अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَنبِئْهُم: उन्हें सूचित करो, बता दो।
- بِأَسْمَائِهِمْ: उन (वस्तुओं) के नामों के साथ।
- غَيْبَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ: आसमानों और ज़मीन के छिपे रहस्य।
- تُبْدُونَ: जो तुम प्रकट करते हो।
- تَكْتُمُونَ: जो तुम छिपाते हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह तआला ने फ़रिश्तों को आदम अलैहिस्सलाम के सामने झुकने का आदेश दिया और उन्हें बताया कि वह ऐसा जानता है जो वे नहीं जानते, तो अब अल्लाह ने आदम अलैहिस्सलाम को वह सम्मान और विशिष्टता प्रदान करते हुए कहा: "ऐ आदम! तुम इन फ़रिश्तों को उन सभी चीज़ों के नाम बता दो जिन्हें मैंने तुम्हें सिखाया है।" यह एक परीक्षा का क्षण था, और आदम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की दी हुई शिक्षा के अनुसार हर वस्तु का नाम बता दिया—हर चीज़ को उसके नाम के साथ पेश किया।
जब आदम ने सभी नाम बता दिए, तो अल्लाह तआला ने फ़रिश्तों की ओर मुखातिब होकर फ़रमाया: "क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि मैं आसमानों और ज़मीन के सारे छिपे रहस्य जानता हूँ? मैं वह सब कुछ जानता हूँ जो तुम प्रकट करते हो और वह भी जानता हूँ जो तुम अपने दिलों में छिपाते हो।" यहाँ अल्लाह ने उस बात की ओर इशारा किया जो फ़रिश्तों ने पहले कही थी: "क्या तू ज़मीन में ऐसे लोगों को पैदा करेगा जो फ़साद करेंगे और खून बहाएँगे?"—यह उनका प्रकट कथन था। और जो वे छिपाते थे, वह यह था कि उनके दिलों में यह ख़्याल था कि वे आदम से बेहतर हैं, या उन्हें यह आशंका थी कि अगर वे आदम की इज़्ज़त और ज्ञान देखेंगे तो उन्हें अपनी कमी महसूस होगी। अल्लाह ने सब कुछ जान लिया—ज़ाहिर और बातिन।
यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह का ज्ञान असीम है, वह हर छोटी-बड़ी बात, हर प्रकट और छिपी चीज़ से वाकिफ है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को अल्लाह के प्रति विनम्र रखें, क्योंकि वह हमारे दिलों के राज़ तक जानता है। और यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह ने इंसान को ज्ञान और समझ से नवाज़ा है, यह एक बड़ी नेमत है जिसे हमें क़दर करना चाहिए और इसका सही इस्तेमाल करना चाहिए। आदम अलैहिस्सलाम की यह विशिष्टता हमें बताती है कि इंसान को अल्लाह ने अशरफ़ुल मख़लूक़ात (सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ) बनाया है, और हमें इस सम्मान के लायक बनने के लिए ज्ञान हासिल करना चाहिए और अल्लाह के आदेशों का पालन करना चाहिए। यह क़िस्सा हमारे लिए एक नसीहत है कि अल्लाह पर भरोसा रखें, उसके फ़ैसलों पर राज़ी रहें, और उसकी हिकमत (बुद्धि) को समझने की कोशिश करें।
📜 आयत 31-35 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 33
सूरा आयत 33/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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