Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَزْوَاجًا: पत्नियाँ, जीवनसाथी।
- بَنِينَ: बेटे, संतान।
- حَفَدَةً: पोते-पोतियाँ और सेवा करने वाले सहायक; यह भी कहा गया है कि इसका अर्थ है वे लोग जो किसी की सेवा में तत्पर रहते हैं और उसकी मदद करते हैं।
- الطَّيِّبَاتِ: पवित्र और अच्छी चीज़ें, जैसे अनाज, फल, मांस आदि।
- الْبَاطِلِ: झूठ, असत्य; यहाँ अर्थ है मूर्तियाँ और झूठे देवता।
- نِعْمَتِ اللّهِ: अल्लाह की नेमतें (उपकार)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर अपनी असीम कृपा और दया का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जाति (इंसानों) में से पत्नियाँ बनाईं, ताकि तुम उनके साथ सुकून और चैन पाओ, और उनके साथ मोहब्बत और रहमत का रिश्ता क़ायम हो। फिर उसी ने तुम्हारी पत्नियों से तुम्हें बेटे और पोते-पोतियाँ (और सहायक) अता किए, जो तुम्हारी आँखों की ठंडक और तुम्हारे लिए मददगार होते हैं। इसके अलावा, उसने तुम्हें पाक और अच्छी चीज़ें खाने को दीं — जैसे तरह-तरह के फल, अनाज, मांस और अन्य पवित्र खाद्य पदार्थ — ताकि तुम अपनी ज़िंदगी का आनंद उठा सको।
इतने बड़े एहसानों के बाद भी, क्या यह लोग झूठ और बातिल (मूर्तियों और झूठे देवताओं) पर ईमान लाते हैं? और अल्लाह की उन नेमतों का इनकार करते हैं जिन्हें वे गिन भी नहीं सकते? वे उस अल्लाह का शुक्र अदा नहीं करते जिसने उन्हें ये सब कुछ दिया, और न ही उसे अकेला पूजते हैं, बल्कि उसके साथ दूसरों को शरीक करते हैं। यह उनकी नासमझी और अत्यधिक कृतघ्नता की सबसे बड़ी निशानी है कि जब उन्होंने अल्लाह की स्पष्ट नेमतें देखीं, तो भी वे उसकी इबादत छोड़कर बेजान चीज़ों की पूजा करने लगे।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करना ईमान को मज़बूत करता है। जब इंसान देखता है कि उसकी पत्नी, बच्चे, और खाने-पीने की अच्छी चीज़ें — सब अल्लाह की देन हैं, तो उसका दिल अल्लाह की तरफ़ झुकता है और उसका शुक्र अदा करने की तरफ़ रागिब होता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल उसे अकेला पूजना और उसका आज्ञाकारी बनना है। नेमतें पाकर कृतघ्न होना और अल्लाह के सिवा किसी और की तरफ़ रुजू करना सबसे बड़ी नाक़द्री है।
- परिवार, संतान और अच्छी रोज़ी — ये अल्लाह की बड़ी नेमतें हैं। इनकी क़द्र करनी चाहिए और इन पर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए, क्योंकि शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं।
- यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो अल्लाह की नेमतों को भूलकर बातिल (झूठ) के पीछे चलते हैं — कि उनका अंजाम बुरा होगा, क्योंकि वे अल्लाह के सबसे बड़े एहसान का इनकार कर रहे हैं।
📜 आयत 70-74 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 72
सूरा अन-नहल आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ही ने तुम्हारे लिए बीबियाँ तुम ही में…सूरा आयत 72/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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