अन-नहल · 57/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَيَجْعَلُونَ لِلَّهِ الْبَنَاتِ سُبْحَانَهُ ۙ وَلَهُم مَّا يَشْتَهُونَ ۝٥٧
Wa yaj`aloona lillaahil banaati Subhaanahoo wa lahum maa yashtahoon
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग ख़ुदा के लिए बेटियाँ तजवीज़ करते हैं (सुबान अल्लाह) वह उस से पाक व पाकीज़ा है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَيَجْعَلُونَ لِلَّهِ الْبَنَاتِ: ये लोग अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हैं।
  • سُبْحَانَهُ: अल्लाह पाक है, वह हर ऐब और कमी से मुक्त है।
  • وَلَهُم مَّا يَشْتَهُونَ: और अपने लिए वह (बेटे) चाहते हैं जो उन्हें पसंद हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुशरिकीन (बहुदेववादियों) के उस बुरे रवैये का खुलासा करती है जो उन्होंने अल्लाह के बारे में अपनाया था। वे कहते थे कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं, और इस तरह वे अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते थे। यह उनकी अज्ञानता और गुमराही की सबसे बड़ी मिसाल थी कि वे अल्लाह के लिए वह चीज़ तय करते थे जिसे वे खुद अपने लिए पसंद नहीं करते थे। अरब के मुशरिकीन बेटियों को बहुत बुरा मानते थे, यहाँ तक कि उनमें से कुछ अपनी बेटियों को ज़िंदा दफ़न कर देते थे, लेकिन फिर भी वे अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते थे। अल्लाह ने अपनी पाक ज़ात को उनके इस झूठे इल्ज़ाम से पाक और मुबर्रा बताया है, और फ़रमाया कि वह हर उस चीज़ से पाक है जो ये लोग उसके बारे में कहते हैं। वह बेटे और बेटी दोनों से पाक है, क्योंकि उसे किसी औलाद की ज़रूरत नहीं, वह हर कमी से मुक्त है। दूसरी तरफ़, ये लोग अपने लिए बेटों को चुनते थे, जो उनकी नज़र में इज़्ज़त और ताक़त का ज़रिया थे। यानी उन्होंने अल्लाह के लिए वह चुना जो वे खुद अपने लिए पसंद नहीं करते, और अपने लिए वह चुना जो वे पसंद करते हैं। यह उनका अत्यधिक अन्याय और अल्लाह के प्रति बेअदबी थी।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की ज़ात हर उस चीज़ से पाक है जो इंसान उसके बारे में ग़लत ख़यालात बनाता है, चाहे वह औलाद हो या कोई और कमी।
  2. इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के लिए वही बात कहे जो अल्लाह ने खुद अपने बारे में बताई है, और उसके बारे में अपनी राय या ख़यालात न बनाए।
  3. यह आयत उन लोगों की गुमराही को बयान करती है जो अल्लाह के साथ किसी को शरीक करते हैं या उसकी सिफ़ात में कमी लाते हैं।
  4. अल्लाह की रहमत और क़ुदरत का यह तक़ाज़ा है कि हम उसकी तारीफ़ करें और उसे हर ऐब से पाक जानें, क्योंकि वही सच्चा मालिक और पालनहार है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने लिए वही पसंद करना चाहिए जो अल्लाह को पसंद है, और अल्लाह के लिए वही ठहराना चाहिए जो उसकी शान के लायक़ है।


📜 आयत 55-59 — सूरा अन-नहल

55لِيَكْفُرُوا بِمَا آتَيْنَاهُمْ ۚ فَتَمَتَّعُوا ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
ताकि जो (नेअमतें) हमने उनको दी है उनकी नाशुक्री करें तो (ख़ैर दुनिया में चन्द रोज़ चैन कर लो फिर तो अनक़रीब तुमको मालूम हो जाएगा
56وَيَجْعَلُونَ لِمَا لَا يَعْلَمُونَ نَصِيبًا مِّمَّا رَزَقْنَاهُمْ ۗ تَاللَّهِ لَتُسْأَلُنَّ عَمَّا كُنتُمْ تَفْتَرُونَ
और हमने जो रोज़ी उनको दी है उसमें से ये लोग उन बुतों का हिस्सा भी क़रार देते है जिनकी हक़ीकत नहीं जानते तो ख़ुदा की (अपनी) क़िस्म जो इफ़तेरा परदाज़ियाँ तुम करते थे (क़यामत में) उनकी बाज़पुर्स (पूछ गछ) तुम से ज़रुर की जाएगी
57وَيَجْعَلُونَ لِلَّهِ الْبَنَاتِ سُبْحَانَهُ ۙ وَلَهُم مَّا يَشْتَهُونَ
और ये लोग ख़ुदा के लिए बेटियाँ तजवीज़ करते हैं (सुबान अल्लाह) वह उस से पाक व पाकीज़ा है
58وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِالْأُنثَىٰ ظَلَّ وَجْهُهُ مُسْوَدًّا وَهُوَ كَظِيمٌ
और अपने लिए (बेटे) जो मरग़ूब (दिल पसन्द) हैं और जब उसमें से किसी एक को लड़की पैदा होने की जो खुशख़बरी दीजिए रंज के मारे मुँह काला हो जाता है
59يَتَوَارَىٰ مِنَ الْقَوْمِ مِن سُوءِ مَا بُشِّرَ بِهِ ۚ أَيُمْسِكُهُ عَلَىٰ هُونٍ أَمْ يَدُسُّهُ فِي التُّرَابِ ۗ أَلَا سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ
और वह ज़हर का सा घूँट पीकर रह जाता है (बेटी की) जिसकी खुशखबरी दी गई है अपनी क़ौम के लोगों से छिपा फिरता है (और सोचता है) कि क्या इसको ज़िल्लत उठाके ज़िन्दा रहने दे या (ज़िन्दा ही) इसको ज़मीन में गाड़ दे-देखो तुम लोग किस क़दर बुरा एहकाम (हुक्म) लगाते हैं
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अनुवाद — अन-नहल 57

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Friday, October 2, 2026

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