मरियम · 80/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
وَنَرِثُهُ مَا يَقُولُ وَيَأْتِينَا فَرْدًا ۝٨٠
Wa narisuhoo maa yaqoolu wa yaateenaa fardaa
📖 हिंदी अर्थ
और वो माल व औलाद की निस्बत बक रहा है हम ही उसके मालिक हो बैठेंगे और ये हमारे पास तनहा आयेगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نَرِثُهُ – हम उसका उत्तराधिकारी बनेंगे (अर्थात् उसका माल और औलाद उससे छीन लेंगे)
  • مَا يَقُولُ – वह चीज़ जिसकी वह बात करता है (अर्थात् माल और औलाद जिन पर वह घमंड करता है)
  • فَرْدًا – अकेला, बिना किसी साथी के

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन घमंडी लोगों के बारे में है जो दुनिया के माल और औलाद पर इतराते हैं और सोचते हैं कि यही उनकी स्थायी पूँजी है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम उसका वह सब कुछ विरासत में ले लेंगे जिसकी वह बात करता है — यानी उसका धन, उसकी संतान, उसकी शक्ति और उसका पद — और उसे इस दुनिया से ऐसे निकाल देंगे जैसे वह कभी इन चीज़ों का मालिक ही नहीं था।

फिर क़यामत के दिन वह हमारे सामने अकेला हाज़िर होगा — न उसका माल उसके काम आएगा, न उसकी औलाद उसे बचा सकेगी, न उसके रिश्तेदार और न ही उसकी दुनियावी इज़्ज़त। वह बिल्कुल उसी तरह अकेला आएगा जैसे वह पैदा हुआ था — नंगा, बेसहारा और बेबस।

यह एक बहुत बड़ी सीख है हमारे लिए कि दुनिया का माल और औलाद केवल एक इम्तिहान है। जिसने इन्हें अल्लाह की राह में खर्च किया, वही असल में कामयाब है। और जिसने इन पर घमंड किया और इन्हें ही अपना सब कुछ समझ लिया, वह क़यामत के दिन सब कुछ खोकर अकेला हाज़िर होगा।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सचेत करती है कि हम दुनिया के मोह में न पड़ें। हमारा असल घर आख़िरत है। जो चीज़ें हमें अल्लाह से ग़ाफ़िल कर दें, वे हमारे लिए नुक़सानदेह हैं। आओ, हम अपने माल और औलाद को अल्लाह की राह में खर्च करें, उन्हें नेक बनाएँ, और उन्हें अपने लिए सदक़ा-ए-जारिया बनाएँ — ताकि जिस दिन हम अकेले अल्लाह के सामने हाज़िर हों, उस दिन हमारे अच्छे आमाल हमारे साथ हों और हमारा चेहरा रोशन हो।



📜 आयत 78-82 — सूरा मरियम

78أَطَّلَعَ الْغَيْبَ أَمِ اتَّخَذَ عِندَ الرَّحْمَٰنِ عَهْدًا
क्या उसे ग़ैब का हाल मालूम हो गया है या उसने खुदा से कोई अहद (व पैमान) ले रखा है हरग़िज नहीं
79كَلَّا ۚ سَنَكْتُبُ مَا يَقُولُ وَنَمُدُّ لَهُ مِنَ الْعَذَابِ مَدًّا
जो कुछ ये बकता है (सब) हम सभी से लिखे लेते हैं और उसके लिए और ज्यादा अज़ाब बढ़ाते हैं
80وَنَرِثُهُ مَا يَقُولُ وَيَأْتِينَا فَرْدًا
और वो माल व औलाद की निस्बत बक रहा है हम ही उसके मालिक हो बैठेंगे और ये हमारे पास तनहा आयेगा
81وَاتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ آلِهَةً لِّيَكُونُوا لَهُمْ عِزًّا
और उन लोगों ने खुदा को छोड़कर दूसरे-दूसरे माबूद बना रखे हैं ताकि वह उनकी इज्ज़त के बाएस हों हरग़िज़ नहीं
82كَلَّا ۚ سَيَكْفُرُونَ بِعِبَادَتِهِمْ وَيَكُونُونَ عَلَيْهِمْ ضِدًّا
(बल्कि) वह माबूद खुद उनकी इबादत से इन्कार करेंगे और (उल्टे) उनके दुशमन हो जाएँगे
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
80आयत

अनुवाद — मरियम 80

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Thursday, October 1, 2026

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