अल-बकरा · 32/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
قَالُوا سُبْحَانَكَ لَا عِلْمَ لَنَا إِلَّا مَا عَلَّمْتَنَا ۖ إِنَّكَ أَنتَ الْعَلِيمُ الْحَكِيمُ ۝٣٢
Qaaloo subhaanaka laa `ilma lanaaa illaa maa `allamtanaaa innaka antal`aleemul hakeem
📖 हिंदी अर्थ
तब फ़रिश्तों ने (आजिज़ी से) अर्ज़ की तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है हम तो जो कुछ तूने बताया है उसके सिवा कुछ नहीं जानते तू बड़ा जानने वाला, मसलहतों का पहचानने वाला है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُبْحَانَكَ: हम आपको हर कमी और दोष से पाक और पवित्र मानते हैं।
  • الْعَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला, जिसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं।
  • الْحَكِيمُ: पूर्ण तत्वदर्शी, जो हर काम को उचित स्थान पर, उचित प्रकार से और उचित उद्देश्य के लिए करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला ने आदम (अलैहिस्सलाम) को सिखाए गए नामों को फ़रिश्तों के सामने पेश किया और उनसे कहा कि अगर तुम सच्चे हो तो इन नामों की ख़बर दो, तो फ़रिश्तों ने अपनी असमर्थता और अज्ञता का इज़हार करते हुए, पूरी विनम्रता और आदर के साथ कहा: "हम आपको हर ऐब और कमी से पाक मानते हैं। हमें आपने जो कुछ सिखाया है, उसके अलावा हमें कोई ज्ञान नहीं है। बेशक आप ही सब कुछ जानने वाले और पूर्ण तत्वदर्शी हैं।"

इस कथन में फ़रिश्तों ने तीन बातें स्पष्ट कीं:

  1. उन्होंने अल्लाह की पाकी और तन्ज़ीह (पवित्रता) का इज़हार किया, यानी वे अल्लाह के फ़ैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताते, बल्कि उसे सर आँखों पर रखते हैं।
  2. उन्होंने अपनी सीमित जानकारी का इक़रार किया — उनका ज्ञान केवल उतना ही है जितना अल्लाह ने उन्हें सिखाया है।
  3. उन्होंने अल्लाह के दो खूबसूरत नामों (अल-अलीम और अल-हकीम) का ज़िक्र करके यह स्वीकार किया कि अल्लाह का ज्ञान असीमित है और उसका हर फ़ैसला हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित है।

फ़ायदे (सबक):

  1. इंसान को चाहिए कि वह अपने ज्ञान पर घमंड न करे, बल्कि यह स्वीकार करे कि उसका ज्ञान बहुत सीमित है और असली ज्ञान तो अल्लाह के पास है।
  2. जब किसी बात का ज्ञान न हो, तो बेझिझक कह देना चाहिए "मुझे नहीं मालूम" — यह कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि फ़रिश्तों ने भी यही रवैया अपनाया।
  3. अल्लाह के फ़ैसलों पर भरोसा रखना चाहिए, भले ही वे हमारी समझ में न आएँ, क्योंकि अल्लाह हर काम हिकमत से करता है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि इल्म (ज्ञान) हासिल करने का सबसे बड़ा ज़रिया अल्लाह से दुआ और उसकी तरफ़ रुजू करना है, क्योंकि सारा ज्ञान उसी की तरफ़ से आता है।
  5. फ़रिश्तों का यह अंदाज़ हमारे लिए अदब (शिष्टाचार) की मिसाल है — जब वे कुछ नहीं जानते थे, तब भी उन्होंने अल्लाह की तारीफ़ और तन्ज़ीह से अपनी बात शुरू की।


📜 आयत 30-34 — सूरा अल-बकरा

30وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَائِكَةِ إِنِّي جَاعِلٌ فِي الْأَرْضِ خَلِيفَةً ۖ قَالُوا أَتَجْعَلُ فِيهَا مَن يُفْسِدُ فِيهَا وَيَسْفِكُ الدِّمَاءَ وَنَحْنُ نُسَبِّحُ بِحَمْدِكَ وَنُقَدِّسُ لَكَ ۖ قَالَ إِنِّي أَعْلَمُ مَا لَا تَعْلَمُونَ
और (ऐ रसूल) उस वक्त क़ो याद करो जब तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रिश्तों से कहा कि मैं (अपना) एक नाएब ज़मीन में बनानेवाला हूँ (फरिश्ते ताज्जुब से) कहने लगे क्या तू ज़मीन ऐसे शख्स को पैदा करेगा जो ज़मीन में फ़साद और खूँरेज़ियाँ करता फिरे हालाँकि (अगर) ख़लीफा बनाना है (तो हमारा ज्यादा हक़ है) क्योंकि हम तेरी तारीफ व तसबीह करते हैं और तेरी पाकीज़गी साबित करते हैं तब खुदा ने फरमाया इसमें तो शक ही नहीं कि जो मैं जानता हूँ तुम नहीं जानते
31وَعَلَّمَ آدَمَ الْأَسْمَاءَ كُلَّهَا ثُمَّ عَرَضَهُمْ عَلَى الْمَلَائِكَةِ فَقَالَ أَنبِئُونِي بِأَسْمَاءِ هَٰؤُلَاءِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और (आदम की हक़ीक़म ज़ाहिर करने की ग़रज़ से) आदम को सब चीज़ों के नाम सिखा दिए फिर उनको फरिश्तों के सामने पेश किया और फ़रमाया कि अगर तुम अपने दावे में कि हम मुस्तहके ख़िलाफ़त हैं। सच्चे हो तो मुझे इन चीज़ों के नाम बताओ
32قَالُوا سُبْحَانَكَ لَا عِلْمَ لَنَا إِلَّا مَا عَلَّمْتَنَا ۖ إِنَّكَ أَنتَ الْعَلِيمُ الْحَكِيمُ
तब फ़रिश्तों ने (आजिज़ी से) अर्ज़ की तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है हम तो जो कुछ तूने बताया है उसके सिवा कुछ नहीं जानते तू बड़ा जानने वाला, मसलहतों का पहचानने वाला है
33قَالَ يَا آدَمُ أَنبِئْهُم بِأَسْمَائِهِمْ ۖ فَلَمَّا أَنبَأَهُم بِأَسْمَائِهِمْ قَالَ أَلَمْ أَقُل لَّكُمْ إِنِّي أَعْلَمُ غَيْبَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَأَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا كُنتُمْ تَكْتُمُونَ
(उस वक्त ख़ुदा ने आदम को) हुक्म दिया कि ऐ आदम तुम इन फ़रिश्तों को उन सब चीज़ों के नाम बता दो बस जब आदम ने फ़रिश्तों को उन चीज़ों के नाम बता दिए तो खुदा ने फरिश्तों की तरफ ख़िताब करके फरमाया क्यों, मैं तुमसे न कहता था कि मैं आसमानों और ज़मीनों के छिपे हुए राज़ को जानता हूँ, और जो कुछ तुम अब ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छिपाते थे (वह सब) जानता हूँ
34وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰ وَاسْتَكْبَرَ وَكَانَ مِنَ الْكَافِرِينَ
और (उस वक्त क़ो याद करो) जब हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करो तो सब के सब झुक गए मगर शैतान ने इन्कार किया और ग़ुरूर में आ गया और काफ़िर हो गया
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
32आयत

अनुवाद — अल-बकरा 32

सूरा अल-बकरा आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तब फ़रिश्तों ने (आजिज़ी से) अर्ज़ की तू (हर ऐब…

सूरा आयत 32/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए