अल-बकरा · 137/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
فَإِنْ آمَنُوا بِمِثْلِ مَا آمَنتُم بِهِ فَقَدِ اهْتَدَوا ۖ وَّإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا هُمْ فِي شِقَاقٍ ۖ فَسَيَكْفِيكَهُمُ اللَّهُ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝١٣٧
Fa in aamanoo bimisli maaa aamantum bihee faqadih tadaw wa in tawallaw fa innamaa hum fee shiqaaq; fasayakfeekahumul laah; wa Huwas Samee`ul Aleem
📖 हिंदी अर्थ
पस अगर ये लोग भी उसी तरह ईमान लाए हैं जिस तरह तुम तो अलबत्ता राहे रास्त पर आ गए और अगर वह इस तरीके से मुँह फेर लें तो बस वह सिर्फ तुम्हारी ही ज़िद पर है तो (ऐ रसूल) उन (के शर) से (बचाने को) तुम्हारे लिए खुदा काफ़ी होगा और वह (सबकी हालत) खूब जानता (और) सुनता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِمِثْلِ مَا آمَنْتُمْ بِهِ – जिस पर तुम ईमान लाए हो, उसी के समान उस पर ईमान लाना।
  • تَوَلَّوْا – मुँह मोड़ लें, ईमान से इनकार कर दें।
  • شِقَاقٍ – विरोध, झगड़ा, दुश्मनी और सत्य से दूर होना।
  • فَسَيَكْفِيكَهُمُ اللَّهُ – अल्लाह तुम्हें उनके (नुकसान) से बचाने के लिए काफी होगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यदि यहूदी, ईसाई और अन्य काफ़िर उसी चीज़ पर ईमान लाएँ जिस पर तुम (हे मुसलमानों!) ईमान लाए हो — यानी अल्लाह की एकता, उसके सभी नबियों, उसकी किताबों, फ़रिश्तों, क़यामत के दिन और भाग्य (तक़दीर) के अच्छे-बुरे पर पूर्ण विश्वास — तो वे निश्चित रूप से सीधे मार्ग पर आ गए। लेकिन यदि वे इस ईमान से मुँह मोड़ लें और उसे स्वीकार करने से इनकार कर दें, तो वे केवल विरोध, दुश्मनी और सत्य से दूर होने की स्थिति में हैं। उनका यह मुँह मोड़ना उनके हठ और अहंकार को दर्शाता है, न कि किसी सच्चाई की कमी को।

हे नबी! उनके इस विरोध से दुखी न हों, क्योंकि अल्लाह तुम्हें उनके नुकसान से बचाने के लिए काफी है। वह तुम्हें उनके शर से सुरक्षित रखेगा और उन पर तुम्हें विजय प्रदान करेगा। अल्लाह तुम्हारी और उनकी सभी बातों को सुनने वाला है और उनके दिलों के भेदों तथा उनके कर्मों को जानने वाला है। वह तुम्हारी मदद करेगा और उनके मक्कारी भरे इरादों को नाकाम कर देगा।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. ईमान की वास्तविकता एक ही है — सभी नबियों पर ईमान लाना और अल्लाह के भेजे हुए धर्म को बिना किसी भेदभाव के स्वीकार करना। यही सीधा मार्ग है।
  2. सत्य को ठुकराने वाले लोग वास्तव में अपने विरोध और दुश्मनी के कारण ही ईमान नहीं लाते, न कि सत्य की कमी के कारण। यह उनकी अपनी हठधर्मिता है।
  3. अल्लाह अपने नबी और ईमानवालों की रक्षा स्वयं करता है। जब अल्लाह साथ हो, तो किसी दुश्मन का डर नहीं होना चाहिए।
  4. अल्लाह की सुनने और जानने की शक्ति पूर्ण है — वह हर बात सुनता है और हर नीयत व कर्म जानता है। इसलिए मुसलमान को अपने अमल में सच्चाई और ईमानदारी अपनानी चाहिए।
  5. यह आयत मुसलमानों को धैर्य और भरोसे की शिक्षा देती है — जब लोग सत्य से मुँह मोड़ें, तो निराश न हों, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह ही सबसे अच्छा सहायक और रक्षक है।


📜 आयत 135-139 — अल-बकरा

135وَقَالُوا كُونُوا هُودًا أَوْ نَصَارَىٰ تَهْتَدُوا ۗ قُلْ بَلْ مِلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۖ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
(यहूदी ईसाई मुसलमानों से) कहते हैं कि यहूद या नसरानी हो जाओ तो राहे रास्त पर आ जाओगे (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि हम इबराहीम के तरीक़े पर हैं जो बातिल से कतरा कर चलते थे और मुशरेकीन से न थे
136قُولُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْنَا وَمَا أُنزِلَ إِلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ وَعِيسَىٰ وَمَا أُوتِيَ النَّبِيُّونَ مِن رَّبِّهِمْ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّنْهُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ
(और ऐ मुसलमानों तुम ये) कहो कि हम तो खुदा पर ईमान लाए हैं और उस पर जो हम पर नाज़िल किया गया (कुरान) और जो सहीफ़े इबराहीम व इसमाइल व इसहाक़ व याकूब और औलादे याकूब पर नाज़िल हुए थे (उन पर) और जो किताब मूसा व ईसा को दी गई (उस पर) और जो और पैग़म्बरों को उनके परवरदिगार की तरफ से उन्हें दिया गया (उस पर) हम तो उनमें से किसी (एक) में भी तफरीक़ नहीं करते और हम तो खुदा ही के फरमाबरदार हैं
137فَإِنْ آمَنُوا بِمِثْلِ مَا آمَنتُم بِهِ فَقَدِ اهْتَدَوا ۖ وَّإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّمَا هُمْ فِي شِقَاقٍ ۖ فَسَيَكْفِيكَهُمُ اللَّهُ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
पस अगर ये लोग भी उसी तरह ईमान लाए हैं जिस तरह तुम तो अलबत्ता राहे रास्त पर आ गए और अगर वह इस तरीके से मुँह फेर लें तो बस वह सिर्फ तुम्हारी ही ज़िद पर है तो (ऐ रसूल) उन (के शर) से (बचाने को) तुम्हारे लिए खुदा काफ़ी होगा और वह (सबकी हालत) खूब जानता (और) सुनता है
138صِبْغَةَ اللَّهِ ۖ وَمَنْ أَحْسَنُ مِنَ اللَّهِ صِبْغَةً ۖ وَنَحْنُ لَهُ عَابِدُونَ
(मुसलमानों से कहो कि) रंग तो खुदा ही का रंग है जिसमें तुम रंगे गए और खुदाई रंग से बेहतर कौन रंग होगा और हम तो उसी की इबादत करते हैं
139قُلْ أَتُحَاجُّونَنَا فِي اللَّهِ وَهُوَ رَبُّنَا وَرَبُّكُمْ وَلَنَا أَعْمَالُنَا وَلَكُمْ أَعْمَالُكُمْ وَنَحْنُ لَهُ مُخْلِصُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि क्या तुम हम से खुदा के बारे झगड़ते हो हालाँकि वही हमारा (भी) परवरदिगार है (वही) तुम्हारा भी (परवरदिगार है) हमारे लिए है हमारी कारगुज़ारियाँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारसतानियाँ और हम तो निरेखरे उसी में हैं
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अनुवाद — अल-बकरा 137

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सूरा आयत 137/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 135–139. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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