अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَارِضٌ: बूढ़ी गाय जो दूध देना बंद कर चुकी हो और ब्याने की उम्र से गुज़र चुकी हो।
- بِكْرٌ: छोटी और कम उम्र की गाय जिसने अभी तक ब्याया न हो।
- عَوَانٌ: दरम्यानी उम्र की गाय, जो न बूढ़ी हो और न छोटी, बल्कि मध्यम आयु की हो और एक-दो बार ब्याई हो।
तफ़सीर:
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को अल्लाह का हुक्म सुनाया कि उन्हें एक गाय ज़ब्ह करनी है, तो उन्होंने फिर से सवाल किया और कहा: "आप अपने रब से हमारे लिए दुआ कीजिए कि वह हमें साफ़ बता दे कि वह गाय कैसी हो?" यानी उन्होंने पहले ही हुक्म को काफ़ी न समझा और अधिक तफ़सील माँगी। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें जवाब दिया कि अल्लाह फ़रमाता है: "वह गाय न तो बूढ़ी है और न छोटी, बल्कि इन दोनों के दरम्यान मध्यम उम्र की है।" यानी वह एक जवान और ताक़तवर गाय है जो काम करने के क़ाबिल है। फिर आपने उन्हें ताकीद की: "अब जो हुक्म दिया गया है उसे बजा लाओ।" यानी अब और सवाल-जवाब न करो, बल्कि जो कहा गया है उस पर अमल करो। यह आयत बताती है कि बनी इसराइल अपने सवालों से मामले को मुश्किल कर रहे थे, जबकि अल्लाह का हुक्म सुनते ही बिना किसी हिचकिचाहट के उस पर अमल करना चाहिए था।
फ़ायदे:
- अल्लाह के हुक्म पर फ़ौरन अमल करना चाहिए और बेवजह के सवालों से बचना चाहिए, क्योंकि ज़्यादा पूछ-ताछ से अल्लाह के दीन में सख़्ती आ सकती है।
- अल्लाह अपने बंदों पर आसानी चाहता है, इसलिए वह हर हुक्म में स्पष्टता और आसानी रखता है, बशर्ते बंदे उसकी पैरवी करें।
- अल्लाह के नबी की बात को बिना किसी शक के मानना चाहिए, क्योंकि नबी सिर्फ़ वही बताते हैं जो अल्लाह की तरफ़ से होता है।
- इस आयत से यह भी सबक़ मिलता है कि दुनिया के मामलों में भी मध्यम रास्ता अपनाना बेहतर है — न इफ़रात (ज़्यादती) और न तफ़रीत (कमी) — यही इस्लामी तालीमात का ख़ुलासा है।
📜 आयत 66-70 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 68
सूरा अल-बकरा आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तब वह लोग कहने लगे कि (अच्छा) तुम अपने खुदा…सूरा आयत 68/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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