Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَغْوًا: बेकार की बात, झूठ, गाली-गलौच या कोई ऐसी बात जिसमें कोई भलाई न हो।
- سَلَامًا: सलामती, शांति और एक-दूसरे को सलाम करना।
- بُكْرَةً وَعَشِيًّا: सुबह और शाम, यानी हर वक्त।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत मुक़द्दस क़ुरआन की सूरह मरियम की है, जिसमें अल्लाह तआला जन्नत के उन मुक़द्दस लोगों की ख़ुशहाल ज़िंदगी का ज़िक्र कर रहा है, जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत की और उसकी राह में नेक अमल किए। अल्लाह फ़रमाता है कि जन्नत के ये लोग वहाँ कभी कोई बेकार या बुरी बात नहीं सुनेंगे। वहाँ न कोई झूठ होगा, न गाली-गलौच, न कोई तकलीफ़ देने वाली बात। वहाँ की हर आवाज़ सलामती और मुहब्बत से भरी होगी — एक-दूसरे को सलाम करना, फ़रिश्तों का उन्हें सलाम कहना, और अल्लाह की तरफ़ से उन्हें सुकून और सलामती का पैग़ाम मिलना। यानी जन्नत का माहौल पूरी तरह पाक और पुरअमन होगा।
और उनके लिए वहाँ हर वक्त खाने-पीने का इंतज़ाम होगा। अल्लाह फ़रमाता है कि उनका रिज़्क़ (खाना-पीना) उन्हें सुबह और शाम मिलेगा। भले ही जन्नत में दिन-रात का कोई तसव्वुर नहीं, लेकिन ये अल्फ़ाज़ बताते हैं कि उन्हें हर वक्त, बिना किसी मेहनत और परेशानी के, जो चाहें मिलता रहेगा। यह उनकी इज़्ज़त और अल्लाह की तरफ़ से उनकी मेहमाननवाज़ी है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
ये आयत हमें जन्नत की उस नेमत की तरफ़ इशारा करती है जो हर मोमिन के दिल की धड़कन है। ज़रा सोचिए — एक ऐसी जगह जहाँ न कोई झगड़ा, न कोई बुरी बात, न कोई दुख, बल्कि हर तरफ़ सलामती और खुशी हो, और हर वक्त खाने-पीने की नेमतें मौजूद हों। ये अल्लाह का वादा है उन लोगों के लिए जो दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, अपनी ज़ुबान को बुरी बातों से बचाते हैं, और दूसरों के साथ सलामती और मुहब्बत से पेश आते हैं।
तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी में इस बात को अपनाएँ कि हमारी ज़ुबान से कभी कोई बुरी या बेकार बात न निकले, और हम दूसरों को सलाम करने वाले, मुहब्बत बांटने वाले बनें। यही रास्ता हमें उस मुक़ाम तक पहुँचाएगा जहाँ सिर्फ़ सलाम और सुकून होगा। अल्लाह हम सबको जन्नत की इस नेमत का हक़दार बनाए, आमीन।
📜 आयत 60-64 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 62
सूरा मरियम आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग वहाँ सलाम के सिवा कोई बेहूदा बात सुनेंगे…सूरा आयत 62/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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