अन-नहल · 86/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَإِذَا رَأَى الَّذِينَ أَشْرَكُوا شُرَكَاءَهُمْ قَالُوا رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ شُرَكَاؤُنَا الَّذِينَ كُنَّا نَدْعُو مِن دُونِكَ ۖ فَأَلْقَوْا إِلَيْهِمُ الْقَوْلَ إِنَّكُمْ لَكَاذِبُونَ ۝٨٦
Wa izaa ra al lazeena ashrakoo shurakaaa`ahum qaaloo Rabbana haaa`ulaaa`i shurakaaa`unal lazeena kunnaa nad`oo min doonika fa alqaw ilaihimul qawla innakum lakaaziboon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने दुनिया में ख़ुदा का शरीक (दूसरे को) ठहराया था जब अपने (उन) शरीकों को (क़यामत में) देखेंगे तो बोल उठेगें कि ऐ हमारे परवरदिगार यही तो हमारे शरीक हैं जिन्हें हम (मुसीबत) के वक्त तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे तो वह शरीक उन्हीं की तरफ बात को फेंक मारेगें कि तुम निरे झूठे हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شُرَكَاءَهُمْ: उनके साझीदार (जिन्हें वे ईश्वर का साझीदार मानकर पूजते थे)।
  • نَدْعُو: हम पुकारते थे / हम उन्हें पूजते थे।
  • فَأَلْقَوْا إِلَيْهِمُ الْقَوْلَ: तो वे (साझीदार) उनकी ओर बात फेंकेंगे, अर्थात उन्हें उत्तर देंगे।

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत उस भयानक दृश्य का वर्णन करती है जो क़ियामत के दिन मुशरिकों (ईश्वर का साझीदार ठहराने वालों) के सामने आएगा। जब वे अपने उन झूठे देवताओं को देखेंगे, जिन्हें उन्होंने अल्लाह के साथ साझीदार बनाकर पूजा था—चाहे वे मूर्तियाँ हों, सितारे हों, या कोई और चीज़—तो उस वक़्त उनकी सारी हिम्मत टूट चुकी होगी और वे अपनी बेबसी का इज़हार करते हुए कहेंगे: "ऐ हमारे रब! ये हैं हमारे साझीदार जिन्हें हम तुझे छोड़कर पुकारते और पूजते थे।" वे यह बात इसलिए कहेंगे ताकि अपना गुनाह उन देवताओं पर डाल दें और कहें कि इन्होंने ही हमें गुमराह किया।

लेकिन अल्लाह तआला उन मूर्तियों और झूठे देवताओं को बोलने की शक्ति देगा, और वे साफ़ शब्दों में मुशरिकों को जवाब देंगे: "तुम बिल्कुल झूठे हो!" यानी तुमने हमें अपनी मर्ज़ी से पूजा, हमने तुम्हें कभी नहीं बुलाया, न हमने तुमसे कहा कि हमें ईश्वर मानो। हम तो बेजान थे या मजबूर थे, तुम्हारी अपनी इच्छा और शैतान के बहकावे ने तुम्हें यह रास्ता दिखाया। इस तरह वे देवता खुद उन्हें झूठा ठहराएँगे और उनकी उम्मीदें टूट जाएँगी।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. सच्चाई का सामना अवश्य होगा: क़ियामत के दिन हर झूठ और हर धोखे का पर्दाफ़ाश होगा। जिन्हें लोग सच्चा मानते थे, वे भी उनके खिलाफ़ गवाही देंगे। इसलिए हमें सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करनी चाहिए, जो सच्चा मालिक और मददगार है।
  2. बहाने क़ुबूल नहीं होंगे: आज लोग अपनी ग़लतियों के लिए दूसरों को ज़िम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन उस दिन कोई बहाना काम नहीं आएगा। हर इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार खुद है।
  3. तौहीद (एकेश्वरवाद) की अहमियत: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाना कितना बड़ा नुक़सान है। जो लोग सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करते हैं, वे उस दिन सुरक्षित होंगे, जबकि मुशरिकों को अपने देवताओं से भी धोखा मिलेगा।
  4. क़ुरआन की सच्चाई: यह वर्णन हमें बताता है कि क़ुरआन सच्चा है और उसकी हर ख़बर पूरी होने वाली है। इस पर यक़ीन करके हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह पर चलाएँ, ताकि उस दिन हमारा सामना खुशी से हो, न कि पछतावे के साथ।


📜 आयत 84-88 — सूरा अन-नहल

84وَيَوْمَ نَبْعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا ثُمَّ لَا يُؤْذَنُ لِلَّذِينَ كَفَرُوا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा
85وَإِذَا رَأَى الَّذِينَ ظَلَمُوا الْعَذَابَ فَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمْ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
और जिन लोगों ने (दुनिया में) शरारतें की थी जब वह अज़ाब को देख लेगें तो उनके अज़ाब ही में तख़फ़ीफ़ की जाएगी और न उनको मोहलत ही दी जाएगी
86وَإِذَا رَأَى الَّذِينَ أَشْرَكُوا شُرَكَاءَهُمْ قَالُوا رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ شُرَكَاؤُنَا الَّذِينَ كُنَّا نَدْعُو مِن دُونِكَ ۖ فَأَلْقَوْا إِلَيْهِمُ الْقَوْلَ إِنَّكُمْ لَكَاذِبُونَ
और जिन लोगों ने दुनिया में ख़ुदा का शरीक (दूसरे को) ठहराया था जब अपने (उन) शरीकों को (क़यामत में) देखेंगे तो बोल उठेगें कि ऐ हमारे परवरदिगार यही तो हमारे शरीक हैं जिन्हें हम (मुसीबत) के वक्त तुझे छोड़ कर पुकारा करते थे तो वह शरीक उन्हीं की तरफ बात को फेंक मारेगें कि तुम निरे झूठे हो
87وَأَلْقَوْا إِلَى اللَّهِ يَوْمَئِذٍ السَّلَمَ ۖ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
और उस दिन ख़ुदा के सामने सर झुका देंगे और जो इफ़तेरा परदाज़ियाँ दुनिया में किया करते थे उनसे गायब हो जाएँगें
88الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ زِدْنَاهُمْ عَذَابًا فَوْقَ الْعَذَابِ بِمَا كَانُوا يُفْسِدُونَ
जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया और लोगों को ख़ुदा की राह से रोका उनके फ़साद वाले कामों के बदले में उनके लिए हम अज़ाब पर अज़ाब बढ़ाते जाएँगें
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
86आयत

अनुवाद — अन-नहल 86

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Thursday, October 1, 2026

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