अन-नहल · 99/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
إِنَّهُ لَيْسَ لَهُ سُلْطَانٌ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ ۝٩٩
Innahoo laisa lahoo sultaanun `alal lazeena aamanoo wa `alaa Rabbihim yatawakkaloon
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक नहीं कि जो लोग ईमानदार हैं और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं उन पर उसका क़ाबू नहीं चलता

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُلْطَانٌ: अधिकार, प्रभुत्व, नियंत्रण या ताकत।
  • يَتَوَكَّلُونَ: वे भरोसा करते हैं, अपने सारे मामलों में अल्लाह पर निर्भर रहते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत शैतान की सीमाओं और उसकी कमज़ोरी को स्पष्ट करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि शैतान का उन लोगों पर कोई अधिकार या नियंत्रण नहीं है जो सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए हैं। उनका विश्वास इतना मज़बूत होता है कि वे अपने जीवन के हर मामले में अकेले अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उसी की ओर रुजू करते हैं और उसी से मदद माँगते हैं। ऐसे लोग शैतान के बहकावे, वसवसों और धोखों से महफूज़ रहते हैं, क्योंकि उनका दिल अल्लाह की याद से जुड़ा होता है और वे उसकी पनाह में होते हैं। शैतान की पहुँच केवल उन लोगों तक होती है जो उसे अपना साथी बनाते हैं, उसकी बात मानते हैं और उसके कहने पर चलते हैं। ये लोग अपनी इस आज्ञाकारिता की वजह से अल्लाह के साथ शिर्क करने वाले बन जाते हैं, क्योंकि वे शैतान की इबादत (आज्ञा पालन) को अल्लाह की इबादत पर तरजीह देते हैं। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, वे शैतान के वसवसों को क़बूल नहीं करते, न उसके हुक्म मानते हैं, और अल्लाह से पनाह माँगने के कारण शैतान उन पर कोई असर नहीं डाल पाता।

फ़ायदे (सबक़):

  1. ईमान की ताक़त: यह आयत हमें बताती है कि सच्चा ईमान और अल्लाह पर भरोसा इंसान को शैतान के हर हमले से बचाने की ताक़त रखता है। जितना ईमान मज़बूत होगा, शैतान का असर उतना ही कम होगा।
  2. तवक्कुल की अहमियत: अल्लाह पर भरोसा (तवक्कुल) हर मुसीबत और हर बुराई से बचने का सबसे बड़ा ज़रिया है। जब इंसान अपने मामले अल्लाह को सौंप देता है, तो अल्लाह उसकी हिफ़ाज़त करता है।
  3. शैतान की कमज़ोरी: शैतान ताकतवर नहीं है, बल्कि वह केवल उन्हीं पर असर डाल सकता है जो खुद उसकी तरफ़ झुकते हैं। यह जानकर हमें उससे डरना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह की पनाह माँगनी चाहिए।
  4. शिर्क से बचाव: यह आयत हमें शिर्क और शैतान की आज्ञा मानने से बचाती है, क्योंकि शैतान की पैरवी इंसान को शिर्क तक ले जाती है। सच्चा मोमिन हमेशा अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा को पेशे-नज़र रखता है।
  5. उम्मीद और खुशी: इस आयत से मोमिन को खुशी और उम्मीद मिलती है कि अगर वह अल्लाह पर भरोसा करे, तो शैतान की सारी साज़िशें नाकाम हो जाएँगी और वह अल्लाह की हिफ़ाज़त में महफूज़ रहेगा।


📜 आयत 97-101 — अन-नहल

97مَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَنُحْيِيَنَّهُ حَيَاةً طَيِّبَةً ۖ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें
98فَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
और जब तुम क़ुरान पढ़ने लगो तो शैतान मरदूद (के वसवसो) से ख़ुदा की पनाह तलब कर लिया करो
99إِنَّهُ لَيْسَ لَهُ سُلْطَانٌ عَلَى الَّذِينَ آمَنُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
इसमें शक नहीं कि जो लोग ईमानदार हैं और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं उन पर उसका क़ाबू नहीं चलता
100إِنَّمَا سُلْطَانُهُ عَلَى الَّذِينَ يَتَوَلَّوْنَهُ وَالَّذِينَ هُم بِهِ مُشْرِكُونَ
उसका क़ाबू चलता है तो बस उन्हीं लोगों पर जो उसको दोस्त बनाते हैं और जो लोग उसको ख़ुदा का शरीक बनाते हैं
101وَإِذَا بَدَّلْنَا آيَةً مَّكَانَ آيَةٍ ۙ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُنَزِّلُ قَالُوا إِنَّمَا أَنتَ مُفْتَرٍ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और (ऐ रसूल) हम जब एक आयत के बदले दूसरी आयत नाज़िल करते हैं तो हालॉकि ख़ुदा जो चीज़ नाज़िल करता है उस (की मसलहतों) से खूब वाक़िफ है मगर ये लोग (तुम को) कहने लगते हैं कि तुम बस बिल्कुल मुज़तरी (ग़लत बयान करने वाले) हो बल्कि खुद उनमें के बहुतेरे (मसालेह को) नहीं जानते
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Tuesday, August 18, 2026

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