Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَعْبُدُونَ – वे पूजा करते हैं।
- مِن دُونِ اللَّهِ – अल्लाह को छोड़कर।
- لَا يَمْلِكُ – अधिकार नहीं रखते।
- رِزْقًا – आजीविका / रोज़ी।
- مِّنَ السَّمَاوَاتِ – आकाशों से (जैसे वर्षा)।
- وَالْأَرْضِ – और धरती से (जैसे फसलें, पेड़-पौधे)।
- شَيْئًا – कुछ भी (तनिक भी)।
- وَلَا يَسْتَطِيعُونَ – और वे (ये पूज्य) इस पर सक्षम नहीं हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मुशरिकों (बहुदेववादियों) की स्थिति को उजागर करती है जो अल्लाह को छोड़कर मूर्तियों और झूठे देवताओं की पूजा करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग उन चीज़ों की इबादत करते हैं जो न तो उन्हें आकाश से कोई रोज़ी दे सकती हैं — जैसे वर्षा, बारिश, रहमत — और न ही धरती से — जैसे फसलें, फल, पानी, खनिज आदि। वे इन पूज्यों के पास न तो कुछ भी है जो वे दें, और न ही वे इस पर कोई सामर्थ्य रखते हैं। ये मूर्तियाँ तो बेजान पत्थर या लकड़ी हैं, जिनमें न जीवन है, न ज्ञान, न शक्ति। वे न तो किसी को फ़ायदा पहुँचा सकती हैं और न नुक़सान। फिर ऐसे बेबस और लाचार प्राणियों को अल्लाह का भागीदार बनाना और उनकी पूजा करना कितनी बड़ी नादानी और गुमराही है? जबकि सच्चा रिज़्क़ देने वाला, पालनहार और सब कुछ करने पर क़ादिर (सक्षम) केवल अल्लाह ही है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- तौहीद (एकेश्वरवाद) की पुकार: यह आयत हमें सिखाती है कि रोज़ी देने वाला, पालने वाला और ज़रूरतें पूरी करने वाला केवल अल्लाह है। इसलिए उसी की इबादत करनी चाहिए, उसी से माँगना चाहिए और उसी पर भरोसा रखना चाहिए।
- बेकार की पूजा से बचाव: यह आयत हमें आगाह करती है कि जो चीज़ें हमें कोई लाभ नहीं पहुँचा सकतीं, उनके आगे सिर झुकाना और उनसे उम्मीदें बाँधना पूर्ण मूर्खता है। सच्ची कामयाबी उसी में है जो हम अपने रब की तरफ़ रुजू करें।
- अल्लाह की असीम दया और शक्ति: जब हम देखते हैं कि वर्षा, फसलें, भोजन, स्वास्थ्य — सब कुछ अल्लाह ही की तरफ़ से आता है, तो हमारा दिल उसके प्रति शुक्र और मोहब्बत से भर जाता है। यह हमें उसकी नेमतों का एहसास कराता है और उसके करीब लाता है।
- अक़्ल और दिल की पुकार: इस्लाम अक़्ल और फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) का धर्म है। यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या कोई समझदार इंसान उस मूर्ति की पूजा कर सकता है जो खुद किसी के काम नहीं आ सकती? यही वजह है कि इस्लाम हमें सच्चे ख़ालिक़ (रचयिता) की ओर ले जाता है, जो सब कुछ सुनता, देखता और कर सकता है।
📜 आयत 71-75 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 73
सूरा अन-नहल आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा को छोड़कर ऐसी चीज़ की परसतिश करते हैं…सूरा आयत 73/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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