Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَضَرَبْنَا عَلَىٰ آذَانِهِمْ: हमने उनके कानों पर (सुनने की शक्ति) को बंद कर दिया, अर्थात उन्हें गहरी नींद सुला दिया।
- سِنِينَ عَدَدًا: गिनती की हुई कई वर्षों तक।
तफसीर:
इस आयत में अल्लाह तआला उन नौजवानों (असहाबे कह्फ) का ज़िक्र कर रहे हैं, जो अपने ईमान की हिफाज़त के लिए अपनी क़ौम से अलग होकर एक गुफा (कह्फ) में पनाह ले चुके थे। जब वे उस गुफा में दाखिल हुए, तो अल्लाह ने उन पर गहरी नींद डाल दी — इतनी गहरी कि उनके कानों पर परदा डाल दिया गया, ताकि बाहरी आवाज़ें उन्हें न जगा सकें। यह नींद कई वर्षों तक जारी रही, जिनकी गिनती अल्लाह के इल्म में थी।
यहाँ कानों का विशेष रूप से ज़िक्र इसलिए किया गया है, क्योंकि नींद में इंसान की आँखें बंद हो जाती हैं, लेकिन कान खुले रहते हैं और आवाज़ सुनते रहते हैं। जब तक कान सुनता रहे, नींद पूरी नहीं होती और कोई भी आवाज़ इंसान को जगा सकती है। अल्लाह ने उनके कानों पर परदा डालकर उनकी नींद को मुकम्मल कर दिया, ताकि वे उस अवधि में किसी भी चीज़ से बेखबर रहें।
यह अल्लाह की कुदरत का एक अज़ीम नमूना है — वह जिसे चाहता है सुला देता है और जिसे चाहता है जगा देता है। यह घटना हमें सिखाती है कि जब इंसान अल्लाह की राह में अपना घर-बार, रिश्तेदार और आराम छोड़ देता है, तो अल्लाह उसे अपनी पनाह में ले लेता है और उसकी हिफाज़त का इंतज़ाम खुद करता है। यह नींद उनके लिए रहमत थी, जिसने उन्हें उस फितने (परीक्षा) से बचाए रखा जो उनकी क़ौम में जारी था।
इससे हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह पर भरोसा करने वालों की हिफाज़त अल्लाह खुद करता है। जब हम अपने दीन की खातिर किसी क़ुर्बानी के लिए तैयार होते हैं, तो अल्लाह हमारे लिए ऐसे रास्ते खोलता है जिनका हमने सोचा भी नहीं होता। यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि अल्लाह की तदबीर (योजना) इंसान की तदबीर से कहीं बेहतर है — वे नौजवान सिर्फ अल्लाह की पनाह चाहते थे, और अल्लाह ने उन्हें सालों की नींद में भी अपनी हिफाज़त में रखा।
यह आयत हमारे दिलों में अल्लाह की अज़मत और कुदरत का एहसास पैदा करती है, और हमें सिखाती है कि इस दुनिया में हर मुश्किल के पीछे अल्लाह की रहमत छिपी होती है। हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी राह में किसी भी क़ुर्बानी से पीछे न हटें, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
📜 आयत 9-13 — सूरा अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 11
सूरा अल-कहफ आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तब हमने कई बरस तक ग़ार में उनके कानों पर…सूरा आयत 11/110 — सूरा अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-कहफ सुनें, सूरा अल-कहफ अनुवाद, सूरा अल-कहफ mp3, सूरा अल-कहफ pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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