ही वह चीज़ है जो दिल को ज़िंदा रखती है और उसे हिदायत की रोशनी से मालामाल करती है।


📜 आयत 106-110 — सूरा अन-नहल

106مَن كَفَرَ بِاللَّهِ مِن بَعْدِ إِيمَانِهِ إِلَّا مَنْ أُكْرِهَ وَقَلْبُهُ مُطْمَئِنٌّ بِالْإِيمَانِ وَلَٰكِن مَّن شَرَحَ بِالْكُفْرِ صَدْرًا فَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ مِّنَ اللَّهِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
और हक़ीक़त अम्र ये है कि यही लोग झूठे हैं उस शख्स के सिवा जो (कलमाए कुफ्र) पर मजबूर किया जाए और उसका दिल ईमान की तरफ से मुतमइन हो जो शख्स भी ईमान लाने के बाद कुफ्र एख्तियार करे बल्कि खूब सीना कुशादा (जी खोलकर) कुफ्र करे तो उन पर ख़ुदा का ग़ज़ब है और उनके लिए बड़ा (सख्त) अज़ाब है
107ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اسْتَحَبُّوا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَأَنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِرِينَ
ये इस वजह से कि उन लोगों ने दुनिया की चन्द रोज़ा ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह दी और इस वजह से की ख़ुदा काफिरों को हरगिज़ मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
108أُولَٰئِكَ الَّذِينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَسَمْعِهِمْ وَأَبْصَارِهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ
ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर और उनके कानों पर और उनकी ऑंखों पर खुदा ने अलामात मुक़र्रर कर दी है
109لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْخَاسِرُونَ
(कि ईमान न लाएँगे) और यही लोग (इस सिरे के) बेखबर हैं कुछ शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में भी यक़ीनन घाटा उठाने वाले हैं
110ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ هَاجَرُوا مِن بَعْدِ مَا فُتِنُوا ثُمَّ جَاهَدُوا وَصَبَرُوا إِنَّ رَبَّكَ مِن بَعْدِهَا لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
फिर इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उन लोगों को जिन्होने मुसीबत में मुब्तिला होने क बाद घर बार छोडे फ़िर (ख़ुदा की राह में) जिहाद किए और तकलीफों पर सब्र किया इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार इन सब बातों के बाद अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
108आयत

अनुवाद — अन-नहल 108

सूरा अन-नहल आयत 108 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर और उनके कानों…

सूरा आयत 108/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 106–110. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए