अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تِسْعَ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ – नौ स्पष्ट निशानियाँ (चमत्कार)
- مَسْحُورًا – जादू किया हुआ, जिसकी बुद्धि पर जादू का असर हो
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को नौ स्पष्ट और प्रत्यक्ष चमत्कार प्रदान किए थे, जो उनकी सच्चाई और नबुव्वत के प्रमाण थे। ये चमत्कार थे: (1) लाठी का साँप बनना, (2) हाथ का चमकना (यद-ए-बैज़ा), (3) अकाल और फसलों की कमी के वर्ष, (4) तूफ़ान (तूफान), (5) टिड्डियों का प्रकोप, (6) क़ुम्मल (जूँ या छोटे कीड़े), (7) मेंढक, (8) खून (पानी का खून बन जाना), और (9) समुद्र का चीरकर रास्ता बनाना (जैसा कि कुछ विद्वानों ने इसे शामिल किया है)। ये सभी निशानियाँ इसराइल की संतान के सामने प्रकट हुईं, ताकि वे मूसा (अलैहिस्सलाम) की सच्चाई को समझ सकें।
अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से कहा कि आप बनी इसराइल से पूछें – उन लोगों से जो ईमान लाए थे, जैसे अब्दुल्लाह बिन सलाम (रज़ियल्लाहु अन्हु) और उनके साथी – कि जब मूसा (अलैहिस्सलाम) उनके पूर्वजों के पास ये स्पष्ट निशानियाँ लेकर आए थे, तो क्या हुआ था? यह प्रश्न उन लोगों के सामने प्रमाण के रूप में है जो इन चमत्कारों को नहीं मानते।
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के सामने ये चमत्कार पेश किए, तो फ़िरऔन ने अपनी हठधर्मिता और अहंकार के कारण उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा: "हे मूसा! मैं तुम्हें एक जादू किया हुआ व्यक्ति समझता हूँ" – यानी उसने यह आरोप लगाया कि मूसा पर जादू कर दिया गया है, जिससे उनकी बुद्धि भ्रमित हो गई है और वे जो कुछ भी कर रहे हैं, वह सामान्य बुद्धि का परिणाम नहीं है।
यह फ़िरऔन की अत्यधिक ज़िद और सत्य के प्रति अंधेपन का प्रमाण है। उसने स्पष्ट चमत्कारों को देखकर भी उन्हें जादू और भ्रम कहा, क्योंकि उसका दिल सत्य को स्वीकार करने से इनकार कर चुका था।
शिक्षा और उपदेश:
यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को स्वीकार करने के लिए खुला दिल और नेक इरादा आवश्यक है। जिस व्यक्ति का दिल अहंकार और हठ से भरा हो, वह सबसे स्पष्ट प्रमाणों को भी देखकर इनकार कर देता है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को सत्य के लिए खुला रखें और अल्लाह की निशानियों पर विचार करें। जब अल्लाह की ओर से स्पष्ट मार्गदर्शन आए, तो उसे तुरंत स्वीकार कर लें, क्योंकि यही सफलता का मार्ग है। अल्लाह तआला ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को जो चमत्कार दिए, वे उनकी सच्चाई के प्रमाण थे, और इसी तरह हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का सबसे बड़ा चमत्कार यह कुरआन है जो आज तक जीवित है। हमें इस पर ईमान लाना चाहिए और इसके अनुसार अपना जीवन बनाना चाहिए।
📜 आयत 99-103 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 101
सूरा अल-इसरा आयत 101 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने यक़ीनन मूसा को खुले हुए नौ मौजिज़े अता…सूरा आयत 101/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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