अल-कहफ · 11/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
فَضَرَبْنَا عَلَىٰ آذَانِهِمْ فِي الْكَهْفِ سِنِينَ عَدَدًا ۝١١
Fadarabnaa `alaaa aazaanihim fil Kahfi seneena `adadaa
📖 हिंदी अर्थ
तब हमने कई बरस तक ग़ार में उनके कानों पर पर्दे डाल दिए (उन्हें सुला दिया)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَضَرَبْنَا عَلَىٰ آذَانِهِمْ: हमने उनके कानों पर (सुनने की शक्ति) को बंद कर दिया, अर्थात उन्हें गहरी नींद सुला दिया।
  • سِنِينَ عَدَدًا: गिनती की हुई कई वर्षों तक।

तफसीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उन नौजवानों (असहाबे कह्फ) का ज़िक्र कर रहे हैं, जो अपने ईमान की हिफाज़त के लिए अपनी क़ौम से अलग होकर एक गुफा (कह्फ) में पनाह ले चुके थे। जब वे उस गुफा में दाखिल हुए, तो अल्लाह ने उन पर गहरी नींद डाल दी — इतनी गहरी कि उनके कानों पर परदा डाल दिया गया, ताकि बाहरी आवाज़ें उन्हें न जगा सकें। यह नींद कई वर्षों तक जारी रही, जिनकी गिनती अल्लाह के इल्म में थी।

यहाँ कानों का विशेष रूप से ज़िक्र इसलिए किया गया है, क्योंकि नींद में इंसान की आँखें बंद हो जाती हैं, लेकिन कान खुले रहते हैं और आवाज़ सुनते रहते हैं। जब तक कान सुनता रहे, नींद पूरी नहीं होती और कोई भी आवाज़ इंसान को जगा सकती है। अल्लाह ने उनके कानों पर परदा डालकर उनकी नींद को मुकम्मल कर दिया, ताकि वे उस अवधि में किसी भी चीज़ से बेखबर रहें।

यह अल्लाह की कुदरत का एक अज़ीम नमूना है — वह जिसे चाहता है सुला देता है और जिसे चाहता है जगा देता है। यह घटना हमें सिखाती है कि जब इंसान अल्लाह की राह में अपना घर-बार, रिश्तेदार और आराम छोड़ देता है, तो अल्लाह उसे अपनी पनाह में ले लेता है और उसकी हिफाज़त का इंतज़ाम खुद करता है। यह नींद उनके लिए रहमत थी, जिसने उन्हें उस फितने (परीक्षा) से बचाए रखा जो उनकी क़ौम में जारी था।

इससे हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह पर भरोसा करने वालों की हिफाज़त अल्लाह खुद करता है। जब हम अपने दीन की खातिर किसी क़ुर्बानी के लिए तैयार होते हैं, तो अल्लाह हमारे लिए ऐसे रास्ते खोलता है जिनका हमने सोचा भी नहीं होता। यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि अल्लाह की तदबीर (योजना) इंसान की तदबीर से कहीं बेहतर है — वे नौजवान सिर्फ अल्लाह की पनाह चाहते थे, और अल्लाह ने उन्हें सालों की नींद में भी अपनी हिफाज़त में रखा।

यह आयत हमारे दिलों में अल्लाह की अज़मत और कुदरत का एहसास पैदा करती है, और हमें सिखाती है कि इस दुनिया में हर मुश्किल के पीछे अल्लाह की रहमत छिपी होती है। हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी राह में किसी भी क़ुर्बानी से पीछे न हटें, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — अल-कहफ

9أَمْ حَسِبْتَ أَنَّ أَصْحَابَ الْكَهْفِ وَالرَّقِيمِ كَانُوا مِنْ آيَاتِنَا عَجَبًا
(ऐ रसूल) क्या तुम ये ख्याल करते हो कि असहाब कहफ व रक़ीम (खोह) और (तख्ती वाले) हमारी (क़ुदरत की) निशानियों में से एक अजीब (निशानी) थे
10إِذْ أَوَى الْفِتْيَةُ إِلَى الْكَهْفِ فَقَالُوا رَبَّنَا آتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا
कि एक बारगी कुछ जवान ग़ार में आ पहुँचे और दुआ की-ऐ हमारे परवरदिगार हमें अपनी बारगाह से रहमत अता फरमा-और हमारे वास्ते हमारे काम में कामयाबी इनायत कर
11فَضَرَبْنَا عَلَىٰ آذَانِهِمْ فِي الْكَهْفِ سِنِينَ عَدَدًا
तब हमने कई बरस तक ग़ार में उनके कानों पर पर्दे डाल दिए (उन्हें सुला दिया)
12ثُمَّ بَعَثْنَاهُمْ لِنَعْلَمَ أَيُّ الْحِزْبَيْنِ أَحْصَىٰ لِمَا لَبِثُوا أَمَدًا
फिर हमने उन्हें चौकाया ताकि हम देखें कि दो गिरोहों में से किसी को (ग़ार में) ठहरने की मुद्दत खूब याद है
13نَّحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ نَبَأَهُم بِالْحَقِّ ۚ إِنَّهُمْ فِتْيَةٌ آمَنُوا بِرَبِّهِمْ وَزِدْنَاهُمْ هُدًى
(ऐ रसूल) अब हम उनका हाल तुमसे बिल्कुल ठीक तहक़ीक़ातन (यक़ीन के साथ) बयान करते हैं वह चन्द जवान थे कि अपने (सच्चे) परवरदिगार पर ईमान लाए थे और हम ने उनकी सोच समझ और ज्यादा कर दी है
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अनुवाद — अल-कहफ 11

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Tuesday, August 18, 2026

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