अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَقَلُّبِهِمْ: उनका आवागमन, यात्राएँ, व्यापार-व्यवसाय में इधर-उधर घूमना-फिरना।
- بِمُعْجِزِينَ: अल्लाह को विवश करने वाले, उससे बच निकलने वाले, उसे थका देने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या ये काफ़िर लोग, जो अल्लाह के ख़िलाफ़ साज़िशें रचते हैं, इस बात से निडर हो गए हैं कि अल्लाह उन्हें उनके आवागमन और यात्राओं के दौरान, जब वे अपने व्यापार और काम-काज में इधर-उधर घूम रहे हों, अचानक अपनी पकड़ में न ले ले? वे समझते हैं कि वे अल्लाह को विवश कर देंगे या उसकी पकड़ से बच निकलेंगे, लेकिन यह उनकी भूल है। अल्लाह की पकड़ से कोई नहीं बच सकता। वह हर समय और हर स्थिति में उन पर पूर्ण नियंत्रण रखता है। चाहे वे सफ़र में हों, अपने घरों में हों, या किसी भी काम में लगे हों, अल्लाह की शक्ति उन पर हावी है। वे न तो अल्लाह को थका सकते हैं और न ही उसकी योजना को विफल कर सकते हैं। अल्लाह जब चाहता है, उन्हें उनकी साज़िशों के बीच ही पकड़ लेता है, और वे कहीं भाग नहीं सकते।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसकी शक्ति से बचने का कोई रास्ता नहीं है। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह की नाफ़रमानी से बचे और उसके सामने झुके।
- इंसान को अपनी ताक़त और साज़िशों पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की ताक़त सबसे बड़ी है और वह हर चीज़ पर क़ाबू रखता है।
- यह आयत मोमिनों के लिए तसल्ली का सबब है कि अल्लाह अपने दुश्मनों को कभी नहीं छोड़ता, चाहे वे कितनी भी कोशिशें कर लें। अल्लाह उन्हें उनकी साज़िशों के दौरान ही पकड़ सकता है।
- इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने जीवन के हर पल अल्लाह को याद रखना चाहिए, क्योंकि हम नहीं जानते कि अल्लाह की पकड़ कब आ जाए। इसलिए हमेशा तौबा और इस्तिग़फ़ार की हालत में रहना चाहिए।
- यह आयत अल्लाह की रहमत की तरफ़ भी इशारा करती है कि वह जल्दी में नहीं है और लोगों को मौक़ा देता है, लेकिन जब पकड़ता है, तो कोई नहीं बचा सकता। इसलिए अल्लाह की रहमत का फ़ायदा उठाकर सीधे रास्ते पर आ जाना चाहिए।
📜 आयत 44-48 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 46
सूरा अन-नहल आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनके चलते फिरते (ख़ुदा का अज़ाब) उन्हें गिरफ्तार करे तो…सूरा आयत 46/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








