Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عَاقَبْتُمْ (अक़ाबतुम): तुम बदला लो, दंड दो।
- بِمِثْلِ مَا عُوقِبْتُم بِهِ (बिमिस्लि मा उक़िब्तुम बिही): उसी के बराबर जैसा तुम्हारे साथ किया गया।
- صَبَرْتُمْ (सबरतुम): तुमने धैर्य दिखाया, सब्र किया।
- لَهُوَ خَيْرٌ (लहुवा ख़ैर): तो वह (सब्र) बेहतर है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों को न्याय और संतुलन का पाठ पढ़ाते हुए फ़रमाता है: अगर तुम किसी ज़ुल्म का बदला लेना चाहो, तो उसी के बराबर लो, जितना तुम पर ज़ुल्म हुआ है। उससे ज़्यादा नहीं बढ़ना चाहिए। यानी बदला लेते समय भी हद से आगे न बढ़ो, क्योंकि ज़ुल्म का जवाब ज़ुल्म से नहीं, बल्कि उतने ही के बराबर दिया जा सकता है जितना तुम्हारे साथ हुआ। यह अल्लाह का आदेश है कि इंसाफ़ की हद तक रहो।
लेकिन इसके बाद अल्लाह तआला बेहतर रास्ता बताता है: "और अगर तुम सब्र करो (यानी बदला लेने की बजाय माफ़ कर दो), तो यह सब्र करने वालों के लिए बेहतर है।" यानी माफ़ कर देना और अल्लाह के लिए दरगुज़र करना, बदला लेने से कहीं ज़्यादा बेहतर है। यह बेहतरी दुनिया में भी है (क्योंकि इससे दिल साफ़ रहता है और अल्लाह की मदद नसीब होती है) और आख़िरत में भी (क्योंकि इसका अज्र अल्लाह के पास महान है)।
फ़ायदे (उपदेश):
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि इंसाफ़ और न्याय इस्लाम की बुनियाद है। बदला लेते समय भी हद से आगे बढ़ना जायज़ नहीं।
- माफ़ी और दरगुज़र करना सबसे बड़ा गुण है। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो गुस्से पर क़ाबू रखते हैं और माफ़ कर देते हैं।
- सब्र का इनाम अल्लाह के पास बहुत बड़ा है। दुनिया में भी सब्र करने वाले को इज़्ज़त मिलती है और आख़िरत में भी।
- यह आयत हमें सिखाती है कि मुसलमान को हमेशा संतुलन और नर्मी का रास्ता अपनाना चाहिए, चाहे दुश्मन से भी पेश आना पड़े।
- इस्लाम जहाँ ज़ुल्म के ख़िलाफ़ खड़े होने की ताक़त देता है, वहीं माफ़ी और सब्र की फ़ज़ीलत भी सिखाता है — यही इस्लाम की खूबसूरती है।
📜 आयत 124-128 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 126
सूरा अन-नहल आयत 126 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हिदायत याफ़ता लोगों से भी खूब वाक़िफ है और…सूरा आयत 126/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 124–128. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


