Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَلَا تَضْرِبُوا لِلَّهِ الْأَمْثَالَ: अल्लाह के लिए मिसालें मत बनाओ, यानी उसकी किसी से समानता मत जताओ।
- إِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ: निस्संदेह अल्लाह जानता है।
- وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ: और तुम नहीं जानते।
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला अपने बंदों को संबोधित करते हुए फरमाता है कि जब तुमने यह जान लिया कि ये मूर्तियाँ और देवता न तो कोई लाभ पहुँचा सकती हैं और न ही कोई हानि, तो अब अल्लाह के लिए मिसालें मत बनाओ। यानी उसकी मख़लूक़ात (सृष्टि) में से किसी को उसका समकक्ष या साझीदार मत ठहराओ, और न ही उसकी उपासना में किसी और को शामिल करो। अल्लाह की कोई समानता नहीं, कोई उसका जोड़ा नहीं, और न ही कोई उसके बराबर है। वह अपने सिफ़ात (गुणों) में जलाल और कमाल का मालिक है, जिसे वह अच्छी तरह जानता है, लेकिन तुम अपनी नासमझी और अज्ञानता के कारण उसकी मिसालें बनाते हो और उसे अपनी मूर्तियों के समान ठहराते हो। अल्लाह तआला हर चीज़ का ज्ञान रखता है, वह जानता है कि उसका कोई समकक्ष नहीं, जबकि तुम इस हक़ीक़त से बेख़बर हो। तुम अपनी ग़लती और उसके बुरे अंजाम से अनजान हो, इसलिए अपने इस शिर्क और ग़लत क़ियास से बाज़ आओ।
महत्वपूर्ण शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह तआला अपनी सृष्टि में किसी के समान नहीं है, और उसके लिए किसी भी प्रकार की मिसाल या समानता स्थापित करना शिर्क है, जो सबसे बड़ा पाप है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के बारे में केवल वही बात कहनी चाहिए जो उसने स्वयं अपने बारे में बताई है, और उसके नामों और गुणों में किसी को उसका साझी नहीं बनाना चाहिए।
- अल्लाह का ज्ञान असीमित है, जबकि इंसान का ज्ञान सीमित है। इसलिए हमें अपनी सीमित समझ के आधार पर अल्लाह के बारे में राय नहीं बनानी चाहिए, बल्कि उसकी वही तारीफ़ करनी चाहिए जो उसने खुद की है।
- यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) की पुख्ता नींव रखती है और इंसान को उसके रब की ओर लौटने की प्रेरणा देती है, क्योंकि सच्ची इबादत तो उसी की है जो सब कुछ जानता है और जिसका कोई समकक्ष नहीं।
- इस आयत में इंसान के लिए बड़ी नसीहत है कि वह अपने ज्ञान पर घमंड न करे, बल्कि अल्लाह के ज्ञान के आगे सर झुकाए और उसकी बताई हिदायत पर चले, ताकि दुनिया और आख़िरत में कामयाब हो सके।
📜 आयत 72-76 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 74
सूरा अन-नहल आयत 74 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम (दुनिया के लोगों पर कयास करके ख़ुद) मिसालें…सूरा आयत 74/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 72–76. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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