अल-बकरा · 192/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
فَإِنِ انتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝١٩٢
Fa ini-ntahaw fa innal laaha Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
फिर अगर वह लोग बाज़ रहें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • انتَهَوْا: रुक जाएं, बाज़ आ जाएं (अपने कुफ़्र और लड़ाई से)।
  • غَفُور: अत्यधिक क्षमा करने वाला।
  • رَّحِيم: बड़ी दया करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यदि ये लोग (मुशरिकीन) अपने कुफ़्र, शिर्क और मस्जिद-ए-हराम के पास आपसे लड़ने से बाज़ आ जाएं, और इस्लाम में दाख़िल हो जाएं, तो आप भी उन्हें छोड़ दें और उनसे लड़ना बंद कर दें। बेशक अल्लाह तआला अपने बंदों के लिए बड़ा क्षमा करने वाला और अत्यंत दयावान है। वह उन लोगों के पिछले गुनाहों को माफ़ कर देता है जो तौबा करके उसकी ओर लौट आते हैं, और उन पर अपनी रहमत की बारिश करता है। वह उन्हें उनके पुराने गुनाहों की सज़ा नहीं देता, बल्कि अपनी दया से उन्हें माफ़ कर देता है और उनके साथ नर्मी और मेहरबानी का बर्ताव करता है। यह अल्लाह की बहुत बड़ी फज़ल है कि जैसे ही इंसान अपनी गलती से बाज़ आता है और सच्चे दिल से तौबा करता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उस पर रहमत फरमाता है।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह तआला बहुत दयालु और क्षमाशील है; वह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ करने में जल्दी करता है, बशर्ते वे सच्चे दिल से तौबा करें।
  2. इस्लाम दुश्मनी और नफ़रत का धर्म नहीं, बल्कि रहमत और क्षमा का धर्म है। दुश्मन भी अगर सुलह का हाथ बढ़ाए, तो उसे क़ुबूल किया जाता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अगर कोई इंसान अपनी गलती से बाज़ आ जाए, तो हमें भी उसके साथ नरमी और भलाई का बर्ताव करना चाहिए, और उसके पिछले क़ुसूर को भुला देना चाहिए।
  4. अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से पहले है; वह अपने बंदों को सज़ा देने में जल्दबाज़ी नहीं करता, बल्कि उन्हें तौबा का मौक़ा देता है और फिर उन्हें माफ़ कर देता है।
  5. यह आयत मुसलमानों को उम्मीद और ख़ुशी देती है कि चाहे कितने ही बड़े गुनाह क्यों न हों, अल्लाह की क्षमा उससे कहीं बड़ी है।


📜 आयत 190-194 — सूरा अल-बकरा

190وَقَاتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ الَّذِينَ يُقَاتِلُونَكُمْ وَلَا تَعْتَدُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَدِينَ
और जो लोग तुम से लड़े तुम (भी) ख़ुदा की राह में उनसे लड़ो और ज्यादती न करो (क्योंकि) ख़ुदा ज्यादती करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
191وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوهُمْ وَأَخْرِجُوهُم مِّنْ حَيْثُ أَخْرَجُوكُمْ ۚ وَالْفِتْنَةُ أَشَدُّ مِنَ الْقَتْلِ ۚ وَلَا تُقَاتِلُوهُمْ عِندَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ حَتَّىٰ يُقَاتِلُوكُمْ فِيهِ ۖ فَإِن قَاتَلُوكُمْ فَاقْتُلُوهُمْ ۗ كَذَٰلِكَ جَزَاءُ الْكَافِرِينَ
और तुम उन (मुशरिकों) को जहाँ पाओ मार ही डालो और उन लोगों ने जहाँ (मक्का) से तुम्हें शहर बदर किया है तुम भी उन्हें निकाल बाहर करो और फितना परदाज़ी (शिर्क) खूँरेज़ी से भी बढ़ के है और जब तक वह लोग (कुफ्फ़ार) मस्ज़िद हराम (काबा) के पास तुम से न लडे तुम भी उन से उस जगह न लड़ों पस अगर वह तुम से लड़े तो बेखटके तुम भी उन को क़त्ल करो काफ़िरों की यही सज़ा है
192فَإِنِ انتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
फिर अगर वह लोग बाज़ रहें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
193وَقَاتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ الدِّينُ لِلَّهِ ۖ فَإِنِ انتَهَوْا فَلَا عُدْوَانَ إِلَّا عَلَى الظَّالِمِينَ
और उन से लड़े जाओ यहाँ तक कि फ़साद बाक़ी न रहे और सिर्फ ख़ुदा ही का दीन रह जाए फिर अगर वह लोग बाज़ रहे तो उन पर ज्यादती न करो क्योंकि ज़ालिमों के सिवा किसी पर ज्यादती (अच्छी) नहीं
194الشَّهْرُ الْحَرَامُ بِالشَّهْرِ الْحَرَامِ وَالْحُرُمَاتُ قِصَاصٌ ۚ فَمَنِ اعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ فَاعْتَدُوا عَلَيْهِ بِمِثْلِ مَا اعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ مَعَ الْمُتَّقِينَ
हुरमत वाला महीना हुरमत वाले महीने के बराबर है (और कुछ महीने की खुसूसियत नहीं) सब हुरमत वाली चीजे एक दूसरे के बराबर हैं पस जो शख्स तुम पर ज्यादती करे तो जैसी ज्यादती उसने तुम पर की है वैसी ही ज्यादती तुम भी उस पर करो और ख़ुदा से डरते रहो और खूब समझ लो कि ख़ुदा परहेज़गारों का साथी है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
192आयत

अनुवाद — अल-बकरा 192

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Monday, September 28, 2026

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