अल-बकरा · 68/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَ ۚ قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ لَّا فَارِضٌ وَلَا بِكْرٌ عَوَانٌ بَيْنَ ذَٰلِكَ ۖ فَافْعَلُوا مَا تُؤْمَرُونَ ۝٦٨
Qaalud-`u lanaa rabbaka yubaiyil lanaa maa hee; qaala innahoo yaqoolu innahaa baqaratul laa faaridunw wa laa bikrun `awaanum baina zaalika faf`aloo maa tu`maroon
📖 हिंदी अर्थ
(तब वह लोग कहने लगे कि (अच्छा) तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें बता दे कि वह गाय कैसी हो मूसा ने कहा बेशक खुदा ने फरमाता है कि वह गाय न तो बहुत बूढ़ी हो और न बछिया बल्कि उनमें से औसत दरजे की हो, ग़रज़ जो तुमको हुक्म दिया गया उसको बजा लाओ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَارِضٌ: बूढ़ी गाय जो दूध देना बंद कर चुकी हो और ब्याने की उम्र से गुज़र चुकी हो।
  • بِكْرٌ: छोटी और कम उम्र की गाय जिसने अभी तक ब्याया न हो।
  • عَوَانٌ: दरम्यानी उम्र की गाय, जो न बूढ़ी हो और न छोटी, बल्कि मध्यम आयु की हो और एक-दो बार ब्याई हो।

तफ़सीर:

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को अल्लाह का हुक्म सुनाया कि उन्हें एक गाय ज़ब्ह करनी है, तो उन्होंने फिर से सवाल किया और कहा: "आप अपने रब से हमारे लिए दुआ कीजिए कि वह हमें साफ़ बता दे कि वह गाय कैसी हो?" यानी उन्होंने पहले ही हुक्म को काफ़ी न समझा और अधिक तफ़सील माँगी। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें जवाब दिया कि अल्लाह फ़रमाता है: "वह गाय न तो बूढ़ी है और न छोटी, बल्कि इन दोनों के दरम्यान मध्यम उम्र की है।" यानी वह एक जवान और ताक़तवर गाय है जो काम करने के क़ाबिल है। फिर आपने उन्हें ताकीद की: "अब जो हुक्म दिया गया है उसे बजा लाओ।" यानी अब और सवाल-जवाब न करो, बल्कि जो कहा गया है उस पर अमल करो। यह आयत बताती है कि बनी इसराइल अपने सवालों से मामले को मुश्किल कर रहे थे, जबकि अल्लाह का हुक्म सुनते ही बिना किसी हिचकिचाहट के उस पर अमल करना चाहिए था।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह के हुक्म पर फ़ौरन अमल करना चाहिए और बेवजह के सवालों से बचना चाहिए, क्योंकि ज़्यादा पूछ-ताछ से अल्लाह के दीन में सख़्ती आ सकती है।
  2. अल्लाह अपने बंदों पर आसानी चाहता है, इसलिए वह हर हुक्म में स्पष्टता और आसानी रखता है, बशर्ते बंदे उसकी पैरवी करें।
  3. अल्लाह के नबी की बात को बिना किसी शक के मानना चाहिए, क्योंकि नबी सिर्फ़ वही बताते हैं जो अल्लाह की तरफ़ से होता है।
  4. इस आयत से यह भी सबक़ मिलता है कि दुनिया के मामलों में भी मध्यम रास्ता अपनाना बेहतर है — न इफ़रात (ज़्यादती) और न तफ़रीत (कमी) — यही इस्लामी तालीमात का ख़ुलासा है।
🎧 सुनें

📜 आयत 66-70 — अल-बकरा

66فَجَعَلْنَاهَا نَكَالًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهَا وَمَا خَلْفَهَا وَمَوْعِظَةً لِّلْمُتَّقِينَ
पस हमने इस वाक़ये से उन लोगों के वास्ते जिन के सामने हुआ था और जो उसके बाद आनेवाले थे अज़ाब क़रार दिया, और परहेज़गारों के लिए नसीहत
67وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُكُمْ أَن تَذْبَحُوا بَقَرَةً ۖ قَالُوا أَتَتَّخِذُنَا هُزُوًا ۖ قَالَ أَعُوذُ بِاللَّهِ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْجَاهِلِينَ
और (वह वक्त याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि खुदा तुम लोगों को ताकीदी हुक्म करता है कि तुम एक गाय ज़िबाह करो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमसे दिल्लगी करते हो मूसा ने कहा मैं खुदा से पनाह माँगता हूँ कि मैं जाहिल बनूँ
68قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَ ۚ قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ لَّا فَارِضٌ وَلَا بِكْرٌ عَوَانٌ بَيْنَ ذَٰلِكَ ۖ فَافْعَلُوا مَا تُؤْمَرُونَ
(तब वह लोग कहने लगे कि (अच्छा) तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें बता दे कि वह गाय कैसी हो मूसा ने कहा बेशक खुदा ने फरमाता है कि वह गाय न तो बहुत बूढ़ी हो और न बछिया बल्कि उनमें से औसत दरजे की हो, ग़रज़ जो तुमको हुक्म दिया गया उसको बजा लाओ
69قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا لَوْنُهَا ۚ قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ صَفْرَاءُ فَاقِعٌ لَّوْنُهَا تَسُرُّ النَّاظِرِينَ
वह कहने लगे (वाह) तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें ये बता दे कि उसका रंग आख़िर क्या हो मूसा ने कहा बेशक खुदा फरमाता है कि वह गाय खूब गहरे ज़र्द रंग की हो देखने वाले उसे देखकर खुश हो जाए
70قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَ إِنَّ الْبَقَرَ تَشَابَهَ عَلَيْنَا وَإِنَّا إِن شَاءَ اللَّهُ لَمُهْتَدُونَ
तब कहने लगे कि तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें ज़रा ये तो बता दे कि वह (गाय) और कैसी हो (वह) गाय तो और गायों में मिल जुल गई और खुदा ने चाहा तो हम ज़रूर (उसका) पता लगा लेगे
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अनुवाद — अल-बकरा 68

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Tuesday, August 18, 2026

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