Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِتُبَيِّنَ – ताकि आप स्पष्ट कर दें
- اخْتَلَفُوا فِيهِ – जिस चीज़ में उन्होंने मतभेद किया
- هُدًى – मार्गदर्शन
- رَحْمَةً – दया (अनुग्रह)
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! हमने आप पर यह क़ुरआन इसलिए नाज़िल नहीं किया कि यह केवल पढ़ने या बरकत की चीज़ हो, बल्कि इसका सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि आप लोगों के सामने उन सभी मसाइल को स्पष्ट कर दें जिनमें वे मतभेद करते हैं। ये मतभेद अक़ीदे (तौहीद, आख़िरत, रिसालत) से लेकर अहकाम (हलाल-हराम, इबादत, मुआमलात) तक फैले हुए हैं। आपका बयान ही उनके लिए हुज्जत (प्रमाण) है, जिसके बाद किसी को बहाना नहीं बनाना चाहिए। साथ ही, यह क़ुरआन उन लोगों के लिए हिदायत और रहमत है जो ईमान लाते हैं—क्योंकि ईमानवाले ही इससे लाभ उठाते हैं, इसकी रोशनी में चलते हैं और इसकी रहमत को महसूस करते हैं। जिनके दिल बंद हैं, वे इससे हिदायत नहीं पाते, बल्कि उन पर हुज्जत क़ायम हो जाती है।
फ़ायदे (सबक):
- क़ुरआन का सबसे बड़ा मक़सद लोगों के बीच फैले हुए इख़्तिलाफ़ात (मतभेदों) को ख़त्म करना और सच्चाई को वाज़ेह करना है। इसलिए हमें क़ुरआन की तरफ रुजू करना चाहिए, न कि अपनी राय या परंपराओं की तरफ।
- नबी ﷺ का काम सिर्फ पहुँचाना नहीं, बल्कि समझाना और स्पष्ट करना भी है—यही सुन्नत का महत्व बताता है कि क़ुरआन को सुन्नत के बग़ैर समझा नहीं जा सकता।
- क़ुरआन हिदायत और रहमत सिर्फ उन्हीं के लिए है जो ईमान रखते हैं। यानी फ़ायदा उठाने के लिए ईमान और खुले दिल की शर्त है। जो लोग ईमान लाएँगे, वही इससे रौशनी पाएँगे।
- यह आयत हमें सिखाती है कि इख़्तिलाफ़ के वक़्त हमें क़ुरआन और सुन्नत की तरफ लौटना चाहिए, क्योंकि यही वह ज़रिया है जिससे अल्लाह ने हक़ को बयान किया है।
- इस आयत में नबी ﷺ के मर्तबे की अज़मत भी ज़ाहिर है कि अल्लाह ने उन्हें इंसानियत का मुरशिद और रहनुमा बनाकर भेजा, और उनका बयान ही लोगों के लिए हुज्जत है।
📜 आयत 62-66 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 64
सूरा अन-नहल आयत 64 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) तो इसी लिए नाज़िल…सूरा आयत 64/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 62–66. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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