अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَضَّلَ: श्रेष्ठ बनाया, अधिक दिया
- الرِّزْق: आजीविका, धन-संपत्ति
- مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ: जिन पर उनके स्वामित्व का अधिकार है (दास-दासियाँ)
- سَوَاء: बराबर, समान
- يَجْحَدُونَ: इनकार करते हैं, अस्वीकार करते हैं
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपनी असीम कृपा और बुद्धिमत्ता से लोगों को आजीविका (रोज़ी) में एक-दूसरे पर श्रेष्ठता प्रदान की है। किसी को धन-दौलत से नवाज़ा, किसी को सीमित साधन दिए। कोई मालिक है तो कोई उसके अधीन। यह विभाजन अल्लाह की ओर से है, जो उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित है।
अब अल्लाह तआला एक तर्कपूर्ण प्रश्न उठाते हैं: जिन लोगों को अल्लाह ने धन दिया है, क्या वे अपने दासों (अधीनस्थों) को अपनी संपत्ति में से इतना देते हैं कि वे उनके बराबर के साझीदार बन जाएँ? कदापि नहीं! कोई भी मालिक अपने दास को अपने धन में बराबर का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता। जब मनुष्य स्वयं अपने अधीनस्थों के साथ बराबरी स्वीकार नहीं करता, तो वह अल्लाह के साथ उसकी सृष्टि में से किसी को साझीदार कैसे बना सकता है?
यह एक स्पष्ट और सरल तर्क है — यदि तुम अपने दासों को अपने बराबर नहीं मानते, तो तुम अल्लाह के साथ उसके बंदों को शरीक (साझीदार) कैसे ठहराते हो? यह अत्यंत अन्याय और अल्लाह की नेमतों की सबसे बड़ी नाशुक्री है। अल्लाह ने तुम्हें धन, स्वास्थ्य, परिवार, और असंख्य नेमतें दीं, लेकिन तुम उसकी इबादत के बजाय दूसरों की पूजा करते हो — यह कैसा जहालत भरा व्यवहार है!
शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह की रज़ा पर संतोष: रोज़ी में फ़र्क़ अल्लाह की ओर से है। जिसे कम मिला है उसे निराश नहीं होना चाहिए, और जिसे अधिक मिला है उसे घमंड नहीं करना चाहिए। यह अल्लाह की परीक्षा है।
- तौहीद (एकेश्वरवाद) का स्पष्ट प्रमाण: यह आयत शिर्क (बहुदेववाद) की मूर्खता को उजागर करती है। जब मनुष्य अपने दासों को अपने बराबर नहीं मानता, तो वह अल्लाह के साथ किसी को बराबर कैसे ठहरा सकता है?
- नेमतों की क़द्र: अल्लाह की हर नेमत उसकी ओर से है। उन्हें पहचानना और उनका सही उपयोग करना ही कृतज्ञता है। नेमतों से मुँह मोड़ना और उन्हें अस्वीकार करना सबसे बड़ी नादानी है।
- सामाजिक व्यवस्था में संतुलन: इस आयत से यह भी शिक्षा मिलती है कि समाज में धन का उचित वितरण और अधीनस्थों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। इस्लाम दासों के साथ अच्छे व्यवहार और उनकी आज़ादी को प्रोत्साहित करता है।
- अल्लाह की महानता का अहसास: जब हम अपने जीवन में अल्लाह की नेमतों को देखते हैं — चाहे वह छोटी हों या बड़ी — तो हमारा दिल उसकी महानता और कृपा के आगे झुक जाता है, और हम उसकी इबादत में सच्चे हो जाते हैं।
📜 आयत 69-73 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 71
सूरा अन-नहल आयत 71 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ही ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर…सूरा आयत 71/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 69–73. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








