अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- دَكَّاء: समतल, ज़मीन के बराबर कर देना, चूर-चूर करके मिट्टी में मिला देना।
- وَعْدُ رَبِّي: मेरे रब का वादा, यानी क़यामत से पहले या'जूज और मा'जूज के निकलने का वादा।
- حَقًّا: सत्य, अटल, जिसमें कोई संदेह न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब ज़ुल-क़रनैन ने यह मज़बूत दीवार (सद) बना ली, जो या'जूज और मा'जूज की तबाही से लोगों को बचाने के लिए थी, तो उन्होंने अत्यंत विनम्रता और अल्लाह के प्रति कृतज्ञता के भाव से कहा: "यह सब कुछ मेरे रब की रहमत है।" यानी यह दीवार, यह ताक़त, यह सामर्थ्य — सब कुछ अल्लाह की ओर से है। मैंने यह अपनी ताक़त से नहीं बनाया, बल्कि अल्लाह ने मुझे यह सामर्थ्य दी और यह उसकी असीम दया है जो उसने मुझ पर और तुम सब पर की है। इस दीवार की बरकत से या'जूज और मा'जूज अब तक निकल नहीं पाए और लोग उनके फ़साद से महफ़ूज़ हैं।
फिर ज़ुल-क़रनैन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह दीवार हमेशा नहीं रहेगी। जब अल्लाह का वादा आएगा — यानी जब क़यामत की निशानियों में से एक निशानी के रूप में या'जूज और मा'जूज के निकलने का समय आएगा — तो अल्लाह इस दीवार को ज़मीन के बराबर कर देगा, उसे चूर-चूर करके मिट्टी में मिला देगा। यह दीवार उस वक़्त किसी काम न आएगी, क्योंकि अल्लाह का फ़ैसला आ चुका होगा। और अल्लाह का वादा सत्य है, अटल है, उसमें कोई कमी नहीं हो सकती, न उसमें कोई बदलाव आ सकता है। जो अल्लाह ने ठान लिया, वह होकर रहेगा।
दावत और नसीहत (उपदेश):
यह आयत हमें कई अहम सबक़ सिखाती है। पहला सबक़ यह कि हर नेमत, हर ताक़त, हर कामयाबी अल्लाह की तरफ़ से है। इंसान को चाहिए कि वह अपनी कामयाबियों पर घमंड न करे, बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करे और उसकी रहमत को पहचाने। ज़ुल-क़रनैन जैसी अज़ीम ताक़त और सल्तनत पाने वाला बादशाह भी यही कहता है कि "यह मेरे रब की रहमत है" — तो हमें और कितना विनम्र होना चाहिए!
दूसरा सबक़ यह कि दुनिया की हर चीज़ फ़ानी है। यह दीवार कितनी मज़बूत थी, लेकिन अल्लाह के हुक्म से वह मिट्टी में मिल जाएगी। इसलिए हमें दुनिया की चीज़ों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए जो हमेशा रहने वाला है। हमारा दिल अल्लाह से जुड़ा होना चाहिए, न कि दुनिया की चीज़ों से।
तीसरा सबक़ यह कि अल्लाह का वादा सच्चा है। जैसे या'जूज और मा'जूज का निकलना सच है, वैसे ही क़यामत, जन्नत और जहन्नम भी सच हैं। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी इस तरह गुज़ारनी चाहिए कि हम अल्लाह के सामने पेश होने के लिए तैयार रहें। अल्लाह की रहमत का दामन थाम लें, उसकी इबादत करें, और उसके बताए हुए रास्ते पर चलें — यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 96-100 — अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 98
सूरा अल-कहफ आयत 98 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जुलक़रनैन ने (दीवार को देखकर) कहा ये मेरे परवरदिगार की…सूरा आयत 98/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 96–100. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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