मरियम · 27/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
فَأَتَتْ بِهِ قَوْمَهَا تَحْمِلُهُ ۖ قَالُوا يَا مَرْيَمُ لَقَدْ جِئْتِ شَيْئًا فَرِيًّا ۝٢٧
Fa atat bihee qawmahaa tahmiluhoo qaaloo yaa Maryamoo laqad ji`ti shai`an fariyyaa
📖 हिंदी अर्थ
फिर मरियम उस लड़के को अपनी गोद में लिए हुए अपनी क़ौम के पास आयीं वह लोग देखकर कहने लगे ऐ मरियम तुमने तो यक़ीनन बहुत बुरा काम किया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَرِيًّا: अत्यंत बड़ा और गंभीर अपराध, जो कल्पना से परे हो। यह 'افتراء' (झूठा आरोप) से लिया गया है, जिसका अर्थ है ऐसा काम जो बिल्कुल असंभव और अनसुना हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मरियम (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के हुक्म से अपने बेटे ईसा (अलैहिस्सलाम) को जन्म दिया, तो वह उसे गोद में उठाकर अपनी क़ौम के पास ले आईं। वह दूर के इलाक़े से आई थीं, जहाँ उन्होंने अकेले में इस मामले का सामना किया था। जब उनकी क़ौम के लोगों ने उन्हें इस हालत में देखा, तो उन्हें बहुत अफसोस और हैरानी हुई, क्योंकि मरियम का खानदान नेक और पाकदामन था। वे समझ नहीं पा रहे थे कि यह कैसे हुआ। उन्होंने कहा: "ऐ मरियम! तुमने तो बहुत बड़ा और अजीब काम कर दिया, जो पहले कभी नहीं सुना गया।" यह बात उन्होंने इसलिए कही क्योंकि बिना पिता के बच्चे का जन्म उनके लिए नामुमकिन सा था, और वे इसे एक बड़ा झूठ और बुराई समझ रहे थे। लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम था कि अल्लाह की क़ुदरत हर चीज़ पर क़ाबू रखती है, और वह जो चाहता है, वही करता है।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इंसान अक्सर अल्लाह के फैसलों को अपनी अक्ल से नापने की कोशिश करता है, जबकि अल्लाह की क़ुदरत हर चीज़ से बड़ी है। मरियम (अलैहिस्सलाम) ने इस मुश्किल घड़ी में भी अल्लाह पर भरोसा रखा और चुप रहीं, क्योंकि उन्हें यकीन था कि अल्लाह ही उनकी मदद करेगा। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि जब हम पर मुसीबत आए, तो हमें अल्लाह की तरफ रुजू करना चाहिए, न कि लोगों की बातों से घबराना चाहिए। अल्लाह हर मुश्किल में रास्ता निकालता है, और जो लोग उस पर भरोसा करते हैं, उन्हें वह कभी अकेला नहीं छोड़ता। यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि नेक लोगों पर भी इल्ज़ाम लग सकते हैं, लेकिन सच्चाई और अल्लाह की मदद आखिरकार जीतती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 25-29 — मरियम

25وَهُزِّي إِلَيْكِ بِجِذْعِ النَّخْلَةِ تُسَاقِطْ عَلَيْكِ رُطَبًا جَنِيًّا
और खुरमे की जड़ (पकड़ कर) अपनी तरफ़ हिलाओ तुम पर पक्के-पक्के ताजे खुरमे झड़ पड़ेगें फिर (शौक़ से खुरमे) खाओ
26فَكُلِي وَاشْرَبِي وَقَرِّي عَيْنًا ۖ فَإِمَّا تَرَيِنَّ مِنَ الْبَشَرِ أَحَدًا فَقُولِي إِنِّي نَذَرْتُ لِلرَّحْمَٰنِ صَوْمًا فَلَنْ أُكَلِّمَ الْيَوْمَ إِنسِيًّا
और (चश्मे का पानी) पियो और (लड़के से) अपनी ऑंख ठन्डी करो फिर अगर तुम किसी आदमी को देखो (और वह तुमसे कुछ पूछे) तो तुम इशारे से कह देना कि मैंने खुदा के वास्ते रोजे क़ी नज़र की थी तो मैं आज हरगिज़ किसी से बात नहीं कर सकती
27فَأَتَتْ بِهِ قَوْمَهَا تَحْمِلُهُ ۖ قَالُوا يَا مَرْيَمُ لَقَدْ جِئْتِ شَيْئًا فَرِيًّا
फिर मरियम उस लड़के को अपनी गोद में लिए हुए अपनी क़ौम के पास आयीं वह लोग देखकर कहने लगे ऐ मरियम तुमने तो यक़ीनन बहुत बुरा काम किया
28يَا أُخْتَ هَارُونَ مَا كَانَ أَبُوكِ امْرَأَ سَوْءٍ وَمَا كَانَتْ أُمُّكِ بَغِيًّا
ऐ हारून की बहन न तो तेरा बाप ही बुरा आदमी था और न तो तेरी माँ ही बदकार थी (ये तूने क्या किया)
29فَأَشَارَتْ إِلَيْهِ ۖ قَالُوا كَيْفَ نُكَلِّمُ مَن كَانَ فِي الْمَهْدِ صَبِيًّا
तो मरियम ने उस लड़के की तरफ इशारा किया ( कि जो कुछ पूछना है इससे पूछ लो) और वह लोग बोले भला हम गोद के बच्चे से क्योंकर बात करें
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अनुवाद — मरियम 27

सूरा मरियम आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर मरियम उस लड़के को अपनी गोद में लिए हुए…

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Tuesday, August 18, 2026

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