अन-नहल · 72/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَاجًا وَجَعَلَ لَكُم مِّنْ أَزْوَاجِكُم بَنِينَ وَحَفَدَةً وَرَزَقَكُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ ۚ أَفَبِالْبَاطِلِ يُؤْمِنُونَ وَبِنِعْمَتِ اللَّهِ هُمْ يَكْفُرُونَ ۝٧٢
Wallaahu ja`ala lakum min anfusikum azwaajanw wa ja`ala lakum min azwaajikum baneena wa hafadatanw wa razaqakum minat yaiyibaat; afabil baatili yu`minoona wa bini`matil laahi hum yakkfuroon
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे लिए बीबियाँ तुम ही में से बनाई और उसी ने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी बीवियों से बेटे और पोते पैदा किए और तुम्हें पाक व पाकीज़ा रोज़ी खाने को दी तो क्या ये लोग बिल्कुल बातिल (सुल्तान बुत वग़ैरह) पर ईमान रखते हैं और ख़ुदा की नेअमत (वहदानियत वग़ैरह से) इन्कार करते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَزْوَاجًا: पत्नियाँ, जीवनसाथी।
  • بَنِينَ: बेटे, संतान।
  • حَفَدَةً: पोते-पोतियाँ और सेवा करने वाले सहायक; यह भी कहा गया है कि इसका अर्थ है वे लोग जो किसी की सेवा में तत्पर रहते हैं और उसकी मदद करते हैं।
  • الطَّيِّبَاتِ: पवित्र और अच्छी चीज़ें, जैसे अनाज, फल, मांस आदि।
  • الْبَاطِلِ: झूठ, असत्य; यहाँ अर्थ है मूर्तियाँ और झूठे देवता।
  • نِعْمَتِ اللّهِ: अल्लाह की नेमतें (उपकार)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर अपनी असीम कृपा और दया का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जाति (इंसानों) में से पत्नियाँ बनाईं, ताकि तुम उनके साथ सुकून और चैन पाओ, और उनके साथ मोहब्बत और रहमत का रिश्ता क़ायम हो। फिर उसी ने तुम्हारी पत्नियों से तुम्हें बेटे और पोते-पोतियाँ (और सहायक) अता किए, जो तुम्हारी आँखों की ठंडक और तुम्हारे लिए मददगार होते हैं। इसके अलावा, उसने तुम्हें पाक और अच्छी चीज़ें खाने को दीं — जैसे तरह-तरह के फल, अनाज, मांस और अन्य पवित्र खाद्य पदार्थ — ताकि तुम अपनी ज़िंदगी का आनंद उठा सको।

इतने बड़े एहसानों के बाद भी, क्या यह लोग झूठ और बातिल (मूर्तियों और झूठे देवताओं) पर ईमान लाते हैं? और अल्लाह की उन नेमतों का इनकार करते हैं जिन्हें वे गिन भी नहीं सकते? वे उस अल्लाह का शुक्र अदा नहीं करते जिसने उन्हें ये सब कुछ दिया, और न ही उसे अकेला पूजते हैं, बल्कि उसके साथ दूसरों को शरीक करते हैं। यह उनकी नासमझी और अत्यधिक कृतघ्नता की सबसे बड़ी निशानी है कि जब उन्होंने अल्लाह की स्पष्ट नेमतें देखीं, तो भी वे उसकी इबादत छोड़कर बेजान चीज़ों की पूजा करने लगे।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करना ईमान को मज़बूत करता है। जब इंसान देखता है कि उसकी पत्नी, बच्चे, और खाने-पीने की अच्छी चीज़ें — सब अल्लाह की देन हैं, तो उसका दिल अल्लाह की तरफ़ झुकता है और उसका शुक्र अदा करने की तरफ़ रागिब होता है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल उसे अकेला पूजना और उसका आज्ञाकारी बनना है। नेमतें पाकर कृतघ्न होना और अल्लाह के सिवा किसी और की तरफ़ रुजू करना सबसे बड़ी नाक़द्री है।
  3. परिवार, संतान और अच्छी रोज़ी — ये अल्लाह की बड़ी नेमतें हैं। इनकी क़द्र करनी चाहिए और इन पर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए, क्योंकि शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं।
  4. यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो अल्लाह की नेमतों को भूलकर बातिल (झूठ) के पीछे चलते हैं — कि उनका अंजाम बुरा होगा, क्योंकि वे अल्लाह के सबसे बड़े एहसान का इनकार कर रहे हैं।


