मरियम · 82/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
كَلَّا ۚ سَيَكْفُرُونَ بِعِبَادَتِهِمْ وَيَكُونُونَ عَلَيْهِمْ ضِدًّا ۝٨٢
Kallaa; sa yakfuroona bi`ibaadatihim wa yakoonoona `alaihim diddaa
📖 हिंदी अर्थ
(बल्कि) वह माबूद खुद उनकी इबादत से इन्कार करेंगे और (उल्टे) उनके दुशमन हो जाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَلَّا: हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है जैसा ये कहते हैं।
  • سَيَكْفُرُونَ بِعِبَادَتِهِمْ: ये (पूजे जाने वाले) उनकी पूजा का इन्कार करेंगे और उसे अस्वीकार कर देंगे।
  • ضِدًّا: विरोधी, दुश्मन, उनके खिलाफ मददगार।

तफसीर (व्याख्या):

ये आयत उन मुशरिकों के उस दावे का खंडन कर रही है जो कहते थे कि हम जिन मूर्तियों और देवताओं की पूजा करते हैं, वे हमारे लिए इज़्ज़त और सिफ़ारिश का ज़रिया बनेंगी और क़ियामत के दिन हमारी मदद करेंगी। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं!" — यानी ये बिल्कुल ग़लत है, ऐसा हरगिज़ नहीं होगा जैसा ये ख़्याल करते हैं।

बल्कि हक़ीक़त ये है कि क़ियामत के दिन ये माबूदात (पूजे जाने वाले) — चाहे वो मूर्तियाँ हों, फ़रिश्ते हों, जिन्न हों या कोई और — उन मुशरिकों की पूजा से सख़्त इन्कार करेंगे और उससे बराअत (अलगाव) ज़ाहिर करेंगे। वो कहेंगे: "हमने तो उन्हें अपनी पूजा का हुक्म कभी नहीं दिया था, न ही हमने उनकी इबादत पर राज़ी थे।" इस तरह वो माबूदात उनके लिए सिफ़ारिशी नहीं, बल्कि दुश्मन बन जाएँगे और उनके खिलाफ़ गवाही देंगे।

यानी आज जिन्हें ये लोग अपना सहारा और वसीला समझते हैं, क़ियामत के दिन वही उनके सबसे बड़े दुश्मन होंगे और उन्हें रुसवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। ये उनके लिए इज़्ज़त की जगह ज़िल्लत और रुसवाई का सबब बनेंगे।

दावती पहलू:

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है कि इंसान अपनी इज़्ज़त और कामयाबी अल्लाह के सिवा किसी और से तलाश करे — चाहे वो कोई बुज़ुर्ग हो, कोई वसीला हो, या कोई ताक़तवर इंसान — तो ये सरासर धोखा है। सिर्फ़ अल्लाह ही है जो अपने बंदों की मदद करता है, उनकी इज़्ज़त बढ़ाता है और उन्हें कामयाबी देता है। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और पर भरोसा करते हैं, वो क़ियामत के दिन सबसे बड़े नुक़सान में होंगे, क्योंकि उनके सारे सहारे उनसे मुँह मोड़ लेंगे।

इसलिए ऐ मुसलमान! अपनी ज़िंदगी को सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए बनाओ, उसी से मदद माँगो, उसी से डरो और उसी से उम्मीद रखो। यही सबसे बड़ी कामयाबी है। अल्लाह तआला हमें सिर्फ़ अपनी इबादत की तौफ़ीक़ दे और हमें शिर्क और ग़लत भरोसों से महफ़ूज़ रखे। आमीन।



📜 आयत 80-84 — सूरा मरियम

80وَنَرِثُهُ مَا يَقُولُ وَيَأْتِينَا فَرْدًا
और वो माल व औलाद की निस्बत बक रहा है हम ही उसके मालिक हो बैठेंगे और ये हमारे पास तनहा आयेगा
81وَاتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ آلِهَةً لِّيَكُونُوا لَهُمْ عِزًّا
और उन लोगों ने खुदा को छोड़कर दूसरे-दूसरे माबूद बना रखे हैं ताकि वह उनकी इज्ज़त के बाएस हों हरग़िज़ नहीं
82كَلَّا ۚ سَيَكْفُرُونَ بِعِبَادَتِهِمْ وَيَكُونُونَ عَلَيْهِمْ ضِدًّا
(बल्कि) वह माबूद खुद उनकी इबादत से इन्कार करेंगे और (उल्टे) उनके दुशमन हो जाएँगे
83أَلَمْ تَرَ أَنَّا أَرْسَلْنَا الشَّيَاطِينَ عَلَى الْكَافِرِينَ تَؤُزُّهُمْ أَزًّا
(ऐ रसूल) क्या तुमने इसी बात को नहीं देखा कि हमने शैतान को काफ़िरों पर छोड़ रखा है कि वह उन्हें बहकाते रहते हैं
84فَلَا تَعْجَلْ عَلَيْهِمْ ۖ إِنَّمَا نَعُدُّ لَهُمْ عَدًّا
तो (ऐ रसूल) तुम उन काफिरों पर (नुज़ूले अज़ाब की) जल्दी न करो हम तो बस उनके लिए (अज़ाब) का दिन गिन रहे हैं
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीअवतरण स्थान
82आयत

अनुवाद — मरियम 82

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Thursday, October 1, 2026

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