Wa maaa anzalnaa `alaikal Kitaaba illaa litubaiyina lahumul lazikh talafoo feehi wa hudanw wa rahmatal liqawminy yu`minoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) तो इसी लिए नाज़िल की ताकि जिन बातों में ये लोग बाहम झगड़ा किए हैं उनको तुम साफ साफ बयान करो (और यह किताब) ईमानदारों के लिए तो (अज़सरतापा) हिदायत और रहमत है
🌐 Additional reference in اردو
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اور ہم نے جو تم پر کتاب نازل کی ہے تو اس کے لیے جس امر میں ان لوگوں کو اختلاف ہے تم اس کا فیصلہ کردو۔ اور (یہ) مومنوں کے لیے ہدایت اور رحمت ہے
اخْتَلَفُوا فِيهِ – जिस चीज़ में उन्होंने मतभेद किया
هُدًى – मार्गदर्शन
رَحْمَةً – दया (अनुग्रह)
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! हमने आप पर यह क़ुरआन इसलिए नाज़िल नहीं किया कि यह केवल पढ़ने या बरकत की चीज़ हो, बल्कि इसका सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि आप लोगों के सामने उन सभी मसाइल को स्पष्ट कर दें जिनमें वे मतभेद करते हैं। ये मतभेद अक़ीदे (तौहीद, आख़िरत, रिसालत) से लेकर अहकाम (हलाल-हराम, इबादत, मुआमलात) तक फैले हुए हैं। आपका बयान ही उनके लिए हुज्जत (प्रमाण) है, जिसके बाद किसी को बहाना नहीं बनाना चाहिए। साथ ही, यह क़ुरआन उन लोगों के लिए हिदायत और रहमत है जो ईमान लाते हैं—क्योंकि ईमानवाले ही इससे लाभ उठाते हैं, इसकी रोशनी में चलते हैं और इसकी रहमत को महसूस करते हैं। जिनके दिल बंद हैं, वे इससे हिदायत नहीं पाते, बल्कि उन पर हुज्जत क़ायम हो जाती है।
फ़ायदे (सबक):
क़ुरआन का सबसे बड़ा मक़सद लोगों के बीच फैले हुए इख़्तिलाफ़ात (मतभेदों) को ख़त्म करना और सच्चाई को वाज़ेह करना है। इसलिए हमें क़ुरआन की तरफ रुजू करना चाहिए, न कि अपनी राय या परंपराओं की तरफ।
नबी ﷺ का काम सिर्फ पहुँचाना नहीं, बल्कि समझाना और स्पष्ट करना भी है—यही सुन्नत का महत्व बताता है कि क़ुरआन को सुन्नत के बग़ैर समझा नहीं जा सकता।
क़ुरआन हिदायत और रहमत सिर्फ उन्हीं के लिए है जो ईमान रखते हैं। यानी फ़ायदा उठाने के लिए ईमान और खुले दिल की शर्त है। जो लोग ईमान लाएँगे, वही इससे रौशनी पाएँगे।
यह आयत हमें सिखाती है कि इख़्तिलाफ़ के वक़्त हमें क़ुरआन और सुन्नत की तरफ लौटना चाहिए, क्योंकि यही वह ज़रिया है जिससे अल्लाह ने हक़ को बयान किया है।
इस आयत में नबी ﷺ के मर्तबे की अज़मत भी ज़ाहिर है कि अल्लाह ने उन्हें इंसानियत का मुरशिद और रहनुमा बनाकर भेजा, और उनका बयान ही लोगों के लिए हुज्जत है।
और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) तो इसी लिए नाज़िल की ताकि जिन बातों में ये लोग बाहम झगड़ा किए हैं उनको तुम साफ साफ बयान करो (और यह किताब) ईमानदारों के लिए तो (अज़सरतापा) हिदायत और रहमत है
और ये लोग खुद जिन बातों को पसन्द नहीं करते उनको ख़ुदा के वास्ते क़रार देते हैं और अपनी ही ज़बान से ये झूठे दावे भी करते हैं कि (आख़िरत में भी) उन्हीं के लिए भलाई है (भलाई तो नहीं मगर) हाँ उनके लिए जहन्नुम की आग ज़रुरी है और यही लोग सबसे पहले (उसमें) झोंके जाएँगें
(ऐ रसूल) ख़ुदा की (अपनी) कसम तुमसे पहले उम्मतों के पास बहुतेरे पैग़म्बर भेजे तो शैतान ने उनकी कारस्तानियों को उम्दा कर दिखाया तो वही (शैतान) आज भी उन लोगों का सरपरस्त बना हुआ है हालॉकि उनके वास्ते दर्दनाक अज़ाब है
और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) तो इसी लिए नाज़िल की ताकि जिन बातों में ये लोग बाहम झगड़ा किए हैं उनको तुम साफ साफ बयान करो (और यह किताब) ईमानदारों के लिए तो (अज़सरतापा) हिदायत और रहमत है
और ख़ुदा ही ने आसमान से पानी बरसाया तो उसके ज़रिए ज़मीन को मुर्दा होने के बाद ज़िन्दा (शादाब) (हरी भरी) किया क्या कुछ शक नहीं कि इसमें जो लोग बसते हैं उनके वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है
और इसमें शक़ नहीं कि चौपायों में भी तुम्हारे लिए (इबरत की बात) है कि उनके पेट में ख़ाक, बला, गोबर और ख़ून (जो कुछ भरा है) उसमें से हमे तुमको ख़ालिस दूध पिलाते हैं जो पीने वालों के लिए खुशगवार है
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