अल-इसरा · 43/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يَقُولُونَ عُلُوًّا كَبِيرًا ۝٤٣
Subhaanahoo wa Ta`aalaa `ammaa yaqooloona `uluwwan kabeeraa
📖 हिंदी अर्थ
जो बेहूदा बातें ये लोग (ख़ुदा की निस्बत) कहा करते हैं वह उनसे बहुत बढ़के पाक व पाकीज़ा और बरतर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُبْحَانَهُ: वह पाक-पवित्र है, हर कमी और दोष से मुक्त है।
  • وَتَعَالَىٰ: और वह बुलंद और ऊंचा है।
  • عَمَّا يَقُولُونَ: उन बातों से जो (मुशरिकीन) कहते हैं।
  • عُلُوًّا كَبِيرًا: बहुत बड़ी बुलंदी और ऊंचाई के साथ।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी पाक ज़ात की तस्बीह (पवित्रता) बयान करते हुए फ़रमाता है कि वह हर उस बात से पाक और मुकद्दस है जो मुशरिकीन (बहुदेववादी) उसके बारे में कहते हैं। वे लोग अल्लाह के लिए औलाद, साझीदार, और मानवीय गुणों का दावा करते थे, जबकि अल्लाह इन सब चीज़ों से बिल्कुल पाक है। वह हर उस वर्णन से ऊंचा और बड़ा है जो उसकी शान के खिलाफ है। उसकी बुलंदी और ऊंचाई असीमित है, और वह उन सब बातों से बहुत दूर है जो ज़ालिम लोग उसके बारे में कहते हैं। यहाँ "عُلُوًّا كَبِيرًا" (बहुत बड़ी बुलंदी) का ज़िक्र इसलिए किया गया है ताकि यह स्पष्ट हो जाए कि अल्लाह की पाकी और बुलंदी किसी भी तरह के शिर्क या झूठे वर्णन से प्रभावित नहीं होती, बल्कि वह हमेशा से इन सब चीज़ों से पाक और मुकद्दस रहा है और रहेगा।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. अल्लाह की पाकी का एहसास: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ज़ात हर उस चीज़ से पाक है जो उसकी शान के खिलाफ है। हमें अपने अक़ीदे (विश्वास) को हमेशा शिर्क और झूठे विचारों से पाक रखना चाहिए।
  2. अल्लाह की बुलंदी पर भरोसा: जब हमें पता चलता है कि अल्लाह हर बुरी बात से ऊंचा है, तो हमारा दिल उस पर भरोसा करता है और हमें यकीन होता है कि उसकी तौहीद (एकता) कभी कमज़ोर नहीं पड़ सकती।
  3. बुरी बातों से दूरी: यह आयत हमें सिखाती है कि जिस तरह अल्लाह बुरी बातों से पाक है, हमें भी अपनी ज़ुबान और अक़ीदे को झूठ, बुराई और शिर्क से पाक रखना चाहिए।
  4. अल्लाह की अज़मत का एहसास: इस आयत से हमें अल्लाह की अज़मत (महानता) का एहसास होता है, जो हमें उसके सामने झुकने और उसकी इबादत करने की तरफ ले जाता है। यह हमारे ईमान को मज़बूत करता है और हमें अच्छे कामों की तरफ प्रेरित करता है।


📜 आयत 41-45 — सूरा अल-इसरा

41وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ لِيَذَّكَّرُوا وَمَا يَزِيدُهُمْ إِلَّا نُفُورًا
और हमने तो इसी क़ुरान में तरह तरह से बयान कर दिया ताकि लोग किसी तरह समझें मगर उससे तो उनकी नफरत ही बढ़ती गई
42قُل لَّوْ كَانَ مَعَهُ آلِهَةٌ كَمَا يَقُولُونَ إِذًا لَّابْتَغَوْا إِلَىٰ ذِي الْعَرْشِ سَبِيلًا
(ऐ रसूल उनसे) तुम कह दो कि अगर ख़ुदा के साथ जैसा ये लोग कहते हैं और माबूद भी होते तो अब तक उन माबूदों ने अर्श तक (पहुँचाने की कोई न कोई राह निकाल ली होती
43سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يَقُولُونَ عُلُوًّا كَبِيرًا
जो बेहूदा बातें ये लोग (ख़ुदा की निस्बत) कहा करते हैं वह उनसे बहुत बढ़के पाक व पाकीज़ा और बरतर है
44تُسَبِّحُ لَهُ السَّمَاوَاتُ السَّبْعُ وَالْأَرْضُ وَمَن فِيهِنَّ ۚ وَإِن مِّن شَيْءٍ إِلَّا يُسَبِّحُ بِحَمْدِهِ وَلَٰكِن لَّا تَفْقَهُونَ تَسْبِيحَهُمْ ۗ إِنَّهُ كَانَ حَلِيمًا غَفُورًا
सातों आसमान और ज़मीन और जो लोग इनमें (सब) उसकी तस्बीह करते हैं और (सारे जहाँन) में कोई चीज़ ऐसी नहीं जो उसकी (हम्द व सना) की तस्बीह न करती हो मगर तुम लोग उनकी तस्बीह नहीं समझते इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा बुर्दबार बख्शने वाला है
45وَإِذَا قَرَأْتَ الْقُرْآنَ جَعَلْنَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ حِجَابًا مَّسْتُورًا
और जब तुम क़ुरान पढ़ते हो तो हम तुम्हारे और उन लोगों के दरमियान जो आख़िरत का यक़ीन नहीं रखते एक गहरा पर्दा डाल देते हैं
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अनुवाद — अल-इसरा 43

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Saturday, October 3, 2026

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