Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- كَلَّا: हरगिज़ नहीं, यह सच नहीं है — यह एक सख्त इनकार और झिड़की है।
- سَنَكْتُبُ: हम लिख लेंगे, यानी हमारे पास सब दर्ज हो जाएगा।
- نَمُدُّ: हम बढ़ाते जाएंगे, लगातार बढ़ाना।
- مَدًّا: लगातार और बढ़ाते हुए, जो कभी खत्म न हो।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उस काफिर के जवाब में है जो क़ियामत के दिन अपने लिए माल और औलाद का दावा कर रहा था, और सोचता था कि उसे दुनिया में जो कुछ मिला है, वह आख़िरत में भी मिलेगा। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं!" — यानी तुम्हारा यह ख़याल बिल्कुल ग़लत है। तुम्हारा कोई दावा क़ुबूल नहीं होगा, न तुम्हारे पास कोई सबूत है, न कोई अहद (वादा) जो अल्लाह ने तुमसे किया हो।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "हम ज़रूर लिख लेंगे जो कुछ वह कहता है" — यानी उसका हर झूठ, हर बोल, हर बदनीयत, हर वह बात जो वह अल्लाह पर बोहतान बांधता है, सब हमारे पास दर्ज है। कोई बात छुपी नहीं है, और उसे इसका पूरा बदला मिलेगा।
और फिर फ़रमाया: "और हम उसे अज़ाब में लगातार बढ़ाते जाएंगे" — यानी जिस तरह वह दुनिया में गुमराही और ज़ुल्म में बढ़ता गया, उसी तरह आख़िरत में उसके अज़ाब में भी बढ़ोतरी होती रहेगी। यह अज़ाब सिर्फ़ एक दफ़ा नहीं, बल्कि हमेशा बढ़ता रहेगा, और उस पर और अज़ाब चढ़ता जाएगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त की तरफ़ इशारा करती है — कि अल्लाह तआला की निगरानी हर चीज़ पर है। हमारा हर क़ौल, हर अमल, हर नीयत — सब लिखा जा रहा है। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अपनी ज़ुबान को काबू में रखें, और कभी अल्लाह पर झूठ न बोलें, न उसके दीन के बारे में ग़लत बात करें।
और साथ ही, यह मोमिनों के लिए एक तसल्ली है — कि जो लोग सच्चाई पर हैं, उनके साथ ज़ुल्म करने वालों का हिसाब अल्लाह के पास है। वह किसी को भूलता नहीं, और हर ज़ालिम को उसकी सज़ा ज़रूर मिलेगी। इसलिए हमें सब्र करना चाहिए, सच्चाई पर क़ायम रहना चाहिए, और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए — क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसकी पकड़ बहुत सख्त है।
याद रखिए — यह दुनिया का इम्तिहान है, और आख़िरत का इन्साफ़ बिल्कुल अटल है। जो आज सच्चाई पर चलेगा, वह कल उस इन्साफ़ के दिन कामयाब होगा। और जो झूठ और ज़ुल्म पर चलेगा, उसका अंजाम सिर्फ़ पछतावा और बढ़ता हुआ अज़ाब है। अल्लाह हम सबको सच्चाई पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 77-81 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 79
सूरा मरियम आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो कुछ ये बकता है (सब) हम सभी से लिखे…सूरा आयत 79/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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