अनुवाद — Tafsir
### معاني الكلمات
- لَا تَقْفُ: अर्थात् पीछे मत चलो, अर्थात् उस चीज़ का अनुसरण मत करो या उसे मत कहो।
- مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ: जिसका तुम्हें ज्ञान न हो, अर्थात् बिना सत्यता की जाँच-पड़ताल के किसी बात को मत अपनाओ या मत बोलो।
- السَّمْعَ وَالْبَصَرَ وَالْفُؤَادَ: कान, आँख और दिल (ये तीनों इंसान के ज्ञान और समझ के मुख्य साधन हैं)।
- مَسْئُولًا: पूछा जाने वाला, जवाबदेह।
### تفسير الآية
अल्लाह तआला इस आयत में इंसान को एक बहुत बड़ा और अहम निर्देश देता है कि वह किसी भी ऐसी चीज़ के पीछे न पड़े या उसे न कहे जिसका उसे ज्ञान न हो। यानी जो बात सुनी न हो उसे "मैंने सुना" न कहे, जो चीज़ देखी न हो उसे "मैंने देखा" न कहे, और जिस बात का उसे यक़ीन न हो उसे "मैं जानता हूँ" न कहे। यह आदेश इंसान को अफवाहों, झूठी गवाही, बुरे गुमान और बिना सोचे-समझे फैसले करने से रोकता है।
फिर अल्लाह तआला इसका कारण बताता है कि क़यामत के दिन इंसान के कान, आँख और दिल — ये सब उसके किए हुए कामों के बारे में पूछे जाएँगे। अगर उसने इन्हें अच्छे कामों में इस्तेमाल किया, तो उसे इसका इनाम मिलेगा, और अगर बुरे कामों में इस्तेमाल किया, तो उसे सज़ा मिलेगी। कुछ मुफ़स्सिरों ने कहा है कि ये अंग ख़ुद गवाही देंगे कि उनसे क्या-क्या किया गया, और कुछ ने कहा है कि इंसान से उसके इन अंगों के इस्तेमाल के बारे में सवाल किया जाएगा। दोनों ही बातें सही हैं, क्योंकि अल्लाह के पास हर चीज़ का हिसाब है।
### فوائد
इस आयत से हमें कई अहम सबक़ मिलते हैं:
- सच्चाई और जाँच-पड़ताल की तालीम: हमें किसी भी बात को बिना सच्चाई की जाँच किए नहीं फैलाना चाहिए, चाहे वह अच्छी लगे या बुरी। यह इस्लाम का एक बुनियादी उसूल है कि इंसान हर काम में सच्चाई और स्पष्टता पर चले।
- ज़िम्मेदारी का एहसास: हमारे शरीर के हर अंग की हमसे पूछताछ होगी। यह एहसास हमें गुनाहों से दूर रखता है और नेक कामों की तरफ़ राग़िब करता है।
- अफवाहों से बचाव: आज के दौर में झूठी ख़बरें और अफवाहें बहुत फैलती हैं। यह आयत हमें सिखाती है कि हम सिर्फ़ सच और साबित शुदा बातों पर यक़ीन करें और उन्हें ही आगे बढ़ाएँ।
- दिल की पाकीज़गी: दिल को साफ़ रखना और बुरे ख़यालात से बचाना भी इस आयत का हिस्सा है, क्योंकि दिल की नीयत और इरादों का हिसाब भी होगा।
- इंसान की इज़्ज़त: यह आयत इंसान को एक ज़िम्मेदार और बालिग़ इंसान की तरह पेश आना सिखाती है, जो अपने हर काम और बात के लिए जवाबदेह है। यह उसे बुलंद अख़लाक़ और पाक रूह का मालिक बनाती है।
📜 आयत 34-38 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 36
सूरा अल-इसरा आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस चीज़ का कि तुम्हें यक़ीन न हो (ख्वाह…सूरा आयत 36/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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