अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَزَائِنَ رَحْمَةِ رَبِّي: मेरे रब की रहमत (दया और रोज़ी) के ख़ज़ाने।
- لَأَمْسَكْتُمْ: तुम रोक लेते, कंजूसी करते।
- خَشْيَةَ الْإِنفَاقِ: ख़र्च करने के डर से (कि कहीं ख़त्म न हो जाए)।
- قَتُورًا: बहुत कंजूस, तंगदिल, जो ख़र्च न करे।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि अगर उन्हें मेरे रब की रहमत के ख़ज़ाने मिल जाते — जो कभी ख़त्म नहीं होते और कभी समाप्त नहीं होते — तो भी वे उन्हें ख़र्च करने से डरते और उन्हें रोक लेते। उन्हें यह डर होता कि कहीं ख़र्च करने से ये ख़ज़ाने ख़त्म न हो जाएँ और वे मोहताज न बन जाएँ। यह इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) है कि वह कंजूस और तंगदिल होता है, जो कुछ उसके पास है उसे ख़र्च करने में हिचकिचाता है — सिवाय उस इंसान के जिसे अल्लाह ने ईमान की दौलत से बचा लिया हो। ईमानवाला अल्लाह के वादे पर भरोसा करता है, उसे यक़ीन होता है कि रिज़्क़ अल्लाह के हाथ में है, इसलिए वह ख़र्च करने में कंजूसी नहीं करता और अल्लाह के फज़ल (कृपा) से उसे अच्छा बदला मिलने की उम्मीद रखता है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि कंजूसी और तंगदिली इंसान की कमज़ोरी है, लेकिन ईमान इंसान को इस कमज़ोरी से पाक कर देता है। जब इंसान यक़ीन कर लेता है कि असली मालिक अल्लाह है और रिज़्क़ उसी के पास है, तो उसका दिल खुल जाता है और वह अल्लाह की राह में ख़र्च करने से नहीं डरता। अल्लाह ने हमें जो दिया है वह उसकी रहमत का एक छोटा सा हिस्सा है, और उसके ख़ज़ाने कभी ख़त्म नहीं होते। जो इंसान अल्लाह की राह में ख़र्च करता है, अल्लाह उसे और देता है, और जो रोकता है, वह सिर्फ़ अपने आपको महरूम करता है। आओ हम अपने दिलों को कंजूसी की गंदगी से पाक करें और अल्लाह की रहमत पर भरोसा करते हुए खुले दिल से ख़र्च करें — यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 98-102 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 100
सूरा अल-इसरा आयत 100 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) इनसे कहो कि अगर मेरे परवरदिगार के रहमत…सूरा आयत 100/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 98–102. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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