📜 आयत 70-74 — अन-नहल

70وَاللَّهُ خَلَقَكُمْ ثُمَّ يَتَوَفَّاكُمْ ۚ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْ لَا يَعْلَمَ بَعْدَ عِلْمٍ شَيْئًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ قَدِيرٌ
और ख़ुदा ही ने तुमको पैदा किया फिर वही तुमको (दुनिया से) उठा लेगा और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो ज़लील ज़िन्दगी (सख्त बुढ़ापे) की तरफ लौटाए जाते हैं (बहुत कुछ) जानने के बाद (ऐसे सड़ीले हो गए कि) कुछ नहीं जान सके बेशक ख़ुदा (सब कुछ) जानता और (हर तरह की) कुदरत रखता है
71وَاللَّهُ فَضَّلَ بَعْضَكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ فِي الرِّزْقِ ۚ فَمَا الَّذِينَ فُضِّلُوا بِرَادِّي رِزْقِهِمْ عَلَىٰ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَهُمْ فِيهِ سَوَاءٌ ۚ أَفَبِنِعْمَةِ اللَّهِ يَجْحَدُونَ
और ख़ुदा ही ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर रिज़क (दौलत में) तरजीह दी है फिर जिन लोगों को रोज़ी ज्यादा दी गई है वह लोग अपनी रोज़ी में से उन लोगों को जिन पर उनका दस्तरस (इख्तेयार) है (लौन्डी ग़ुलाम वग़ैरह) देने वाला नहीं (हालॉकि इस माल में तो सब के सब मालिक गुलाम वग़ैरह) बराबर हैं तो क्या ये लोग ख़ुदा की नेअमत के मुन्किर हैं
72وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَاجًا وَجَعَلَ لَكُم مِّنْ أَزْوَاجِكُم بَنِينَ وَحَفَدَةً وَرَزَقَكُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ ۚ أَفَبِالْبَاطِلِ يُؤْمِنُونَ وَبِنِعْمَتِ اللَّهِ هُمْ يَكْفُرُونَ
और ख़ुदा ही ने तुम्हारे लिए बीबियाँ तुम ही में से बनाई और उसी ने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी बीवियों से बेटे और पोते पैदा किए और तुम्हें पाक व पाकीज़ा रोज़ी खाने को दी तो क्या ये लोग बिल्कुल बातिल (सुल्तान बुत वग़ैरह) पर ईमान रखते हैं और ख़ुदा की नेअमत (वहदानियत वग़ैरह से) इन्कार करते हैं
73وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَمْلِكُ لَهُمْ رِزْقًا مِّنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ شَيْئًا وَلَا يَسْتَطِيعُونَ
और ख़ुदा को छोड़कर ऐसी चीज़ की परसतिश करते हैं जो आसमानों और ज़मीन में से उनको रिज़क़ देने का कुछ भी न एख्तियार रखते हैं और न कुदरत हासिल कर सकते हैं
74فَلَا تَضْرِبُوا لِلَّهِ الْأَمْثَالَ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
तो तुम (दुनिया के लोगों पर कयास करके ख़ुद) मिसालें न गढ़ो बेशक ख़ुदा (सब कुछ) जानता है और तुम नहीं जानते
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अनुवाद — अन-नहल 72

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सूरा आयत 72/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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