Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَا أُخْتَ هَارُونَ: ऐ हारून की बहन! (यहाँ हारून से मुराद हज़रत हारून अलैहिस्सलाम हैं, जो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के भाई थे, या फिर एक नेक और परहेज़गार शख़्स का नाम हारून था।)
- مَا كَانَ أَبُوكِ امْرَأَ سَوْءٍ: तुम्हारे वालिद न तो कोई बुरे आदमी थे।
- وَمَا كَانَتْ أُمُّكِ بَغِيًّا: और न ही तुम्हारी वालिदा कोई बदकार (व्यभिचारिणी) औरत थीं।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मरियम अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम के लोगों के सामने अपने नवजात बच्चे (हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम) को गोद में लिए हुए आईं, तो उनकी क़ौम के लोगों ने उन्हें देखकर हैरानी और मलामत के अंदाज़ में कहा: "ऐ हारून की बहन!" यानी ऐ उस नेक और परहेज़गार इंसान की बहन, जो अपनी इबादत और अच्छाई के लिए मशहूर था। उन्होंने ये बात उनके ख़ानदान की पाकीज़गी और नेकी की तरफ़ इशारा करते हुए कही, क्योंकि हज़रत मरियम का ख़ानदान अपनी पाकदामनी और परहेज़गारी के लिए जाना जाता था।
फिर उन्होंने कहा: "न तो तुम्हारे वालिद कोई बुरे आदमी थे, और न ही तुम्हारी वालिदा कोई बदकार औरत थी।" यानी तुम्हारा ख़ानदान तो पाक और नेक था, तुम ख़ुद भी पाकदामन और परहेज़गार हो, फिर ये बच्चा तुम्हारे पास कहाँ से आ गया? उनका ये कहना था कि ऐसे पाक और नेक ख़ानदान की औरत से ऐसा काम कैसे सामने आ सकता है?
यहाँ "हारून" से मुराद या तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के भाई हज़रत हारून अलैहिस्सलाम हैं, क्योंकि हज़रत मरियम उन्हीं की क़ौम (बनी इसराईल) से थीं, और उनके ख़ानदान में ये नाम आम था। या फिर एक नेक और इबादतगुज़ार शख़्स का नाम हारून था, जिसकी निस्बत की वजह से हज़रत मरियम को "हारून की बहन" कहा गया। मक़सद ये था कि तुम्हारा ख़ानदान तो नेकी और पाकीज़गी का आईना था, फिर ये क्या माजरा है?
इस आयत से हमें ये सबक़ मिलता है कि इंसान का ख़ानदान और उसकी परवरिश उसकी पहचान होती है। नेक ख़ानदान की निस्बत इंसान के लिए एक ज़िम्मेदारी है कि वो उस नेकी को क़ायम रखे। और ये भी सबक़ मिलता है कि जब इंसान पर कोई इल्ज़ाम लगाया जाए, तो उसे सब्र और भरोसे के साथ अल्लाह पर तवक्कुल करना चाहिए, जैसा कि हज़रत मरियम ने किया और अल्लाह ने उनकी पाकीज़गी का एलान किया।
ये वाक़िया हमें बताता है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की इज़्ज़त ख़ुद करता है, और जो लोग अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुश्किल से निकालता है। हज़रत मरियम अलैहिस्सलाम की पाकदामनी और अल्लाह पर उनका भरोसा हमारे लिए एक बेहतरीन नमूना है।
📜 आयत 26-30 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 28
सूरा मरियम आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ हारून की बहन न तो तेरा बाप ही बुरा…सूरा आयत 28/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


